पटना : ऑनलाइन गेम खेलने वाले विद्यार्थी होंगे चिह्नित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Oct 2018 8:26 AM (IST)
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मोमो चैलेंज के खतरनाक रुझान को लेकर शिक्षा विभाग चिंतित एनसीपीसीआर के पत्र के हवाले से दी गयी विस्तृत जानकारी बिहार शिक्षा परियोजना ने दिया दिशा-निर्देश पटना : मोबाइल व कंप्यूटर पर ऐसे कई ऑनलाइन गेम हैं, जो काफी खतरनाक होते हैं. इस कारण ऐसे गेमों को आत्मघाती कहा जाता है. जिन बच्चों में ऐसे […]
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मोमो चैलेंज के खतरनाक रुझान को लेकर शिक्षा विभाग चिंतित
एनसीपीसीआर के पत्र के हवाले से दी गयी विस्तृत जानकारी
बिहार शिक्षा परियोजना ने दिया दिशा-निर्देश
पटना : मोबाइल व कंप्यूटर पर ऐसे कई ऑनलाइन गेम हैं, जो काफी खतरनाक होते हैं. इस कारण ऐसे गेमों को आत्मघाती कहा जाता है. जिन बच्चों में ऐसे गेम की लत पड़ जाती है, उनमें धीरे-धीरे आत्महत्या तक की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है. ऐसे खतरनाक ऑनलाइन गेमों में बच्चों में बढ़ती आदत को लेकर बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने चिंता जतायी है.
ब्लू व्हेल के बाद हाल ही में मोमो चैलेंज नामक गेम चर्चा में आया है, जो खतरनाक साबित हो रहा है. ऐसे गेमों से बचाव के लिए बच्चों व अभिभावकों में जागरूकता आदि को लेकर परियोजना की ओर से सभी जिलों को दिशा-निर्देश दिये गये हैं. परियोजना की ओर से ऐसे गेम के आकर्षण में फंसे बच्चों में पाये जानेवाले लक्षण आदि का उल्लेख करते हुए एक पत्र निर्गत किया गया है.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से प्राप्त एक पत्र का हवाला देते हुए ऐसे गेम की लत वाले बच्चों में पाये जानेवाले लक्षणों बताया गया है. साथ ही उन लक्षणों ध्यान में रखते हुए वैसे बच्चों को चिह्नित कर यथोचित कदम उठाया जाना है़ ताकि, आगे चल कर वे किसी तरह का आत्मघाती कदम न उठाएं. विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों की बैठक बुला कर जागरूक करने को कहा गया है. कहा गया है कि उन्हें बताया जाये कि विद्यालय अवधि के बाद वे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें.
सीबीएसई ने भी स्कूलों को दिया है निर्देश : दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक सर्कुलर के माध्यम से संबद्ध स्कूलों को मोमो चैलेंज नामक गेम से बचाव के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है.
कहा गया है कि स्कूल डिजिटल तकनीक व इंटरनेट प्रयोग के लिए अगस्त 2017 में जारी दिशा-निर्देश का पालन करें. बच्चे मोबाइल समेत किसी भी डिजिटल गैजेट का प्रयोग स्कूल परिसर व बस में नहीं कर सकते हैं. बोर्ड ने सर्कुलर के साथ ही इस गेम को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी उपलब्ध कराते हुए उसका पालन का निर्देश दिया है.
गेम खेलने वाले बच्चों में दिखने वाले लक्षण
– दोस्तों या परिवार के सदस्यों से दूरी बनाये रखना
– लगातार उदासीन दिखने के साथ ही मनोवैज्ञानिक रूप से हतोत्साहित रहना
– हमेशा चिंतित रहना व दैनिक कार्यों में उल्लासपूर्वक शामिल न होना
– बच्चे में बात-बात पर गुस्सा या आक्रोशित हो जाने की प्रवृत्ति
– बच्चे का वैसे कार्य को त्याग देना, जिससे पहले वह उत्साहित होता था
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