सूखे की घोषणा के बाद हरकत में सरकार, ऋण, लगान व सेस वसूली पर रोक

Updated at : 27 Oct 2018 2:35 AM (IST)
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सूखे की घोषणा के बाद हरकत में सरकार, ऋण, लगान व सेस वसूली पर रोक

पटना : मौसम की बेरुखी झेल रहे अन्नदाताओं को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने प्रदेश के 23 जिलों के 206 प्रखंडों को सूखा घोषित किया है. अब सरकार की प्राथमिकता यह है कि समय रहते प्रभावित जिलों में राहत का काम शुरू हो जाये. किसानों को अनुदान की राशि समय से मिल जाये. […]

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पटना : मौसम की बेरुखी झेल रहे अन्नदाताओं को राहत देने के लिए बिहार सरकार ने प्रदेश के 23 जिलों के 206 प्रखंडों को सूखा घोषित किया है. अब सरकार की प्राथमिकता यह है कि समय रहते प्रभावित जिलों में राहत का काम शुरू हो जाये. किसानों को अनुदान की राशि समय से मिल जाये. इसी को देखते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कृषि, बिजली, पीएचईडी, आपदा प्रबंधन, पशुपालन आदि विभागों से स्पष्ट कहा- डिमांड जेनरेट करके जल्दी से जल्दी विभागीय स्तर से भेजा जाये.
प्रभावित जिलों के प्रखंडों में सीधे कृषि से जुड़े मामलों में सहकारिता ऋण, राजस्व लगान एवं सेस, पटवन शुल्क, विद्युत शुल्क आदि की वसूली वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए स्थगित रहेगी. सरकार ने कृषि कार्य के लिए प्रति यूनिट बिजली की दर 96 पैसे से घटाकर 75 पैसा कर दिया है. यह दर सरकारी और निजी दोनों ट्यूबबेल के लिए होगी.
खराब ट्रांसफाॅर्मरों को बदलने की समय सीमा भी 72 घंटे से घटाकर 48 घंटे कर दी गयी है. 14 से 16 घंटे की जगह गांव में 18 से 20 घंटे बिजली दी जायेगी. उधर, सूखाग्रस्त प्रखंडों का आंकड़ा 400 से अधिक होने की भी सूचना है. इसको लेकर कृषि सहित संबंधित विभागों के स्तर से मिली जानकारी के बाद सरकार मंथन कर रही है. वहीं, कृषि विभाग में शनिवार को बैठक होगी. इसमें सूखाग्रस्त प्रखंडों की संख्या को लेकर निर्णय होगा.
विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा
शुक्रवार को मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक मुख्य सचिवालय में हुई. सूखा से निबटने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई. कृषि विभाग ने बताया कि इस साल बारिश की स्थिति काफी खराब रही. इससे फसलों के मुरझाने की खबरें आने लगीं. पटना, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, गया, जहानाबाद, नवादा, औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुंगेर, शेखपुरा, जमुई, भागलपुर, बांका, नालंदा एवं सहरसा के 206 प्रखंडों में जमीन में दरारें पड़ गयी हैं.
इन जिलों में उत्पादन में 33 फीसदी तक की कमी आने की आशंका है. मौसम विभाग व कृषि विभाग ने जानकारी दी कि एक जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में 1027.6 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए. परंतु इस दौरान 771.3 मिमी ही बारिश हुई है.
दिये गये कई निर्देश
बारिश अनियमित रही. इस हिसाब से बारिश में 25 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है. इसी तरह एक जून से 15 अक्टूबर तक औसत सामान्य बारिश 1078.1 मिमी के विरुद्ध मात्र 789.0 मिमी बारिश हुई. यह औसत से 26.8 प्रतिशत कम है. मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में नियमानुसार दी जानेवाली सहायता प्रावधानों को लागू कर दिया गया है. फसलों को बचाने, वैकल्पिक कृषि कार्य की व्यवस्था, पशु संसाधनों का रख-रखाव एवं अन्य कार्यों की व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये हैं. कृषि विभाग ने बताया कि पंजीकृत नौ लाख किसानों को एसएमएस के माध्यम से सूचना दे दी गयी है, ताकि अनुदान और मुआवजा लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाये. पीएचईडी को हैंडपंपों की मरम्मत और नये हैंडपंप लगाने के काम में जुट जाने को कहा गया है. मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा है कि डिमांड जेनरेट करके विभाग भेजें. सरकार देरी नहीं करेगी, फौरन पर्याप्त राशि दी जायेगी. फसल सहायता योजना में 8.13 लाख से अधिक आवेदन आये हैं. 31 अक्टूबर तक आवेदन होगा.
  • मुख्य सचिव ने क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की समीक्षा की, कई विभाग हुए शामिल
  • प्रदेश के 23 जिलों के 206 प्रखंडों को सरकार घोषित कर चुकी है सूखा
  • पटवन और विद्युत शुल्क भी नहीं वसूले जायेंगे
  • आंकड़ा 400 प्रखंड तक पहुंचने की आशंका
  • संबंधित विभागों को डिमांड जेनरेट करने के निर्देश
सूखाग्रस्त जिलों के नाम व प्रखंडों की संख्या: पटना के आठ, नालंदा में 11, भोजपुर के दो, बक्सर के तीन, कैमूर के एक, गया के 24, जहानाबाद के एक, नवादा के 11, औरंगाबाद के सात, सारण का 20, सीवान के 19, गोपालगंज का छह, मुजप्फरपुर के दो, वैशाली के 13, दरभंगा के 11, मधुबनी के 14, समस्तीपुर के 12, मुंगेर के एक, शेखपुरा के छह जमुई का 10, भागलपुर का सात, बांका का सात और सहरसा जिला के 10 प्रखंड को सूखा घोषित किया गया है.
सरकार की तैयारियां
फसल की सुरक्षा एवं बचाव के लिए कृषि इनपुट के रूप में डीजल, बीज आदि की सब्सिडी.
वैकल्पिक फसल योजना तैयार कर उसके सफल क्रियान्वयन के लिए कार्रवाई.
प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार टैंकरों से पानी की आपूर्ति.
जिलों में पर्याप्त खाद्यान्न का भंडारण और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी पात्रों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने.
पशु चारा की तात्कालिक कमी दूर करना.
पशु चिकित्सालयों में दवा का भंडारण.
रोजगारन्मुख कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से रोजी-रोटी का इंतजाम करना.
जिला स्तर पर 24 घंटे क्रियाशील नियंत्रण कक्ष.
ऊर्जा, कृषि, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में विशेष नियंत्रण कक्ष.
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