पटना : ऐसे तो पीजी करने में लग जायेंगे चार साल
Author Prabhat khabar digital desk
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अमित कुमार मगध विवि का सत्र पटरी से उतरा, पीजी कोर्स डेढ़ से दो साल तक चल रहे पीछे पटना : मगध विश्वविद्यालय में सत्र पटरी से उतर चुका है. क्योंकि अगर एक दो महीने देरी हो तो समझा जा सकता है लेकिन यहां तो दो साल का कोर्स करने में चार साल का समय […]
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अमित कुमार
मगध विवि का सत्र पटरी से उतरा, पीजी कोर्स डेढ़ से दो साल तक चल रहे पीछे
पटना : मगध विश्वविद्यालय में सत्र पटरी से उतर चुका है. क्योंकि अगर एक दो महीने देरी हो तो समझा जा सकता है लेकिन यहां तो दो साल का कोर्स करने में चार साल का समय लग जायेगा. पीजी सेकेंड सेमेस्टर तथा फोर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं सितंबर में हो रही हैं. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीजी का सत्र कितना देर हो चुका है.
कायदे से ये परीक्षाएं पिछले वर्ष मई तक हो जानी चाहिए थीं. यानी सत्र सवा साल देर से चल रही है. यानी कि सवा तीन साल में उसकी अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा हो रही है. वहीं रिजल्ट आते-आते कितना समय लगेगा यह समझा जा सकता है. इसी तरह से अगर सेकेंड सेमेस्टर की बात करें, तो करीब डेढ़ वर्ष से अधिक होने को है और दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा होने जा रही है.
स्नातक का भी यही हाल : यूजी (स्नातक) का हाल भी इससे कम बुरा नहीं है. स्नातक पार्ट 3 के लिए फॉर्म भरे चार महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उनके परीक्षा की तिथि ही जारी नहीं हुई है. कायदे से यह परीक्षा मई के अंतिम सप्ताह तक हो जानी चाहिए थी. इसी तरह से स्नातक पार्ट 1 एवं पार्ट 2 के फॉर्म भरने की तिथि ही अभी जारी हुई है.
10 सितंबर से 18 सितंबर के बीच यह भरा जायेगा और विलंब शुल्क के साथ 24 सितंबर तक. इसके बाद पहले थर्ड इयर तब सेकेंड और तब फर्स्ट इयर की परीक्षा होगी. ये परीक्षाएं कब और कितने दिनों में होंगी इसके बारे में कहना मुश्किल है. अब राजभवन भी इस पर लगातार चिंता जता रहा है.
पटना : पटना विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय (डीडीई) में पिछले दो सत्र से पढ़ाई बंद है. इस वजह से जो छात्र पीयू से डिस्टेंस कोर्स करने की इच्छा रखते हैं वे काफी निराश हैं. वहीं जो छात्र पहले से यहां एडमिटेड थे उनको रेगुलर मोड में कॉलेजों में ट्रांसफर कर दिया गया है.
डीडीई में मान्यता के लिए मुख्य वजह नैक की मान्यता का नहीं होना है. इसके अतिरिक्त भी कुछ अन्य समस्यायें हैं जैसे अपना कैंपस नहीं होना, पाठ्यपुस्तक अपडेट नहीं होना आदि. डीडीई जो एक समय में विवि के आय का सबसे बड़ा स्रोत था आज मरणासन्न है.
मान्यता को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में पीयू
पटना विश्वविद्यालय डीडीई की मान्यता को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है. इसके पीछे का कारण यह है कि नैक नहीं होने के बाद भी डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो के द्वारा साउथ के कुछ डिस्टेंस एजुकेशन सेंटरों को मान्यता दी हुई है. इसी को आधार बनाकर पीयू भी न्यायालय की शरण में जाने की सोच रहा है. पीयू ने बीएड में भी यही किया था और आज इस वजह से पीयू को मान्यता मिल गयी है. वहां भी एनसीटीई के द्वारा पीयू के दोनों कॉलेजों की मान्यता नहीं दी गयी थी जिसपर विवि ने लड़ाई लड़के जीत हासिल की. यहां भी विवि की स्ट्रैटजी यही होगी ऐसा विवि प्रशासन कह रही है.
