पटना : 23 हजार रुपये के 13 इ-टिकट के साथ दुकानदार व दो धराये
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jun 2019 9:08 AM (IST)
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पटना : राजेंद्र नगर टर्मिनल आरपीएफ को सूचना मिली कि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के समीप कलर टोन स्टूडियो साइबर नामक दुकान में बड़े पैमाने पर टिकट की दलाली की जा रही है. इस सूचना के आधार पर टर्मिनल आरपीएफ की टीम बुधवार की सुबह 11 बजे साइबर दुकान में छापेमारी की, जिसमें 13 इ-टिकट के साथ […]
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पटना : राजेंद्र नगर टर्मिनल आरपीएफ को सूचना मिली कि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के समीप कलर टोन स्टूडियो साइबर नामक दुकान में बड़े पैमाने पर टिकट की दलाली की जा रही है. इस सूचना के आधार पर टर्मिनल आरपीएफ की टीम बुधवार की सुबह 11 बजे साइबर दुकान में छापेमारी की, जिसमें 13 इ-टिकट के साथ दो दलालों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार दलाल में एक दुकान के मालिक है और दूसरा संचालक है.
इन दोनों दलालों पर रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया गया. आरपीएफ की टीम साइबर दुकान में छापेमारी किया, तो आरआरसीटीसी के पर्सनल आइडी के जरिये बुक कराएं गये 13 इ-टिकट जब्त किया गया. इस टिकट की कीमत 23 हजार रुपया है. इसके साथ ही एक हजार कैश के साथ साथ एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप और अन्य समान जब्त किया गया. टर्मिनल आरपीएफ इंस्पेक्टर ने बताया कि सूचना के आधार छापेमारी की गयी, तो दुकान मालिकों को ई-टिकट के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया गया.
बिहार बोर्ड का कमाल देशभर के लिए िमसाल
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) का नाम लेने पर कभी ऊंची बिल्डिंग की खिड़कियों पर खड़े होकर कदाचार कराते लोगों की तस्वीर सामने होती थी. बिहार बोर्ड की टॉपर को देश भर में ‘ प्रोडिकल गर्ल ‘ बोल कर चिढ़ाया जाता था. लेकिन, बीते तीन वर्षों में बिहार बोर्ड की बदली कार्य संस्कृति व कार्य प्रणाली ने देश भर के परीक्षा बोर्डों का ध्यान इसकी ओर खींचा है. वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर के सकारात्मक प्रयासों की बदौलत बिहार बोर्ड ने इस साल देश भर में सबसे पहले व बेहतर रिजल्ट देकर इतिहास रचा है.
छत्तीसगढ़ बोर्ड के बाद कई अन्य राज्यों के बोर्ड भी इस सफलता को देखने-समझने पटना आने वाले हैं. परीक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद प्रमाणपत्रों के वेरिफिकेशन, स्कूल-कॉलेजों के एफिलिएशन व अनुदान की प्रक्रिया को ऑनलाइन कराने पर बोर्ड का फोकस है. बिहार बोर्ड में आये इस बदलाव की पड़ताल करती पढ़िए सुमित कुमार की रिपोर्ट.
बदला गया काम करने का तरीका, तो मिली सफलता
सारधा घोटाला सहित तमाम आरोपों के बीच नौ जून 2017 को राज्य सरकार ने आइएएस अधिकारी आनंद किशोर की बतौर बोर्ड अध्यक्ष पोस्टिंग की.
आनंद किशोर ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए व्यवस्था व परीक्षा सुधार का अभियान शुरू किया. सबसे पहले समिति की प्रशासनिक संरचना का सुदृढ़ीकरण किया गया. इसे चार भागों में बांट कर इनमें संविदा और प्रतिनियुक्ति पर पदाधिकारियों की नियुक्ति कर क्रियाशील बनाया. मैनुअल चल रही पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए आइटी की टीम गठित की. पुराने कर्मियों की कार्यसंस्कृति में सुधार को लेकर बायोमीटरिक सिस्टम से हाजिरी व ड्रेस कोड जैसे प्रावधान लागू किये.
