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मिशन 2019 : सीवान में शहाबुद्दीन अब भी फैक्टर, एनडीए व महागठबंधन में उम्मीदवार व पार्टी अभी तय नहीं

Updated at : 16 Jan 2019 6:39 AM (IST)
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मिशन 2019 : सीवान में शहाबुद्दीन अब भी फैक्टर, एनडीए व महागठबंधन में उम्मीदवार व पार्टी अभी तय नहीं

ओम प्रकाश यादव को उम्मीद है कि भाजपा उनके नाम पर ही चुनाव में जायेगी पटना : सारण प्रमंडल का सीवान लोकसभा सीट देश-दुनिया में चर्चित रहा है़ इस बार का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. पहले दौर में सीटों के बंटवारे का मामला सुलझ नहीं पाया है. सीट बंट गया तो उम्मीदवार के नाम […]

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ओम प्रकाश यादव को उम्मीद है कि भाजपा उनके नाम पर ही चुनाव में जायेगी
पटना : सारण प्रमंडल का सीवान लोकसभा सीट देश-दुनिया में चर्चित रहा है़ इस बार का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. पहले दौर में सीटों के बंटवारे का मामला सुलझ नहीं पाया है. सीट बंट गया तो उम्मीदवार के नाम पर जिच बनी रहेगी.
मौजूदा सांसद भाजपा के ओमप्रकाश यादव को यहां शहाबुद्दीन फैक्टर का लाभ मिलता रहा है. उनके पक्ष में शहाबुद्दीन के सारे विरोधी एकजुट हो कर मतदान करते हैं. इस बार यह तय नहीं हो पाया है कि एनडीए के भीतर सीवान की सीट भाजपा के ही खाते में जायेगी. हालांकि, परिस्थितियां भाजपा के पक्ष में ही दिख रही हैं.
सीवान भाजपा को मिला तो बगल की सीट महाराजगंज जदयू के खाते में जायेगी. सीवान से जहां ओम प्रकाश यादव को उम्मीद है कि पार्टी उनके नाम पर ही चुनाव में जायेगी, वहीं, कयास इस बात के भी लगाये जा रहे कि वाल्मीकि नगर की सीट जदयू को दिये जाने से इसकी भरपायी के लिए यहां किसी ब्राह्मण उम्मीदवार भी उतारे जा सकते हैं. वाल्मीकि नगर से भाजपा के सतीश चंद्र दुबे सांसद हैं. चर्चा है कि वाल्मीकि नगर की सीट एनडीए के भीतर जदयू को दी जायेगी. महागठबंधन में भी तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. यहां राजद बड़ी हैसियत में रही है.
शहाबुद्दीन और अवध बिहारी चौधरी के खेमे में बंटे राजद को चुनावी नुकसान उठाना पड़ता है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जिले के इन दोनों प्रमुख नेताओं के समर्थकों के बीच सुलह का संदेश दिया है़ ऐसी स्थिति में लोकसभा चुनाव में अवध बिहारी चौधरी भी एक फैक्टर बनते दिख रहे हैं. हालांकि, अब तक पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब का नाम अनौपचारिक तौर पर तय माना जा रहा है.
1996 से लगातार चार बार सांसद बने थे शहाबुद्दीन
1977 के चुनाव में जहां मृत्युंजय प्रसाद वर्मा यहां से सांसद निर्वाचित हुए थे. वहीं, बाद के दिनों में राजद के बाहुबली नेता मो शहाबुद्दीन 1996 से लगातार चार बार सांसद बने. 2009 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ओम प्रकाश यादव शहाबुद्दीन के प्रभाव को चुनौती देते हुए चुनाव जीत गये.
2014 के चुनाव में भी ओम प्रकाश यादव भाजपा के उम्मीदवार बने और दोबारा सांसद निर्वाचित हुए. दोनों ही चुनावों में शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब राजद से उम्मीदवार थीं. 2014 के चुनाव में ओम प्रकाश यादव को 372611, हेना शहाब को 259049 वोट मिले थे. वहीं भाकपा माले के अमरनाथ यादव को 80850 वोट मिले.
भाकपा-माले की भी प्राथमिकता में रही है यह सीट
सीवान लोकसभा की सीट भाकपा-माले की भी प्राथमिकता सूची में रही है. इलाके के लोग कहते हैं कि भाकपा-माले के खिलाफ सवर्ण और बड़े लोग भी शहाबुद्दीन को वोट करते थे. अब तक सीवान लोकसभा सीट पर भाकपा-माले का कभी कब्जा नहीं हुआ.
ये विस क्षेत्र इससीट में
1. सीवान
2. जीरादेई
3. दरौली
4. रघुनाथपुर
5. दरौंदा
6. बरहड़िया
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