फुलवारीशरीफ : आधुनिक मेडिकल तकनीक से लाइलाज नहीं रही मिर्गी
Updated at : 10 Mar 2019 8:07 AM (IST)
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फुलवारीशरीफ : नयी दवाइयों, आधुनिक मेडिकल तकनीकों की उपलब्धता और मिर्गी के प्रति बढ़ती जागरूकता रोगियों को सामान्य जिंदगी बिताने में काफी मदद कर रही है. साथ ही कई तरह की भ्रांतियां भी टूट रही हैं. यह बात पटना एम्स के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह शनिवार को एम्स के शिशु रोग विभाग की ओर […]
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फुलवारीशरीफ : नयी दवाइयों, आधुनिक मेडिकल तकनीकों की उपलब्धता और मिर्गी के प्रति बढ़ती जागरूकता रोगियों को सामान्य जिंदगी बिताने में काफी मदद कर रही है. साथ ही कई तरह की भ्रांतियां भी टूट रही हैं.
यह बात पटना एम्स के निदेशक डॉ प्रभात कुमार सिंह शनिवार को एम्स के शिशु रोग विभाग की ओर से ‘बच्चों में मिर्गी’ पर आधरित सेमिनार का उद्घाटन करते हुए कही. डॉ पीके सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान लोगों में मिर्गी को लेकर काफी जागरूकता आयी है. मिर्गी लाइलाज बीमारी नहीं है. इसका उपचार थोड़ा लंबा है, लेकिन इस पर काबू पाया जा सकता है. समय पर मरीज को इलाज मिल जाए तो 2 से 3 साल दवा खाने से बीमारी ठीक हो जाती है.
मौके पर आइजीआइएसएस के पूर्व निदेशक सह न्यूरो विशेषज्ञ डाॅ अजय कुमार सिंह ने कहा कि दवाइयों के नये- नये अविष्कार से अब मिर्गी के मरीज को रोग के अनुसार दवा जी जाती है. मौके पर एम्स शिशु विभाग के अध्यक्ष डाॅ लोकेश तिवारी, एम्स के न्यूरो विभाग के हेड डाॅ गुंजन कुमार, डाॅ भावेश कांत, डीन डाॅ पीपी गुप्ता , डाॅ रविकीर्ति, डाॅ बिंदे आदि मौजूद थे.
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