पहले साल से ही भराये जाने लगे ऑनलाइन फॉर्म : सबसे पहले मैट्रिक-इंटर फॉर्म भरने की प्रक्रिया ऑनलाइन की गयी. इससे समय की बचत हुई ही रजिस्ट्रेशन व एडमिट कार्ड में नाम, उम्र आदि की होने वाली अशुद्धियों को काफी हद तक दूर किया जा सका.
इसके बाद प्री-एग्जाम व पोस्ट एग्जाम सॉफ्टवेयर तैयार किये गये ताकि परीक्षा से जुड़े कार्यों को मैनुअल के बदले कंप्यूटराइज्ड किया जा सके. उत्तर पुस्तिका के ऊपर बार कोडिंग वाली ओएमआर शीट की व्यवस्था हुई. पहले परीक्षार्थी की पहचान की पूरी विवरणी कॉपी में अंकित होने की वजह से अवांछित तत्व कॉपी जांचने वाले परीक्षकों पर अनुचित दबाव बना कर नंबर बढ़वाने का काम करते थे. लेकिन नयी ओएमआर शीट से इस पर रोक लग गयी.
तकनीक के इस्तेमाल ने देश में दिलायी अलग पहचान : आइआइटी कानपुर के टॉपरों में रहे बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर के द्वारा तकनीक के लगातार इस्तेमाल ने बोर्ड को देश में अलग पहचान दिलायी. देश में पहली बार किसी बोर्ड द्वारा सभी विद्यार्थियों के नाम से प्री-प्रिंटेड कॉपी (बारकोड एवं लिथकोड के साथ) बनायी गयी.
इसके तहत परीक्षा के समय परीक्षार्थी का नाम, रौल कोड, रौल नंबर, विषय कोड, परीक्षा की तिथि आदि पूर्व से ही विद्यार्थी के कॉपी एवं ओएमआर शीट पर प्रिंट कर उपलब्ध करायी गयी. इससे पहले परीक्षार्थियों को लगभग 27–28 प्रकार के गोलकों को भरना पड़ता था और यदि एक भी गोलक को भरने में कोई परीक्षार्थी गलती करता था तो उसके रिजल्ट में गड़बड़ी की संभावना रहती थी. इस गड़बड़ी को दूर करने में काफी समय लगता था. बोर्ड अध्यक्ष ने कई प्रकार के नये कंप्यूटराइज्ड प्रपत्र अपने स्तर से तैयार किये. उन मल्टीपल कंप्यूटराइज्ड प्रपत्रों की स्कैनिंग कराकर डाटा तैयार कराया गया, जिसके चलते रिजल्ट प्रोसेसिंग काफी तेज गति से हो सका. मूल्यांकन के लिये बनाये गये केंद्रों पर कंप्यूटरों की व्यवस्था कर बारकोडेड कॉपियों के अंकों की इंट्री मूल्यांकन केंद्रों से सीधे कंप्यूटर के माध्यम से की गयी. नकल रोकने को सभी विषयों मेें प्रश्न पत्रों के दस सेट तैयार कराये गये.
बोर्ड ने अगले साल 30 लाख परीक्षार्थियों के लिए इस्तेमाल होने वाली करीब चार करोड़ कॉपियों पर परीक्षार्थियों के फोटो प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है, ताकि ‘मुन्नाभाई’ जैसी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म किया जा सके.
अतिरिक्त विकल्प से बढ़े छात्रों के अंक : पिछले वर्षों में नकल पर कड़ाई से रोक लगने की वजह से रिजल्ट काफी गिर गया. इसके बाद बिहार बोर्ड ने ऐसी व्यवस्था की ताकि परीक्षार्थियों को उनके उत्तर के हिसाब से उचित अंक मिले. देश में पहली बार किसी बोर्ड ने इंटर-मैट्रिक के सभी विषयों में 50-50 ऑब्जेक्टिव प्रश्न रखे. इससे पास होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई. यही नहीं, सभी विषयों के लघु उत्तरीण प्रश्नों व दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में 100 फीसदी तक अतिरिक्त विकल्प दिये, जिससे अंक प्रतिशत बढ़ाने में सहूलियत मिली.