एक तरफ विवि जहां डीडीई को रि-ओपेन करने की सोच रही है वहीं इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के विषय में भी सोचा जा रहा है. सैदपुर कैंपस में डीडीई के भवन का प्रस्ताव बिहार एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर डेपलपमेंट कॉरपोरेशन को भेजा जा चुका है. अगर यह स्वीकृत होता है तो जल्द ही डीडीई के पास अपना खुद का कैंपस होगा और उक्त कैंपस में तमाम तरह की सुविधाएं दी जायेंगी.
पटना विश्वविद्यालय के द्वारा डीडीई को अगर बेहतर स्थिति में लाना है तो उसके स्टडी मेटेरियल को दुरुस्त करना बहुत ही आवश्यक है.
क्योंकि नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी व इग्नू आदि इसी की बदौलत आज बेहतर स्थिति में हैं. इसके अतिरिक्त संबंधित विषयों में कॉर्डिनेटरों की बहाली जरूरी है. लाइब्रेरी को दुरुस्त करना और क्लास अधिक कराना यह सब भी जरूरी है. इस तरह से डीडीई पुन: अपनी गरिमा वापस ला सकती है.
डीडीई की मान्यता के लिए कोर्ट में करेंगे अपील
जिस तरह से बीएड के लिए हम न्यायालय गये थे अब डीडीई की मान्यता के लिए भी हम न्यायालय में अपील करेंगे. क्योंकि कुछ संस्थानों को बिना नैक की मान्यता है, जबकि पीयू की मान्यता रोक दी गयी है.
यह उचित नहीं है. पीयू में डीडीई ठीक तरीके से चल रहा था और फिलहाल के लिए जरूरी संसाधन वहां मौजूद हैं. आगे सुधार के लिए उसके भवन आदि के लिए प्रयास किया जा रहा है. मान्यता मिलने के बाद उसमें और भी सुधार किया जायेगा. विवि प्रयास कर रही है कि अगले सत्र तक डीडीई में फिर से नामांकन शुरू हो जायेगा.
—मनोज मिश्र, रजिस्ट्रार, पीयू
छात्रों को हो रही काफी परेशानी
मगध विश्वविद्यालय में सत्र में देर होने से छात्रों को काफी परेशानी हो रही है. जिन छात्रों की अब तक सभी सेमेस्टरों की परीक्षाएं पूरी हो जानी चाहिए थीं, वे अभी सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षा ही दे रहे हैं. उनका अभी सत्र समाप्त होकर मार्क्सशीट भी मिल जानी चाहिए थी. छात्रों को इस वजह से आगे जॉब आदि में काफी दिक्कत हो रही है.
जिन छात्रों को पीजी के बाद जॉब के लिए अप्लाई करना था वे अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं. इसी तरह जो छात्र पीएचडी करने की सोच रहे हैं, वे भी पढ़ाई ही कर रहे हैं. दूसरी तरफ जिन छात्रों का अभी पीजी में नामांकन हुआ है, उनकी परीक्षा दिसंबर में होनी चाहिए, लेकिन कब होगी यह कहा नहीं जा सकता.
समय हो रहा बर्बाद, कर रहे सुधार
पीजी में देरी होने से छात्रों का समय बर्बाद हो रहा है. न वे नेट-जेआरएफ भर पा रहे हैं, न ही पीएचडी के लिए अप्लाई कर पा रहे हैं. हमलोगों ने कई बार विवि में इस संबंध में बात की लेकिन कुछ नहीं हो रहा है.
चंदन भाष्कर, पूर्व छात्र संघ सचिव, एएन कॉलेज
कॉपियों की कमी की वजह से परीक्षाओं में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन अब डीड हो चुका है. जल्द ही हमारे पास पर्याप्त कॉपियां होंगी. प्रयास कर रहे हैं कि सत्र नियमित कर दें. अक्तूबर तक पीजी का रिजल्ट आ जायेगा. स्नातक की परीक्षाएं अक्तूबर में लेकर नवंबर व दिसंबर में रिजल्ट जारी कर दिये जायेंगे.
डॉ आनंद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक, मगध विवि, बोधगया
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