पटना : मोटापा कम करने के लिए होगी सर्जरी, डॉक्टर लेंगे ट्रेनिंग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Apr 2019 9:33 AM
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आइजीआइएमएस में लिया गया निर्णय पटना : अधिक मोटापे से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है. क्योंकि अब इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल में मोटापे की भी सर्जरी शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके लिए अस्पताल के सर्जन डॉक्टरों को मोटापे का ऑपरेशन (बेरियाट्रिक सर्जरी) करने की ट्रेनिंग दिलायी जायेगी. यह सुविधा अगले […]
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आइजीआइएमएस में लिया गया निर्णय
पटना : अधिक मोटापे से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है. क्योंकि अब इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल में मोटापे की भी सर्जरी शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके लिए अस्पताल के सर्जन डॉक्टरों को मोटापे का ऑपरेशन (बेरियाट्रिक सर्जरी) करने की ट्रेनिंग दिलायी जायेगी. यह सुविधा अगले तीन माह के अंदर शुरू कर दी जायेगी.
अस्पताल में बेरियाट्रिक सर्जरी शुरू होने से मोटापा पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन के लिए प्राइवेट या फिर दिल्ली, मुंबई आदि का रुख नहीं करना पड़ेगा. हालांकि पटना एम्स में बेरियाट्रिक सर्जरी शुरू करने की कवायद अंतिम चरण में है. यहां मशीन के साथ डॉक्टरों को ट्रेंड भी कर दिया गया है. संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि मोटापे के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इनकी जांच और इलाज के लिए संस्थान परिसर सहित समेत सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मोटापा क्लीनिक (ओबेसिटी क्लीनिक) शुरू किया जाना है. यह यूनिट मेडिसिन डिपार्टमेंट के तहत काम करेगी.
दो शौचालय पर निर्भर 25 हजार की आबादी, विकास के भरोसे पर देंगे वोट
चुनावी मुद्दा
दिन के लगभग एक बजे का समय. वार्ड 21 के कमला नेहरू व अदालतगंज का क्षेत्र. कड़ी दोपहरी में मनोरंजन के लिए टूटे हुए सामुदायिक भवन कुछ लोग ताश खेल रहे हैं. थोड़ी दूर पर पुराने व जर्जर सामुदायिक शौचालय के पास भी बच्चों व वयस्कों की भीड़ है.
प्रभात खबर की टीम जब वहां पहुंची और लोगों से सवाल किया कि चुनाव को लेकर यहां क्या चल रहा है. तो कई लोग गुस्से व परेशानी भरे लहजे में बोल पड़े, यहां शौचालय में जाने के लिए पानी नहीं है और चुनाव में वोट देने की बात पूछ रहे हैं. सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है और शहर के बीच में पड़ने वाले इस जगह का हाल देख लीजिए. अरे भाई, हमलोग हमलोग वोट तो विकास के नाम पर करे देंगे.
ये विकास का ऐसा मॉडल है, जो राजधानी के गरीबों तक ही नहीं पहुंचा. शहर के बीच में रहने वालेकमला नेहरू व अदालतगंज की लगभग 25 हजार आबादी बुनियादी जरूरतें मसलन, आवास, शौचालय, पानी, शिक्षा और सफाई जैसे अभाव का दंश झेल रही है. यहां पीने के लिए मात्र चार बोरिंग लगे हैं.
इसमें एक खराब हो चुका है. यहां सबसे बड़ी परेशानी शौचालय को लेकर है. पांच हजार की बस्ती में
मात्र दो सामुदायिक शौचालय हैं, जिनमें से कई के प्रसाधन खराब हो चुके हैं. शौचालय में पानी की
सुविधा नहीं है. क्षेत्र में गंदी नलियां, खुले में शौच, बीच सड़क पर कचरा यहां हर दिन की कहानी हैं.
शिक्षा के नाम पर मात्र एक प्राथमिक विद्यालय है. सरकार की हर घर नल-जल योजना यहां नहीं
पहुंची. गरीबों के लिए 1995 के लिए 120 आवास बने थे, जो आज जर्जर हो चुके हैं. 25 वर्ष में
आवास योजना का लाभ नहीं मिला. मगर, जब सवाल वोट का है तो यहां के लोगों ने विकास के
विश्वास का दामन नहीं छोड़ा है.
इस क्षेत्र में दस हजार के लगभग वोट है. , लेकिन विधायक हो या सांसद कोई हमारे क्षेत्र में काम नहीं करता. प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ किसी को नहीं मिला. शौचालय की कमी है. हमलोग विकास के नाम पर वोट करते हैं, लेकिन हमारे विकास पर कोई ध्यान नहीं देता.
सीता राम पासवान, स्थानीय
शौचालय की बहुत कमी है. पूरा क्षेत्र गंदगी से भरा पड़ा है. हमारी समस्या को कोई पूछने तक नहीं आता. सांसद ने तो यहां कभी दर्शन ही नहीं दिया है. सब कोई वोट देने की अपील करता है, आखिर किस विकास को देख कर वोट किया जाये.
राबो खातुन, स्थानीय
वोट खराब नहीं करूंगा. जिस तरफ का रुझान आयेगा. उधर ही वोट कर दिया जायेगा. हालांकि नरेंद्र मोदी की सरकार में अच्छा काम हुआ है. देश के बाहर भी हमलोगों का नाम हो रहा है. इसलिए एक बार फिर से इस सरकार को बनना चाहिए.
दीपक पासवान, स्थानीय
दो माह से बोरिंग बंद है. गंदगी इतनी है कि कोई भी कभी बीमार हो जाये. इस बार हमें एेसे सांसद को चुनना है, जो हमारे क्षेत्र के विकास का वादा करे. इससे पहले सांसद कभी दिखायीभी नहीं पड़े, इस बार पार्टी बदल ली. इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है.
सेट्ठी, स्थानीय
हमलोग वोट करेंगे. मगर, कोई हमारी भी खबर ले, ऐसे सांसद को वोट करना चाहिए. अभी तक क्षेत्र में कोई उम्मीदवार नहीं आया है. जो लोग आयेंगे. उस के अनुसार प्रत्याशियों का चयन कर वोट दिया जायेगा.
दीपक, स्थानीय
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