पटना : तेरसिया दियर में जाति के बाद दूसरा बड़ा मुद्दा कोनहारा से महनार तक अर्धनिर्मित बांध
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Apr 2019 6:57 AM
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अनुज शर्मा पटना : जे बंधन हो गेलइ ओकरा त निभावे ले हइ. नीतीश के राज में जनानी जंगल में नौकरी करलइ आ मरद घर के काम आ बच्चा खेलावलइ. गरीब- गुरबा के रोजगार न मललइ आ बालुओ बंद कर देलथिन. हाजीपुर संसदीय क्षेत्र के तेरसिया दियारा की चाय की दुकान पर लोगोें की पीड़ा […]
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अनुज शर्मा
पटना : जे बंधन हो गेलइ ओकरा त निभावे ले हइ. नीतीश के राज में जनानी जंगल में नौकरी करलइ आ मरद घर के काम आ बच्चा खेलावलइ. गरीब- गुरबा के रोजगार न मललइ आ बालुओ बंद कर देलथिन. हाजीपुर संसदीय क्षेत्र के तेरसिया दियारा की चाय की दुकान पर लोगोें की पीड़ा कुछ चुनावी सरगर्मी को बयां कर रही है.
कद्दावर दलित नेता रामविलास पासवान की यह कर्मभूमि रही है. इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. उनकी जगह उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस हाजीपुर सुरक्षित सीट से उम्मीदवार होंगे.
उनके मुकाबले महागठबंधन ने राजद के पूर्व मत्री शिवचंद्र राम को उम्मीदवार बनाया है. हाजीपुर से रिकार्ड मतों से जीतने वाले पासवान के सामने अपनी परंपरागत सीट बचाने की चुनौती है. छह मई को यहां वोट पड़ेंगे. वोटरों के बीच अभी तक किसी भी दल के प्रत्याशी-कार्यकर्ता नहीं पहुंचे हैं. मुखिया-वार्ड सदस्य ही थोड़ा बहुत माहौल बना चुके हैं.
उम्मीदवार का नाम मालूम नहीं, पर वोट तय, वोटर कहते हैं कि अपने-पराये किसी नेता से आस नहीं
नागा मठ के बाहर बैठे किसान जोगेंद्र यादव को महागठबंधन के उम्मीदवार का नाम भी मालूम नहीं है, पर वो कहते हैं, लालू ही जीतेंगे. वे रामविलास पासवान को भागता हुआ नेता कहते हैं. गंगा पुल के पास संजय, धर्मेंद्र, संतोष संजीव राय आदि पेड़ की छांव में टेंपो का इंतजार करते मिले. यह दो टूक कहते हैं, अपने-पराये किसी नेता से आस नहीं है. वोट अपनी जाति के नेता को करेंगे.
कटाव से परेशान हैं केले की खेती करने वाले किसान
गाय घाट की ओर से पीपा पुल से गंगा पार कर दियारा में जैसे ही कदम रखते हैं, चिलचिलाती धूप में भी लालटेन की पूरी छाप दिख जाती है. हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाला यह इलाका राघोपुर विधान सभा क्षेत्र का दियारा है. राघोपुर से पहले राबड़ी देवी विधायक होती रही हैं. अभी तेजस्वी यादव यहां के विधायक हैं. तेरसिया दियर पंचायत में जाति के बाद दूसरा बड़ा मुद्दा कोनहारा से महनार तक अधबना बांध है.
नागा मठ से आगे बढ़कर तेरसिया गांव में घुसे ताे पीपल के नीचे मंदिर की बाउंड्री और खोखे में चलने वाली दुकान से सटी चाली पर किसान राजकुमार राय खैनी बनाते मिले. इनका कहना था कि यह बांध गंगा का कटाव रोक देता, लेकिन करीब ढाई किमी बनने के बाद सरकार ने काम रोक दिया. कटाव से केले का तीन चौथाई उत्पादन गिरा है.
जाति के साथ वोट करेगा मूव
पटना-हाजीपुर रोड पर कोई एक किमी गेहूं की पकी फसल के बीच खड़े आलीशान घर के बाहर पूर्व जिला पार्षद अर्जुन राय कहते हैं, वोट विकास नहीं अपनी अपनी जाति के नेताओं के साथ मूव करेगा.
रामविलास पासवान का उम्मीदवार न होना राजद की लड़ाई को आसान बना रहा है. दियारा से पटना लौटते वक्त यादवों के एक गांव में सड़क किनारे बैठी संगीता देवी, जया देवी चाहती हैं कि सरकार योजनाओं में मुखिया- वार्ड सदस्य की भूमिका हटा दे.
पासवान का नहीं होना साल रहा
रामानुज राय का कहना था कि एयर स्ट्राइक का प्रभाव नहीं हैै. सुनने में आ रहा है कि पारस भी जा रहे हैं, चिराग आ रहे हैं. दियारा के कई गांवों को जोड़ने वाले एक मोड़ पर बैठे आमोद कुमार का कहना है कि इस चुनाव में रामविलास पासवान की गैर मौजूदगी वोटरों के मन पर असर डाल रही है. विक्की का कहना है कि क्षेत्र भले ही यह आरजेडी का है, लेकिन निर्णय माहौल तय करेगा.
सब अपनी-अपनी जाति का नेता देख रहे
हाजीपुर रोड पर सब्जी बेचने वाले तेरसिया के राकेश यह कहकर पुष्टि करते हैं कि जब सब अपनी-अपनी जाति के नेता को देख रहे हैं, तो हम क्याें नहीं देंखें. महादलितों में कहीं- कहीं इस बात पर नाराजगी दिखी कि पासवान ने सवर्णों को आरक्षण का विरोध क्यों नहीं किया. महागठबंधन हाजीपुर के महादलितों के इस दर्द में अपनी जीत की दवा देख रहा है.
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