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PU को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव राज्य भेजे, हरसंभव मदद करूंगा : उपराष्ट्रपति

Updated at : 04 Aug 2019 11:15 AM (IST)
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PU को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव राज्य भेजे, हरसंभव मदद करूंगा : उपराष्ट्रपति

पटना : उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने से संबंधित प्रस्ताव तैयार करके राज्य सरकार केंद्र को भेजे. इसके बाद मैं अपने स्तर से इसमें रुचि लेकर इसके लिए जो उचित होगा, उस पर विचार करूंगा और वह करूंगा. उन्होंने कहा किवे केंद्रीय मानव […]

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पटना : उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने से संबंधित प्रस्ताव तैयार करके राज्य सरकार केंद्र को भेजे. इसके बाद मैं अपने स्तर से इसमें रुचि लेकर इसके लिए जो उचित होगा, उस पर विचार करूंगा और वह करूंगा. उन्होंने कहा किवे केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को बुलाकर, इस मसले पर बात करेंगे. इसके लिए क्या प्रावधान है, उस पर बात करके आगे की प्रक्रिया की जायेगी. संवैधानिक तौर पर देश के दूसरे प्रमुख होने के नाते मुझसे जो बन सकेगा इसके लिए, वह अवश्य करूंगा.

उपराष्ट्रपति पटना विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि यहां के केंद्रीय लाइब्रेरी के लिए राज्यपाल से प्रस्ताव भेजे कि क्या-क्या बेहतर हो सकता है. इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री से बात करेंगे. इसके लिए जो भी बेहतरीन होगा, वह करेंगे. उन्होंने वीसी राय, अनुग्रह नारायण सिंह समेत कई लोगों का नाम लेते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय से कई महान हस्तियां ने ज्ञान अर्जन किया है. इसमें केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी समेत अन्य भी शामिल हैं, जिनकी देश की राजनीति में उल्लेखनीय योगदान है.

वेंकैया नायडू के संबोधन के दौरान विश्वविद्यालय के कई छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने को लेकर नारेबाजी भी की. उपराष्ट्रपति ने कहा कि जिस समय इस विश्वविद्यालय में 1974 के दौरान छात्रों आंदोलन की रूप-रेखा बन रही थी. उसी दौरान वे भी आंध्र विश्वविद्यालय में बतौर छात्र नेता आंदोलन की तैयारी कर रहे थे. इसमें वे जेल भी गये थे.

उपराष्ट्रपति ने पुस्तक और ज्ञानार्जन को आज के डिजिटल युग में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आज गूगल का जमाना है, लेकिन इसको चलाने के लिए भी गुरु चाहिए. वह गुरु पुस्तकें हैं. आम लोगों से कहा कि चार-सी के आधार पर ही किसी नेता का चयन कर वोट करें. इसमें कैरेक्टर (चरित्र), कैलिबर (क्षमता), कंडक्ट (बरताव) और कैपेसिटी (योग्यता) शामिल हैं. परंतु यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल लोग दूसरे चार-सी यानी कैश (मुद्रा), कास्ट (जाति), कॉम्यूनलिटी (संप्रदायिकता) और क्रिमिनलिटी (अपराध) पर ज्यादा ध्यान देते हैं. पहली वाली चार-सी पुस्तकों से ही मिलेंगी. उन्होंने युवाओं से कहा कि चार चीजों मां, जन्म भूमि, मातृ भाषा और मातृ भूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए. इसका विस्तार से कारण भी समझाया. उन्होंने बिहार की कई स्तर पर प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ज्ञान और अध्यात्म की भूमि है. चाणक्य, कौटल्य समेत अन्य हस्तियां यहीं की हैं.

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