किस तरह के कितने हथियार, लाइसेंस धारकों की संख्या नहीं जानता प्रशासन

Updated at : 29 Sep 2018 3:21 AM (IST)
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किस तरह के कितने हथियार, लाइसेंस धारकों की संख्या नहीं जानता प्रशासन

पटना : सूबे में एक तरफ अपराधियों से अवैध हथियार पकड़े जा रहे हैं, हत्या जैसे जघन्य अपराध में एके-47 जैसे हथियार के प्रयोग की बात सामने आ रही है. वहीं दूसरी तरफ जिले में राइफल, बंदूक, पिस्टल से लेकर अन्य हथियारों के लाइसेंसों की संख्या की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं हैं. जिला प्रशासन […]

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पटना : सूबे में एक तरफ अपराधियों से अवैध हथियार पकड़े जा रहे हैं, हत्या जैसे जघन्य अपराध में एके-47 जैसे हथियार के प्रयोग की बात सामने आ रही है. वहीं दूसरी तरफ जिले में राइफल, बंदूक, पिस्टल से लेकर अन्य हथियारों के लाइसेंसों की संख्या की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं हैं. जिला प्रशासन की आर्म्स शाखा ने लाइसेंस धारकों का डाटा अपडेट नहीं किया है.
आज तक प्रखंडवार या नगर निकाय स्तर पर कोई डाटा तैयार नहीं किया गया है. इसके अलावा अब तक कितने लाइसेंसों को नवीनीकरण के अभाव में रद्द किया गया है. इसकी जानकारी का डाटा भी नियमित स्तर पर तैयार नहीं किया गया है.
जिले में अब तक कितने लाइसेंसों का यूनिक आईडी नंबर नहीं लिया गया है, इसका भी सटीक डाटा प्रशासन के पास नहीं है. कुल मिलाकर मामला ऐसा है कि जिला प्रशासन की आर्म्स शाखा ने आज तक अपने फाइलों को अपडेट कर डाटा तैयार करने का काम नहीं किया है. ऐसे में लाइसेंसी हथियारों के मामले में कुल कितने लोगों ने लाइसेंस लिया,किस हथियार के कितने लाइसेंस धारक हैं. किसने कितने दिनों से अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है.
नोटिस करने में होती है परेशानी, वर्ष के अंत तक तैयार होगा डाटा
प्रखंडवार लाइसेंस धारकों की संख्या की सही जानकारी नहीं होने पर कई बार प्रशासन व पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जब भी किसी क्षेत्र विशेष में परिस्थितियां उत्पन्न होती है तो इसका डाटा जुटाना मुश्किल हो जाता है कि इस क्षेत्र में कितने लाइसेंसी हथियार हैं. इसके अलावा चुनाव के आचार संहिता के समय हथियार जमा नहीं कराने वाले लोगों को नोटिस जारी करने में परेशानी होती है.
आर्म्स मजिस्ट्रेट लाल ज्योति नाथ साहदेव बताते हैं कि पहली बार प्रखंडवार व हथियारों के प्रकार के आधार पर संख्याओं का डाटा तैयार करने का काम शुरू किया गया है. आर्म्स शाखा की सैकड़ों फाइलें पड़ी हैं. संभावना है कि इस वर्ष के अंत इस तरह का डाटा तैयार कर लिया जाये.
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