पटना : अनुसंधान के लिए एक्रिडेशन काउंसिल देगा अनुमति
Updated at : 05 Feb 2019 8:39 AM (IST)
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आरएमआरइ को इसके लिए मिली मान्यता पटना सिटी : अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान परिसर में मरीजों पर बीमारियों के अनुसंधान करने से पहले अब नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड से अनुमति लेनी होगी. इसके लिए अनुसंधान आधारित प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना कर एथिकल कमेटी को सौंपनी होगी. इसके बाद वह रिपोर्ट का अध्ययन कर […]
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आरएमआरइ को इसके लिए मिली मान्यता
पटना सिटी : अगमकुआं स्थित राजेंद्र स्मारक चिकित्सा विज्ञान अनुसंधान संस्थान परिसर में मरीजों पर बीमारियों के अनुसंधान करने से पहले अब नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड से अनुमति लेनी होगी. इसके लिए अनुसंधान आधारित प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना कर एथिकल कमेटी को सौंपनी होगी. इसके बाद वह रिपोर्ट का अध्ययन कर अनुमति देगी, तभी अनुसंधान कर पायेंगे. बिहार में नेशनल एक्रिडेशन काउंसिल की अनुमति का दायित्व आरएमआरआइ को मिला है.
संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने बताया कि यह बिहार का इकलौता संस्थान है, जिसे यह अनुमति मिली है.वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद को भी यह अनुमति मिली है. निदेशक की मानें तो पहले रिसर्च के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जेनरल ऑफ इंडिया से अनुमति लेनी पड़ती थी. अब अनुसंधान के लिए नेशनल एक्रिडेशन काउंसिल अनुमति देगा. निदेशक ने बताया कि बीमारी पर अनुसंधान करना है, तो मरीज को चिह्नित करने के बाद उस पर दवाओं व वैक्सीन की जांच नुकसानदायक तो नहीं है, इसका अनुसंधान होगा. इसके बाद काउंसिल इजाजत देगा, तब प्रोजेक्ट पर कार्य होगा.
अनुसंधान को करेगा समझौता
सोमवार को नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड की बैठक संस्थान में हुई. इसमें कार्यशाला भी हुई. बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप दास ने एथिक्ल कमेटी के चेयरमैन डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा को एनएबीएच से मिला प्रमाणपत्र सौंपा.
आयोजन में डॉ गीत अग्रवाल ने इ फाइलिंग रिकाॅर्ड का प्रशिक्षण भी इससे जुड़े वैज्ञानिकों व सदस्यों को दिया. आयोजन में सदस्यों की ओर से सचिव डॉ कृष्णा पांडे, डॉ एमएल वर्मा, डॉ प्रवीण कुमार, डॉ दीपेंद्र भूषण, डॉ सचिन चौधरी, अविनाश कुमार व मनोरंजन शामिल थे. संस्थान के वैज्ञानिकों में डॉ वीएनआर दास, डॉ सीएस लाल, डॉ एस विमल, डॉ वी अली, डॉ डीएस दिनेश, डॉ आरके टोप्पनो, डॉ एस नारायण, राखी कुमारी, सुभाष व कुमार अभिषेक को प्रशिक्षण दिया गया.
निदेशक डॉ प्रदीप दास ने बताया कि नेशनल एक्रिडेशन बोर्ड की एथिक्ल कमेटी की ओर सेअनुंसधान में क्लिनिकल ट्रॉयल के लिए अनुंसधान के लिए अनुमति लेनी होगी. बोर्ड का प्रमाणपत्र मिलने के उपरांत महावीर कैंसर संस्थान व सासाराम स्थित मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल से अनुसंधान के लिए समझौते की प्रक्रिया चल रही है. अनुमति व अनुसंधान से जुड़े सारे रिकाॅर्ड का डिटिलाइजेशन होगा.
रिकाॅर्ड संग्रह कर रखे जायेंगे.
निदेशक ने बताया कि मरीजों को यह फायदा होगा कि जीवनशैली में दवाओं व बीमारी पर जो अनुसंधान हो रहा है, उसका साइड इफेक्ट तो नहीं है. साथ ही दवाओं का इस्तेमाल कितना कारगर हो रहा है.
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