बोर्ड अंक प्रतिशत को बढ़ाने के लिए परीक्षा पैटर्न में थोड़ा और बदलाव लाने पर काम कर रहा है. आने वाले दिनों में छात्रों को मैट्रिक व इंटर के डमी एडमिट कार्ड को खुद डाउनलोड करने की सहूलियत दी जायेगी, ताकि एडमिट कार्ड या प्रमाण पत्र की गड़बड़ियों को पूरी तरह खत्म किया जा सके.
इस साल दो से ढाई महीने पहले ही आ गये इंटर-मैट्रिक के रिजल्ट : तकनीक के इस्तेमाल की बदौलत बिहार बोर्ड ने पिछले साल के मुकाबले इस साल इंटर का रिजल्ट दो माह सात दिन जबकि मैट्रिक का रिजल्ट करीब ढ़ाई महीने पहले निकालने में सफलता हासिल की. सबसे बड़ी बात रही कि मूल्यांकन कार्य शुरू होने के बाद एक महीने के भीतर ही रिजल्ट प्रकाशित हुआ. इस दौरान करीब 3.50 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा गया.
ऑनलाइन होगा प्रमाणपत्रों का वेरिफिकेशन व एफिलिएशन
अगले तीन से चार महीने में बिहार बोर्ड के प्रमाणपत्रों का वेरिफिकेशन, स्कूल-कॉलेजों को दिये जाने वाला एफिलिएशन व अनुदान की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जायेगी. ऐसा होने पर स्कूल-कॉलेज के प्राचार्यों के साथ ही विद्यार्थियों को बोर्ड कार्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन वेरिफिकेशन की सुविधा देने के लिए बिहार बोर्ड पिछले 30 वर्षों (1986-2016) के विद्यार्थियों के प्रमाण पत्रों को ऑनलाइन कर रहा है. इससे विद्यार्थी अंक पत्र एवं प्रमाणपत्र को ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे.
नये दिये जाने वाले मार्क्सशीट व सर्टिफिकेट के प्रारूप में भी परिवर्तन करते हुए इनमें कई सिक्यूरिटी फीचर (एम-साइन, क्यू आर कोड आदि) डाले गये हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति दुनिया के किसी कोने से इंटरनेट के माध्यम से इन प्रमाण पत्रों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन कर सकता है.
कार्यालय आकर आवेदन की नहीं पड़ेगी जरूरत
सूबे के 3339 इंटर कॉलेजों व 6500 मैट्रिक स्कूलों का बिहार बोर्ड से एफिलिएशन है. वर्तमान में एफिलिएशन को लेकर बिहार बोर्ड में आकर मैनुअली आवेदन करना होता है. इसके साथ ही फॉलोअप के लिए भी संबंधित स्कूल-कॉलेजों के प्राचार्य बोर्ड के चक्कर लगाते रहते हैं. प्रक्रिया ऑनलाइन होने पर भविष्य में आवेदकों को इसकी जरूरत नहीं होगी. आवेदन के ऑनलाइन आवेदन को सीधे संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी को जांच के लिए भेज दिया जायेगा. डीइओ जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन ही अपलोड करेंगे.
किस कारण किसी स्कूल-कॉलेज को मान्यता नहीं मिली, उसका कारण भी बताया जायेगा. इसी तरह, बिहार बोर्ड हर साल शैक्षणिक संस्थानों को 300 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान देती है. इसकी पूरी प्रक्रिया भी छह महीने के अंदर ऑनलाइन हो जायेगी.
इंटर-मैट्रिक परीक्षा होगी प्रमंडलीय मुख्यालय भवनों में
क्ष्ेात्रीय कार्यालयों के माध्यम से भी बिहार बोर्ड में बड़ा बदलाव दिखेगा. अगले तीन से चार महीने में सभी नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में बनाये जा रहे क्षेत्रीय कार्यालय सह परीक्षा भवन तैयार हो जायेंगे. इससे किसी भी तरह के प्रमाण पत्र को लेकर मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी होगी. इन भवनों का मल्टीपल उपयोग होगा.
