पटना : पीजी में स्टेट कोटे के संबंध में जवाब दे सरकार : हाइकोर्ट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Apr 2019 6:36 AM
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पटना : मेडिकल के पीजी कोर्स में दाखिले में 50% स्टेट कोटे का लाभ राज्य के मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस पास डॉक्टरों को देने के मामले में पटना हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से 22 अप्रैल तक जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की एकलपीठ ने गुरुवार को ऐश्वर्या सिंह व अन्य की रिट […]
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पटना : मेडिकल के पीजी कोर्स में दाखिले में 50% स्टेट कोटे का लाभ राज्य के मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस पास डॉक्टरों को देने के मामले में पटना हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से 22 अप्रैल तक जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की एकलपीठ ने गुरुवार को ऐश्वर्या सिंह व अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को भी यह निर्देश दिया कि सत्र 2019-20 के लिए राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों का आवंटन इस मामले में कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा. याचिकाकर्ताओं ने स्टेट कोटे का लाभ सिर्फ राज्य सरकार के मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को ही देने की मांग की है.
मेडिकल कॉलेजों की परिभाषा में स्पष्टता नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मृग्यांक मौली ने कोर्ट को बताया कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स में 50% स्टेट कोटे का लाभ पटना एम्स के यूजी डॉक्टरों को मिल जाता है, क्योंकि वह बिहार में स्थित है.
जबकि एम्स केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इकाई है. उसका संचालन केंद्र सरकार से होता है. सिर्फ राज्य में स्थित होने से किसी केंद्रीय मेडिकल कॉलेज के यूजी छात्रों को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पीजी में दाखिले के लिए स्टेट कोटे का लाभ नहीं दिया जा सकता है.
बिहार सरकार राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज की परिभाषा में स्पष्टता नहीं ला रही है. राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज से तात्पर्य राजकीय मेडिकल कॉलेज का ही होता है. सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में ही शुरुआती कार्य करने का बांड राज्य सरकार उन मेडिकल कॉलेजों के पीजी छात्रों से भरवाती है, जहां वे पढ़ते हैं.
पिछले वर्ष भी दिया गया था निर्देश
कोर्ट को बताया गया कि पिछले वर्ष भी पटना हाइकोर्ट ने पीजी में दाखिला के सबंध में स्टेट कोटे का लाभ देने के लिए राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज की परिभाषा को स्पष्ट करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था, जिसे राज्य सरकार ने अब तक पूरा नहीं किया.
वहीं, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सूर्यदेव यादव ने कोर्ट को बताया कि परिभाषा को स्पष्ट करने के आलोक में स्वास्थ्य विभाग जल्द ही अपना जवाब दायर करेगा. कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को इसके लिए 10 दिनों का समय देते हुए सुनवाई की तिथि 22 अप्रैल निर्धारित की है.
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