थोड़ी-थोड़ी देर पर मोबाइल फोन को ऑन-ऑफ करता रहा चालक

पटना: रिटायर्ड आइएएस अधिकारी वशीमुद्दीन अंजुम की पोती ताहिरा के अपहरण की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जब चालक के मोबाइल फोन का टावर लोकेशन लेना शुरू किया, तो यह जानकारी मिली कि वह अशोक राजपथ में है. इस जानकारी के बाद पुलिस ने अपनी जिप्सी को उसके पीछे दौड़ाया, लेकिन पकड़ने में सफलता नहीं […]
पटना: रिटायर्ड आइएएस अधिकारी वशीमुद्दीन अंजुम की पोती ताहिरा के अपहरण की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जब चालक के मोबाइल फोन का टावर लोकेशन लेना शुरू किया, तो यह जानकारी मिली कि वह अशोक राजपथ में है. इस जानकारी के बाद पुलिस ने अपनी जिप्सी को उसके पीछे दौड़ाया, लेकिन पकड़ने में सफलता नहीं मिली. उसके बाद उसका मोबाइल का स्विच ऑफ हो गया था.
फिर उसका मोबाइल जब ऑन हुआ, तो उसका लोकेशन अगमकुआं का मिला. इसके तुरंत बाद फिर मोबाइल का स्विच ऑफ मिला. उसका अंतिम टावर लोकेशन अगमकुआं थाने की पहाड़ी का दिखा. पुलिस व परिजन वहां पहुंचे, लेकिन फिर से मोबाइल स्विच ऑफ हो गया. पहाड़ी के निकट सैकड़ों घर थे और एक-एक घर की तलाशी लेना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर थी. इसके बाद परिजन वहां से लौट गये, लेकिन पुलिस की टीम लगातार वहां नजर बनाये हुए थी.
इस मामले में पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई की लगातार मॉनीटरिंग एसएसपी मनु महाराज खुद कर रहे हैं. लेकिन जिस तरह से इस मामले में कुछ बातें सामने आ रही हैं, उनसे यह स्पष्ट है कि घटना को प्लान के तहत अंजाम दिया गया है. इधर घटना के संबंध में ग्रामीण एसपी सह प्रभारी सिटी एसपी बीएन झा ने बताया कि बच्ची को बरामद करने के लिए हर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है.
मंगलवार को पड़ोसी के घर पहुंचा ही नहीं
ताहिरा प्रति दिन अखौरी प्रसाद के आवास पर बंदर को रोटी खिलाने जाती थी और वहां लगभग घंटा भर वहां पर रुकती थी. इस दौरान अखौरी प्रसाद के परिवार का कोई-न-कोई सदस्य बच्ची को अवश्य देखता था और उसका हालचाल पूछता था. लेकिन, मंगलवार का घर कोई भी सदस्य बच्ची को नहीं देखा. इस बाबत अखौरी प्रसाद ने बताया कि कभी चालक व कभी उनका रिश्तेदार ताहिरा को लेकर वहां प्रतिदिन आते थे, लेकिन आज उसे किसी ने नहीं देखा है.
खाना कैसे खा रही होगी मेरी बच्ची?
ताहिरा की उम्र पौने दो साल है. इतनी कम उम्र में कोई बच्च थोड़ी देर के लिए भी अपनी मां से अलग नहीं रह सकता है. ताहिरा के दादा वशीमुद्दीन अंजुम व परिवार के अन्य सदस्यों को इस बात की चिंता सता रही है कि मासूम के साथ किसी प्रकार की अनहोनी न हो जाये. दादा कहते हैं कि इतनी गरमी में वह अपहरणकर्ताओं के पास किस स्थिति में होगी और क्या खाना मिल रहा होगा, इस बात को लेकर सभी काफी परेशान हैं.
रो-रो कर मां का बुरा हाल
ताहिरा की मां नौसिया तबस्सुम का रो-रो कर बुरा हाल है. कुछ ऐसी ही स्थिति ताहिरा की दादी का भी था. रह-रह कर दोनों घर के मेन गेट पर आ जाती हैं तथा बाहर बैठे वशीमुद्दीन अंजुम व अन्य लोगों से एक ही बात पूछती हैं कि ताहिरा के विषय में कुछ जानकारी मिली. नहीं कहने पर उदास हो घर के अंदर चली जाती हैं.
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