मसलन हर भवन में एक साथ चार से पांच हजार परीक्षार्थियों के सीसीटीवी निगरानी में परीक्षा देने की व्यवस्था होगी. परीक्षा के बाद कॉपियों का स्टोरेज भी यहां किया जायेगा. इन परीक्षा भवनों का कॉपियों की जांच के लिए मूल्यांकन सेंटर के रूप में उपयोग किया जायेगा. परीक्षा भवनों का एक भाग समिति के क्षेत्रीय कार्यालय के रूप में उपयोग किया जायेगा. हर भवन के निर्माण पर करीब 16.93 करोड़ रुपये की लागत अायी है.
ये परीक्षा भवन पूरी तरह सीसीटीवी एवं वेबकास्टिंग की सुविधा से युक्त होंगे. इसके अलावा बिहार बोर्ड कार्यालय प्रांगण में ही 10.50 करोड़ रुपये की लागत से पांच मंजिला प्रशासनिक भवन का निर्माण भी किया जा रहा है, जो अगले तीन से चार महीने में तैयार हो जायेगा.
ऑनलाइन शिकायत लेने की हो रही तैयारी
हार बोर्ड शिकायतों को आॅनलाइन लेने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए ऑनलाइन ग्रीवांस रेड्रेसल सिस्टम तैयार किया जा रहा है.
इसके माध्यम से समिति से संबंधित स्कूल, कॉलेज, छात्र व अभिभावकों की शिकायतें वेबसाइट पर ली जायेंगी तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसका निराकरण सुनिश्चित किया जायेगा.
बदलाव को सफल होते देखना संतुष्टि की बात
आनंद किशोर, अध्यक्ष, बिहार बोर्ड
बिहार बोर्ड में आये इस बदलाव की वजह क्या रही ?
-नौ जून 2016को जब पदभार
संभाला तो उस समय बिहार बोर्ड काफी
बदनाम था. नयी जिम्मेवारी को चुनौती के रूप में लिया, इस वजह से ऐसा संभव हो सका. वर्क कल्चर से लेकर परीक्षा सुधार पर काम किया. तकनीक के इस्तेमाल से बड़ी सफलताएं मिली.
बदलाव का आइडिया कहां से मिला ?
-अगस्त 2017 में हमने पहली बार बिहार में स्टेट बोर्डस का नेशनल कांफ्रेंस कराया. परीक्षा सुधार पर यह देश का पहला कांफ्रेंस था, जिसमें सीबीएसइ सहित 18 राज्यों के बोर्डों की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई. इसके आधार पर ही हमने रोडमैप तैयार कर चरणबद्ध तरीके से सुधार लागू किये.
बोर्ड में आये इन बदलावों से आप कितना संतुष्ट हैं?
-पुरानी टीम से ही बोर्ड में यह बदलाव संभव हुआ. वर्क कल्चर बनाया और उसमें सुधार किया. कई बड़े पदों पर काम किया, लेकिन प्रशासनिक रूप से किसी भी बदलाव को सफल होते देखना बहुत संतुष्टि की बात है. इससे करोड़ों लोगों को फायदा होगा.
भविष्य को लेकर क्या योजना है?
-छात्रों का अंक प्रतिशत बढ़े, इसको लेकर परीक्षा पैटर्न में और सुधार होगा. बोर्ड की व्यवस्थाओं को पारदर्शी व सुगम बनाना हमारा लक्ष्य है. ऊंचाई पर पहुंचने से ज्यादा बड़ी चुनौती वहां पर टिके रहना है. बोर्ड के इंटर्नल सिस्टम का कंप्यूटराइजेशन करते हुए फाइल मूवमेंट, कर्मियों के सर्विस बुक, लीव, एसीआर आदि को भी ऑनलाइन किया जायेगा.
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