आइजीआइएमएस : रीढ़ की हड्डी में सिस्ट, बिहार में पहली बार सर्जरी से निकालाकी , बिहार में पहली बार सर्जरी से निकाला गया हड्डी में सिस्ट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Dec 2018 8:50 AM

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मरीज के दोनों पैरों में थी कमजोरी, चलने-फिरने में था असमर्थ पटना : आईजीआईएमएस के न्यूरो सर्जरी विभाग ने रीढ़ की हड्डी में छिपी हाइडेटिड सिस्ट का बिहार में पहला सफल ऑपरेशन किया है. करीब पांच घंटे चली सर्जरी में डॉक्टरों ने पूरे रीढ़ की हड्डी को खोल दिया और 250 सिस्ट को बाहर निकाला. […]

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मरीज के दोनों पैरों में थी कमजोरी, चलने-फिरने में था असमर्थ
पटना : आईजीआईएमएस के न्यूरो सर्जरी विभाग ने रीढ़ की हड्डी में छिपी हाइडेटिड सिस्ट का बिहार में पहला सफल ऑपरेशन किया है. करीब पांच घंटे चली सर्जरी में डॉक्टरों ने पूरे रीढ़ की हड्डी को खोल दिया और 250 सिस्ट को बाहर निकाला. यह सर्जरी अररिया जिले के रहने वाले 32 वर्षीय मो रब्बानी का किया गया. ऑपरेशन के बाद रब्बानी को प्राइवेट वार्ड में भर्ती किया गया है. आइजीआइएमएस के डॉक्टरों का दावा है कि बिहार में पहली बार रीढ़ की हड्डी में सिस्ट का ऑपरेशन किया गया है.
जांच में निकला ट्यूमर
आइजीआइएमएस न्यूरो विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ प्रदीप कुमार ने बताया कि मो रब्बानी के दोनों पैरों में कमजोरी थी व चलने में असमर्थ था. आनन-फानन में परिजन आइजीआइएमएस लेकर आये. जब जांच की गयी तो पता चला कि मरीज के रीढ़ में मल्टीसिस्टीक ट्यूमर है. मरीज हाइडेटिड सिस्ट से पीड़ित है. मरीज में थोड़ी बहुत लकवा के भी लक्षण आ गये थे. उसे तुरंत सर्जरी की सलाह दी गयी. न्यूरो व एनेस्थेसिया विभाग के डॉक्टरों की टीम तैयार की गयी.
क्या है हाइडेटिड सिस्ट
आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि हाइडेटिड सिस्ट महज एक प्रतिशत मरीज पाया जाता है. रीढ़ में तो न के बराबर ही सिस्ट पाया जाता है. डॉ मनीष ने बताया कि मेडिकल की भाषा में इकाइनोकोकस ग्रैनुलोसस के नाम से जाना जाता है. यह एक विशेष क्रीमी का अंडा होता है, जिस के ऊपर कवच चढ़ा होता है. यह अंडा शरीर के जिस भी अंग में पहुंच जाता है, वहां धीरे-धीरे आकार में बड़ा होना शुरू हो जाता है.
इन डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन
न्यूरो सर्जन डॉ प्रदीप कुमार, डॉ ब्रजेश कुमार, डॉ केएम झा,
डॉ ुकेश कुमार, डॉ रविकांत व ओटी के स्टाफ गौतम को शामिल किया गया था.
यहां जानलेवा होता है सिस्ट
सिस्ट सबसे अधिक लीवर या फिर फेफड़ा में प्रवेश करता है. इसके अलावा मस्तिष्क, दिल, हाथ व पैर की मांसपेशियां और कभी-कभी रीढ़ की हड्डियों के अंदर भी पाई जाती है. लिवर और फेफड़े के अंदर पैदा हुआ सिस्ट जब ज्यादा बढ़ जाता है तो मरीज के जानलेवा हो जाता है. अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया तो मरीज को काफी परेशानी हो सकती है.
11 माह के बच्चे की पहली बार हुई दिल की सर्जरी, बची जान
पटना : दिल में छेद से अपनी जिंदगी की परेशानियों से जूझ रहे 11 माह के बच्चे की सर्जरी कर डॉक्टरों ने जान बचायी है. यह ऑपरेशन महावीर वात्सल्य अस्पताल में किया गया. दरअसल आरा जिले के रहने वाला 11 साल के आर्यन की अचानक तबीयत खराब हो गयी. हालत खराब होने के बाद परिजनों ने पटना के महावीर अस्पताल लेकर आये जहां इसीजी व इको जांच कराया गया. जांच में बच्चे के दिल में छेद पाया गया.
इसके बाद डॉक्टरों ने एंजीयोप्लास्टी किया. सफल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया इसमें जानकारी देते हुए महावीर वात्सल्य अस्पताल के निदेशक डॉ एसएस झा व डॉ मेजर प्रभात कुमार ने बताया कि बच्चे के दिल में सूराख था. करीब तीन घंटे सर्जरी के बाद बच्चे के दिल में छेद को बंद किया गया. यह सर्जरी पूरी तरह से नि:शुल्क थी. अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है.
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