पटना : कुपोषण से जंग में आयरन व आयोडीनयुक्त नमक बनेगा हथियार
Updated at : 14 Sep 2018 8:55 AM (IST)
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राजेश सिंह पटना : प्रदेश के 47% नौनिहाल कुपोषण से पीड़ित हैं. इसके मद्देनजर सरकार हरकत में आ गयी. कुपोषण से जंग के लिए अब आयरन और आयोडीनयुक्त (दोहरी पुष्टीकृत) नमक को ‘हथियार’ बनाया जायेगा. आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष तक के करीब 40 लाख बच्चों के लिए गर्म खाना बनाया जाता है. […]
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राजेश सिंह
पटना : प्रदेश के 47% नौनिहाल कुपोषण से पीड़ित हैं. इसके मद्देनजर सरकार हरकत में आ गयी. कुपोषण से जंग के लिए अब आयरन और आयोडीनयुक्त (दोहरी पुष्टीकृत) नमक को ‘हथियार’ बनाया जायेगा. आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष तक के करीब 40 लाख बच्चों के लिए गर्म खाना बनाया जाता है.
इसमें अब आयरन और आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग होगा. इसकी तैयारियों में राज्य सरकार जुट गयी है. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तिरहुत प्रमंडल के छह जिलों (मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर व सीतामढ़ी) की 102 परियोजनाओं के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म खाना में आयरन और आयोडीनयुक्त नमक का उपयोग सुनिश्चित कराये जाने की तैयारी चल रही है.
वहां आयरन और आयोडीनयुक्त नमक की आपूर्ति के लिए समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय (आईसीडीएस) ने कल्याण संघ से बात की है. बिहार के 19 जिलों में कुपोषण के साथ बौनापन ने पैर पसार दिये हैं. बांका, जमुई, भागलपुर, सहरसा, सुपौल, बक्सर, मधुबनी, समस्तीपुर, जहानाबाद, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, लखीसराय, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, मधेपुरा, पूर्णिया और गोपालगंज इनमें शामिल हैं. इन 19 जिलों की 281 परियोजनाओं के 49251 आंगनबाड़ी केंद्रों पर सरकार की नजर है. इन केंद्रों के साथ ही पूरे प्रदेश में विशेष इंतजाम किये जा रहे हैं. विशेषज्ञों की मानें तो कुपोषण के कारण कई हो सकते हैं, लेकिन आहार में आयोडीन और आयरन की मात्रा पर्याप्त रहे, तो काफी हद तक इसे खत्म किया जा सकता है. आईसीडीएस के निदेशक आरपीएस दफ्तुआर ने कहा किसरकार ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर कुपोषण को खत्म करने का पूरा प्लान बना लिया है. सिस्टम स्टेंडनिंग एंड न्यूट्रिशन इंप्रूवमेंट प्रोग्राम इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है. सात साल की पूरी कार्ययोजना तैयारी की गयी है
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आयरन की कमी से होती हैं ये दिक्कतें
कम हो जाता है खून का प्रवाह : आयरन की कमी से लाल रक्त कोशिकाएं कम बनती हैं. खून का प्रवाह कम हो जाता है और त्वचा पीला या फीका दिखने लगता है. भूख भी कम लगती है.
धीरे बढ़ता है वजन : आयरन की कमी से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कम हो जाती है. इसकी वजह से वह जल्दी बीमार पड़ता है. यही वजह है कि बच्चे का वजन धीरे बढ़ता है.
चिड़चिड़ापन: जिन बच्चों में आयरन की कमी पायी जाती है, वे जल्दी थकते हैं, कमजोरी का अनुभव करते हैं और चिड़चिड़े हो जाते हैं. उन्हें पसीना भी ज्यादा आता है.
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