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दो वर्ष की हुई नगर सरकार कुछ प्रयास हुए पूरे कई अब तक अधूरे

Updated at : 10 Jun 2019 9:23 AM (IST)
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दो वर्ष की हुई नगर सरकार कुछ प्रयास हुए पूरे कई अब तक अधूरे

इस बार शहर की सफाई को लेकर नगर निगम का सबसे बेहतर प्रयास डोर-टू-डोर कचरा उठाव की शुरुआत करना रहा. बगैर प्राइवेट एजेंसी का सहारा लिए इसकी शुरुआत की गयी है. इसके लिए लगभग डेढ़ सौ करोड़ के संसाधनों की खरीद हुई. सभी 75 वार्डों के लिए ऑटो टीपर, सभी अंचलों में 150 जेसीबी, कचरा […]

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इस बार शहर की सफाई को लेकर नगर निगम का सबसे बेहतर प्रयास डोर-टू-डोर कचरा उठाव की शुरुआत करना रहा. बगैर प्राइवेट एजेंसी का सहारा लिए इसकी शुरुआत की गयी है. इसके लिए लगभग डेढ़ सौ करोड़ के संसाधनों की खरीद हुई. सभी 75 वार्डों के लिए ऑटो टीपर, सभी अंचलों में 150 जेसीबी, कचरा ट्रांसपोर्टेशन के लिए 100 से अधिक वाहनों की खरीददारी की गयी. दस हाइवा, छह पोकलेन की खरीदारी की गयी है. लगभग छह माह से सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा उठाव का काम चल रहा है.
सड़कों की सफाई : शहर की प्रमुख सड़कों की सफाई के लिए नगर निगम ने अतिरिक्त मजदूरों को बहाल किया है. एक सड़क पर प्रतिदिन पांच से 10 सफाई मजदूर वार्ड के हिसाब से दिखते हैं. रोड स्वीपिंग मशीन से सड़क साफ करने का काम चल रहा है.
नहीं बना कचरा रिसाइक्लिंग प्लांट : शहर से कचरे के निबटारे को लेकर नगर निगम की उपलब्धि बेहतर नहीं है. लगभग दो वर्षों तक पिछली कंपनी ने निगम से कचरा लेने का पैसा बनाने व वहां की मिट्टी को निकाल कर बेचने के सिवाय कुछ भी नहीं किया.
नाला उड़ाही : नाला उड़ाही वर्षों से नगर निगम के लिए बड़ी समस्या वाला रहा है. इस बार भी नगर निगम की नाला उड़ाही की स्थिति बेहतर नहीं रही है. नगर निगम मुख्यालय की ओर से सभी अंचलों को 25 लाख की राशि जारी हो चुकी है. सभी अंचलों को एक-एक करोड़ उड़ाही के लिए देना है. मॉनसून मुहाने पर है, पर अब भी बड़े नालों की उड़ाही नहीं हो पायी है.
हर में फुटपाथी दुकानों को लेकर शुरू से वेंडिंग जोन की समस्या रही है. नगर विकास व आवास विभाग के निर्देश पर नासवी ने शहर के 20 हजार दुकानदारों का सर्वे किया था. लेकिन एक हजार दुकानदारों को नगर निगम ने आइकार्ड जारी किया. इसके अलावा फिलहाल स्मार्ट सिटी के तहत बोरिंग रोड में वेंडिंग जोन का निर्माण कराया जा रहा है.
दो वर्ष में किन-किन बड़ी योजनाओं पर काम हुआ : नगर निगम में इस बार कई बड़ी योजनाओं पर काम किया जा रहा है. जिसमें कुछ पर काम की शुरुआत भी हो चुकी है. निगम ने अपने बजट में आधारभूत संरचना विकास पर जोर दिया है. कुछ योजनाओं के टेंडर जारी होने वाले है, जबकि कई का डीपीआर भी बन चुका है.
स्मार्ट सिटी में कितनी योजनाएं जमीन पर उतरीं
शहर में बीते ढाई वर्षों से स्मार्ट सिटी की योजनाएं चल रही हैं. इस दौरान कई योजनाओं के लिए 2400 करोड़ से अधिक का बजट रखा गया है. वर्तमान स्थिति में अदालतगंज तालाब निर्माण, वीरचंद पटेल पथ व वार्डों में सेवा केंद्र बनाने का काम चल रहा है.
अदालतगंज तालाब से लेकर पांच वार्डों में जी प्लस थ्री मंजिला सेवा केंद्र का निर्माण 15 अगस्त तक पूरा करना है. मंदिरी नाला व बाकरगंज नाला पर सड़क, एबीडी क्षेत्र में स्मार्ट रोड नेटवर्क व वीरचंद पटेल पथ के अलावा स्टेशन के बाहरी परिसर व बकरी बाजार में शॉपिंग मार्ग व पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया शुरुआत होने वाली है. गांधी मैदान में मेगा स्क्रीन को लेकर भी कवायद चल रही है.
शहर से अतिक्रमण हटाने को लेकर गंभीर नहीं
बीते एक वर्ष में नगर निगम ने हाइकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की. मगर इसको लेकर निगम कभी गंभीर नहीं दिखी. शायद यही वजह रही कि अतिक्रमणकारी हटाये जाने के बावजूद दोबारा काबिज होते रहे. बीते वर्ष सरकार की मल्टी एजेंसी अभियानों के साथ बोरिंग रोड, बेली रोड, अशोक राजपथ से लेकर 24 प्रमुख मार्गों पर लगातार कार्रवाई की गयी.
इस दौरान दस करोड़ से अधिक राजस्व की वसूली की गयी. शहर की सूरत बिगाड़ने वाले 500 से अधिक बड़े बैनर पोस्टरों को हटाने की कार्रवाई हुई. निगम की ओर से तीन दर्जन से अधिक लोगों पर प्राथमिकी भी गयी है. मगर बावजूद इसके अतिक्रमण की समस्या कम नहीं हुई है. बोरिंग रोड, बेली रोड, अशोक राजपथ, दीघा-कुर्जी मार्ग पर सभी जगहों पर दोबारा अतिक्रमण हुआ है.
इन पर भी काम करने की जरूरत
सड़कों पर पड़े बिल्डिंग मटेरियल पर कार्रवाई नहीं होती.
निगम ने डेढ़ सौ करोड़ की गाड़ियां खरीद ली हैं. रखरखाव से लेकर रखने की ठीक जगह नहीं है. गाड़ियां सड़कों पर लगती है.
बोरिंग रोड को छोड़ कहीं भी वेंडिंग जोन नहीं बन रहा है.
शहर में वाहन पार्किंग को लेकर भारी समस्या है, लोग सड़कों पर ही वाहन लगाते हैं.
नगर निगम ने 2019-20 में 300 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य निर्धारित किया है, मगर वसूली की स्थिति बहुत धीमी है.
पांच सौ में अभी एक सौ ही सार्वजनिक शौचालय का निर्माण हुआ है.
शहर में 2.25 लाख मकान ही होल्डिंग टैक्स की दायरे में हैं. नये दस हजार घरों को होर्डिंग टैक्स में लाने का काम सुस्त है.
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