पटना में तैयार की जा रही सरकारी, निजी कंपनियों की फेक वेबसाइट, स्कीम में उलझा कर काट रहे जेब
Updated at : 07 Feb 2019 9:02 AM (IST)
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विजय सिंह फेक वेबसाइट के आकर्षक स्लोगन डाल लोगों को लेते रहे हैं अपने झांसे में पटना : साइबर क्रिमिनलों का गैंग राजधानी में ही फेक वेबसाइटें तैयार कर रहा है. ये वेबसाइटें सरकारी नियुक्ति, टेंडर, सरकारी स्कीम से, मार्केटिंग व नेटवर्किंग कंपनियों के नाम पर तैयार की जा रही हैं. इसके बाद वेबसाइटों पर […]
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विजय सिंह
फेक वेबसाइट के आकर्षक स्लोगन डाल लोगों को लेते रहे हैं अपने झांसे में
पटना : साइबर क्रिमिनलों का गैंग राजधानी में ही फेक वेबसाइटें तैयार कर रहा है. ये वेबसाइटें सरकारी नियुक्ति, टेंडर, सरकारी स्कीम से, मार्केटिंग व नेटवर्किंग कंपनियों के नाम पर तैयार की जा रही हैं. इसके बाद वेबसाइटों पर कुछ आकर्षक विज्ञापन का स्लोगन डाला जाता है.
इसे वाट्सएप पर शेयर करके दिये हुए लिंक पर जाकर पर्सनल जानकारी शेयर करने की बात कही जाती है. जो लोग इस झांसे में आते हैं, वे राज्य के तीन जिलों नालंदा, शेखपुरा और नवादा के खास गांवों में बैठे साइबर क्रिमिनलों के नेटवर्क में आ जाते हैं. सरकारी योजना का लाभ, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, मार्केटिंग कंपनी के ऑफर से संबंधित स्लोगन के साथ डिटेल ले लिया जाता है. फिर शुरू हो जाता है ठगी का खेल. इतनी बड़ी संख्या में फेक वेबसाइटें बनायी गयी हैं कि कहीं-न-कहीं लोग फंस जा रहे हैं.
इन दिनों साइबर क्रिमिनलों के लिए नेटवर्किंग कंपनी का टावर दिलाने वाला ऑफर सबसे ज्यादा हिट हो रहा है और लोग सीधे तौर पर ठगे जा रहे हैं. ये लोग प्रतिदिन एक नयी वेबसाइट के जरिये ठगी कर रहे हैं.
निजी कंपनियां भी बेच रहीं आम लोगों का पर्सनल डाटा
निजी मार्केटिंग कंपनियां हर उस व्यक्ति का डाटा अपने कर्मचारियों के माध्यम से कलेक्ट कर लेती है जो ऑनलाइन मार्केटिंग या आॅनलाइल पेमेंट करते हैं. इसके बाद यह डाटा वे साइबर क्रिमिनलाें को बेच देती हैं.
फिर साइबर क्रिमिनल फोन, एसएमएस, इ-मेल के जरिये संपर्क करते हैं और लकी ड्रा, सामान के ऑफर का झांसा देकर बैंक एकाउंट में पैसा डालने के लिए बोलते हैं. डिटेल होने के कारण गैंग के लोग सीधे फोन करते हैं और फोन रिसीव होते ही नाम लेकर बात करते हैं. इससे ऐसा लगता है कि फोन करने वाला अगर नाम जान रहा है तो सही व्यक्ति होगा, लेकिन यहीं गलती हो जाती है और लोग पर्सनल जानकारी शेयर करते हैं और ठगे जाते हैं.
ऐसे स्लोगन पर आगे बढ़ेंगे तो कट जायेगी जेब
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प्रभात अलर्ट
नौकरी, स्कीम से जुड़ी कोई भी सरकारी वेबसाइट में gov.com जरूर लिखा होता है. लेकिन इनसे मिलती-जुलती डुप्लीकेट वेबसाइट जो साइबर क्रिमिनल तैयार करते हैं, उसमें भी कन्फ्यूज करने के लिए gov तो रहता है. लेकिन उसमें डॉट की जगह दो से तीन डैस डालकर वेबसाइट बनी होती है.
वाट्सएप पर विज्ञापन के स्लोगन के साथ फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता है. इस लिंक को ओपन करने से पहले गूगल पर सर्च करें, सत्यता की जांच करें. गूगल पर सारी जानकारियां उपलब्ध रहती हैं, उस पर तत्काल पता चल जायेगा कि फेक वेबाइसाइट है. इसलिए बिना जांच-परख किये अपनी गोपनीय जानकारी को किसी भी वेबसाइट पर शेयर नहीं करें.
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