पटना : गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने भारत सरकार को भेजा प्रस्ताव, 234 करोड़ रुपये में सभ्यता द्वार तक आयेगी गंगा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Feb 2019 6:12 AM (IST)
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पटना : सभ्यता द्वार तक गंगा को लाने में 234 करोड़ खर्च होंगे. निर्माण एजेंसी तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इस संदर्भ में डीपीआर गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग को भेजी जा रही है. प्रोजेक्ट की खास बात यह होगी कि चैनल बनाने के लिए की जाने वाली खुदाई में 32 घन […]
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पटना : सभ्यता द्वार तक गंगा को लाने में 234 करोड़ खर्च होंगे. निर्माण एजेंसी तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इस संदर्भ में डीपीआर गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग को भेजी जा रही है. प्रोजेक्ट की खास बात यह होगी कि चैनल बनाने के लिए की जाने वाली खुदाई में 32 घन मीटर गाद व मिट्टी का पहाड़ खड़ा होगा. इसको बेचने से विभाग करोड़ों कमा सकता है.
डीपीआर में निर्माण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी. गंगा नदी से सभ्यता द्वार को जोड़ने वाला चैनल करीब 60 डिग्री दक्षिण की तरफ झुका होगा. जानकारी के मुताबिक जल संसाधन विभाग की तरफ से बनायी गयी इस डीपीआर में सभ्यता द्वार तक गंगा लाने के लिए करीब छह किलोमीटर लंबा और 180 मीटर चौड़ा चैनल बनाया जायेगा. यह चैनल कुर्जी घाट के उत्तर से काली घाट तक बनाया जायेगा.
डीपीआर में रखरखाव खर्च भी जोड़ा गया है
सभ्यता द्वार तक गंगा को लाने में नदी के स्वाभाविक कटाव स्थल चुने गये हैं. प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों के मुताबिक बेशक गंगा का बहाव दक्षिण की तरफ तेजी से हो रहा है. लेकिन, दो से तीन स्पॉट ऐसे हैं, जिनसे गंगा का कटाव दक्षिण की तरफ देखा गया है. नदी के इस कटाव पर डीपीआर आधारित है.
विशेषज्ञों ने बताया कि काम को एक साथ चालू करके पूरा करना होगा. अन्यथा काम चालू करके छोड़ने पर गाद फिर जमा हो सकती है. इसके अलावा महावीर घाट व कंगन घाट पर जमा हाे रही गाद को भी साफ किया जाना है. इस पर करीब पंद्रह करोड़ खर्च किये जायेंगे. फिलहाल कुल 32 मिलियन घन मीटर गाद हटायी जायेगी. डीपीआर में रखरखाव खर्च भी जोड़ा गया है. इसे बेचने के अलावा बिहार रोड कंस्ट्रक्शन विभाग को भी दिया जा सकता है.
ऐसे होगा खर्च
प्रोजेक्ट की लागत 234 करोड़
पांच साल का रखरखाव 65 करोड़
गाद हटाने की लागत 15 करोड़
सभ्यता द्वार तक गंगा बहाने के लिए डीपीआर बन चुकी है. निर्माण एजेंसी तय की जा रही है. इस प्रोजेक्ट के निर्माण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी भी निर्माण एजेंसी को दी जायेगी. डीपीआर को अंतिम मंजूरी के लिए फ्लड कंट्राेल व एक उच्चाधिकारी कमेटी के समक्ष रखा जाना है.
राजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, पटना अनुभाग, जल संसाधन विभाग
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