पटना : पटना हाइकोर्ट ने पूर्व आइएएस अधिकारी और बिहार भूमि न्यायाधिकरण के पूर्व न्यायिक सदस्य केपी रामय्या को हर हाल में बुधवार गिरफ्तार कर हाइकोर्ट में पेश करने का निर्देश आइजी मुख्यालय गणेश कुमार को दिया है.
कोर्ट ने कहा कि अगर रामय्या को बुधवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश नहीं किया जाता है तो यह प्रमाणित हो जायेगा कि बिहार में कानून का राज नहीं है. मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने दो टूक कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है. हर व्यक्ति को कानून के दायरे में रहकर कोर्ट के निर्देश का पालन करना होगा, चाहे वह व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो.
इस मामले में रामय्या द्वारा अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर कोर्ट ने न सिर्फ गैर जमानती वारंट जारी किया, बल्कि उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना का मामला भी चलाने का आदेश दिया. सोमवार को मामले की सुनवाई के समय रामय्या के वकील के साथ-साथ महाधिवक्ता ललित किशोर और आइजी मुख्यालय गणेश कुमार कोर्ट में उपस्थित थे.
सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता रामय्या के वकील ने कोर्ट को बताया कि अभी वह कोर्ट में नहीं आ पाये हैं. रामय्या के वकील को सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई दोपहर बाद 2:15 बजे की जायेगी. खंडपीठ ने रामय्या के वकील को कहा कि वह 2:15 बजे हर हाल में रामय्या को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दे दें. दोपहर सवा 2:15 बजे जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट को बताया गया कि जब तक रामय्या की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का निर्देश हाइकोर्ट नहीं देगा, तब तक वह कोर्ट में उपस्थित होने में असमर्थ हैं.
इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह का आदेश कतई नहीं देगा और हर हाल में उन्हें कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा. कोर्ट ने जब उनके वकील से पूछा कि वह कहां हैं और कोर्ट में क्यों नहीं आ रहे हैं, तब उनके वकील ने बताया गया कि इस संबंध में वह कोर्ट में कोई जानकारी नहीं देंगे. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जतायी. रमैया के वकील से जब कोर्ट ने पूछा कि उनकी रामय्या से बात हुई तो उन्होंने क्या कहा. इस पर रामय्या के वकील ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
कोर्ट ने वकील से कहा कि वह अपना और अपने मुवक्किल का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराएं, ताकि इसका पता लगाया जा सके कि रामय्या और उनके वकील की आपस में बात हुई है या नहीं. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि टावर लोकेशन से अगर पता चल जायेगा कि दोनों में बात हुई है तो कोर्ट इसे गंभीर मानते हुए कुछ भी निर्देश दे सकता है.
यह है मामला
केपी रामय्या जब बिहार भूमि न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य थे, तब उन्होंने एक व्यक्ति की जमीन के मामले में एक आदेश दिया था, जिसके खिलाफ वह व्यक्ति हाइकोर्ट में चला गया. इस पर हाइकोर्ट के चक्रधारी सिंह की एकलपीठ ने केपी रमैय्या को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया. एकलपीठ के बार-बार कहने पर भी जब वह कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए, तो कोर्ट ने उन्हें अदालती आदेश की अवहेलना करने के मामले में गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर दिया है.
इसके खिलाफ रामय्या ने डबल बेंच में एलपीए दायर कर एकलपीठ के ऑब्जर्वेशन को निरस्त करने की मांग की. डबल बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में पेश होने को कहा था. लेकिन वह नहीं आये, तो डबल बेंच ने उन्हें गिरफ्तार कर बुधवार को कोर्ट में पेश करने को कहा.
