जनजीवन पर मौसम मेहरबान धान की खेती को जीवनदान
Updated at : 21 Sep 2018 2:48 AM (IST)
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पटना : यूं तो बंगाल की खाड़ी में कुछ दिनों से लो-प्रेशर जोन सक्रिय हुआ था, लेकिन झारखंड और बिहार में यह पिछले 48 घंटे में ही बना. पटना में पिछले चौबीस घंटे में इसकी सक्रियता दिखाई दी और इसी लो-प्रेशर जोन के चलते गुरुवार को पटना सहित समूचे मध्य बिहार और उत्तरी बिहार में […]
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पटना : यूं तो बंगाल की खाड़ी में कुछ दिनों से लो-प्रेशर जोन सक्रिय हुआ था, लेकिन झारखंड और बिहार में यह पिछले 48 घंटे में ही बना. पटना में पिछले चौबीस घंटे में इसकी सक्रियता दिखाई दी और इसी लो-प्रेशर जोन के चलते गुरुवार को पटना सहित समूचे मध्य बिहार और उत्तरी बिहार में झमाझम बारिश हुई.
अनुमान है कि यह अगले चौबीस घंटे और सक्रिय रहेगा. हालांकि ज्यादा बारिश नहीं होगी. इस बारिश के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे धान की खेती को जीवन दान मिल गया. कृषि विभाग की ताजातरीन रिपोर्ट ये है कि अगर हथिया नक्षत्र में थोड़ी बहुत भी बारिश हो गयी तो किसान में जान आ जायेगी.
दरअसल पिछले कुछ हफ्तों में समूची सरकारी मशीनरी एवं वैज्ञानिक बिरादरी चिंतित थी, क्योंकि समुचित बारिश न होने के चलते खेतों में दरार पड़ी हुई थी. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ ए सत्तार ने बताया कि इस बारिश से धान की खेती मजबूत हो गयी. इससे पहले तक चिंताजनक हालात थे.
डॉ सत्तार के मुताबिक सितंबर के अंतिम हफ्ते में ठीक ठाक बारिश की संभावना है. उसी दौरान बिहार की धान की खेती के लिए विशेष कहे जाने वाले हथिया नक्षत्र की बारिश हो सकती है. हालांकि मौसम विज्ञानी डाॅ सत्तार ने साफ किया कि सितंबर अंतिम दिन तक मॉनसून के बिहार से चले जाने की संभावना है.
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