मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड : जांच की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध के खिलाफ न्यायालय में याचिका

Published at :05 Sep 2018 3:49 PM (IST)
विज्ञापन
मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड : जांच की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध के खिलाफ न्यायालय में याचिका

पटना : मुजफ्फरपुर आश्रय गृह कांड की जांच की मीडिया में रिपोर्टिंग पर पटना उच्च न्यायालय की रोक के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दायर की गयी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस आश्रय गृह में अनेक लड़कियों के कथित रूप से बलात्कार और यौन शोषण की घटनाओं की […]

विज्ञापन

पटना : मुजफ्फरपुर आश्रय गृह कांड की जांच की मीडिया में रिपोर्टिंग पर पटना उच्च न्यायालय की रोक के आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दायर की गयी. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस आश्रय गृह में अनेक लड़कियों के कथित रूप से बलात्कार और यौन शोषण की घटनाओं की जांच कर रहा है. अधिवक्ता फौजिया शकील के माध्यम से एक पत्रकार द्वारा दायर इस याचिका में उच्च न्यायालय के 23 अगस्त के आदेश के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है. याचिका में इस आदेश को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा गया है कि यह इस मामले की मीडिया रिपोर्टिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने जैसा है.

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय द्वारा इस तरह से नागरिकों को जानकारी प्राप्त करने और प्रेस की आजादी के मौलिक अधिकारों को नजरअंदाज करना न्यायोचित नहीं है. मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले की जांच की निगरानी उच्च न्यायालय कर रहा है. उच्च न्यायालय ने 23 अगस्त को इस मामले की जांच का विवरण लीक होने पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए मीडिया से कहा था कि वह इसे प्रकाशित करने से बचे क्योंकि, यह जांच के लिये अहितकर हो सकता है.

एक गैर सरकारी संस्था द्वारा संचालित इस आश्रय गृह में कथित बलात्कार और यौन शोषण की घटनाये मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट आॅफ सोशल साइंसेज के सोशल आॅडिट के बाद सामने आयीं. याचिका दायर करने वाले पत्रकार ने दावा किया है कि मीडिया रिपोर्टिंग से इस मामले की जांच प्रभावित होने के नतीजे पर पहुंचने के लिये उच्च न्यायालय के पास कोई सामग्री नहीं थी. याचिका में उच्च न्यायालय के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में प्रदत्त अधिकारों पर सिधा कुठाराघात बताया गया है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि मीडिया की सकारात्मक भूमिका की वजह से ही हतप्रभ करने वाली यह घटना सामने आयी और इस तरह से जांच की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाया जाना मनमाना है. याचिका में यह भी कहा गया है कि मुजफ्फरपुर मामले की मीडिया रिपोर्टिंग के कारण ही बिहार के आरा में किशोर गृह में लड़के शारीरिक और यौन शोषण के बारे में अपने माता पिता से शिकायत करने का साहस जुटा सके. शीर्ष अदालत ने इससे पहले मुजफ्फरपुर आश्रय गृह की घटना की कथित पीड़ितों के बार बार लिये जा रहे इंटरव्यू और उनके प्रकाशन तथा प्रसारण को लेकर पटना निवासी रणविजय कुमार के पत्र का संज्ञान लिया था.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन