ePaper

पटना : गंगा में डॉल्फिन के आसरे उजाड़ रही ड्रेजिंग

Updated at : 29 Dec 2018 2:45 AM (IST)
विज्ञापन
पटना :  गंगा में डॉल्फिन के आसरे उजाड़ रही ड्रेजिंग

पटना : गंगा नदी में हेवी क्रूज और बोट्स चलाने के लिए की जा रही ड्रेजिंग (भारी मशीनों के जरिये रेत हटाने की कवायद और नदी तल को गहरा करने की प्रक्रिया) अब गांगेय डॉल्फिन के आश्रय स्थलों को उजाड़ रही है. यही नहीं ड्रेजिंग के जरिये हटायी जा रही रेत उन स्थानों पर डंप […]

विज्ञापन
पटना : गंगा नदी में हेवी क्रूज और बोट्स चलाने के लिए की जा रही ड्रेजिंग (भारी मशीनों के जरिये रेत हटाने की कवायद और नदी तल को गहरा करने की प्रक्रिया) अब गांगेय डॉल्फिन के आश्रय स्थलों को उजाड़ रही है.
यही नहीं ड्रेजिंग के जरिये हटायी जा रही रेत उन स्थानों पर डंप की जा रही है, जहां डॉल्फिन की खाद्य सामग्री उपलब्ध होती है. यह जानकारी डॉल्फिन की गिनती के लिए हुए सर्वे में उजागर हुई है. सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि पटना से मोकामा के बीच ड्रेजिंग की चपेट में सबसे ज्यादा डॉल्फिन के आश्रय स्थल आये हैं.
ड्रेजिंग से प्रभावित होने वाले स्पॉट एक दर्जन से अधिक हैं. इधर भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण पटना परिक्षेत्र के क्षेत्रीय चीफ इंजीनियर वीके कुरील ने बताया कि उनका प्राधिकरण केंद्र के पर्यावरण नियमों का पालन कर रहा है. गंगा में पटना से मोकामा तक ऐसा इलाका है, जहां करीब 150 डॉल्फिन हैं.
यहां डॉल्फिन का घनत्व दूसरी जगहों की तुलना में सबसे ज्यादा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो ये डाॅल्फिन विस्थापित हो सकती हैं. फिलहाल सर्वेक्षण के निष्कर्षों से यह बात साफ हो जाती है कि पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता जायज है, जिसमें कहा गया था कि नदी में हेवी क्रूज चलाने के लिए की जाने वाली ड्रेजिंग जलीय जीवों एवं नदियों के पर्यावरण के लिए घातक साबित होगी.
क्रूज संचालन को चाहिये तीन मीटर जल स्तर
जानकारी के मुताबिक 1500 मीट्रिक टन वजन लेकर चलने वाले क्रूज संचालन के लिए नदी में कम-से-कम तीन मीटर जल स्तर होना चाहिए. जबकि बरसात के कुछ महीने छोड़ दें, तो दिसंबर से ही गंगा नदी का औसत जल स्तर दो मीटर रह जाता है. खासतौर पर पटना से बलिया, बक्सर, गाजीपुर, बनारस और इलाहाबाद का जल स्तर दो मीटर के आसपास ही रहता है. ऐसे परिदृश्य में जहाजों को चलाने में जल स्तर मेंटेन करने के लिए ड्रेजिंग करनी पड़ती है.
इसी कवायद के दौरान न केवल डॉल्फिन बल्कि दूसरे जलीय जीवों के आश्रय स्थल प्रभावित हो रहे हैं. क्योंकि वे ज्यादा गहरे पानी में नहीं रहतीं. उनके लिए खाद्य पदार्थ कम गहराई वाले इलाके में बहुतायत में ही मिलते हैं. जलीय जीव विज्ञानी डॉ गोपाल शर्मा ने बताया कि ड्रेजिंग के कारण डॉल्फिन के सबसे ज्यादा रहवास पटना से मोकामा के बीच प्रभावित हुए हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन