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पटना : अंडरग्राउंड स्टेशन पार कर करबिगहिया पहुंचेगी मेट्रो

Updated at : 03 Aug 2018 7:23 AM (IST)
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पटना : अंडरग्राउंड स्टेशन पार कर करबिगहिया पहुंचेगी मेट्रो

सुमित कुमार रेलवे-स्मार्ट सिटी का संयुक्त उपक्रम करेगा पटना जंक्शन एरिया का पुनर्विकास पटना : पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए पटना स्मार्ट सिटी और रेलवे का संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) बनेगा. यह संयुक्त उपक्रम ही स्मार्ट सिटी में स्टेशन एरिया के लिए तय निर्माण कार्य को पूरा करायेगा. इससे संबंधित प्रस्ताव नगर […]

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सुमित कुमार
रेलवे-स्मार्ट सिटी का संयुक्त उपक्रम करेगा पटना जंक्शन एरिया का पुनर्विकास
पटना : पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए पटना स्मार्ट सिटी और रेलवे का संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) बनेगा. यह संयुक्त उपक्रम ही स्मार्ट सिटी में स्टेशन एरिया के लिए तय निर्माण कार्य को पूरा करायेगा.
इससे संबंधित प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग ने रेलवे को भेज दिया है, जिस पर फिलहाल रेलवे की मंजूरी मिलनी बाकी है. रेल मंत्रालय की स्वीकृति के बाद रेलवे लैंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी (आरएलडीए) और पटना स्मार्ट सिटी के अफसरों की संयुक्त टीम की मदद से नये उपक्रम (एसपीवी) का गठन कर पुनर्विकास का काम शुरू कर दिया जायेगा.
स्मार्ट सिटी में स्टेशन के पुनर्विकास को लेकर तैयारियां की गयी हैं. जंक्शन के पास मेट्रो स्टेशन अंडरग्राउंड ही रहेगा. इसे दो सब-वे (भूमिगत पैदल पथ) से जोड़ा जायेगा. जंक्शन से मीठापुर की ओर जाने वाली मेट्रो भी अंडरग्राउंड होगी, जिसे स्टेशन के मुख्य द्वार के ठीक नीचे से होते हुए करबिगहिया छोर पर निकाला जायेगा.
– स्टेशन पार्किंग एरिया में होगी एक मेट्रो इंट्री : स्टेशन के पास मेट्रो की एक इंट्री महावीर मंदिर के पीछे पार्किंग स्टैंड के समीप जबकि दूसरी इंट्री जंक्शन गोलंबर के पास बुद्ध स्मृति पार्क की बाउंड्री के समीप होगी.
इससे जुड़े सब-वे की मदद से यात्री सीधे स्टेशन के बाहर आॅटो स्टैंड तक पहुंच सकेंगे. यह सब-वे अंदर ही अंदर न्यू मार्केट के समीप प्रस्तावित हॉकर्स कॉम्प्लेक्स और मल्टी स्टोरेज पार्किंग को भी जोड़ने का काम करेगा. इनमें से एक सब-वे (स्टेशन परिसर) का निर्माण पहले चरण में, जबकि दूसरे सब-वे (बुद्ध स्मृति पार्क के पास) का निर्माण दूसरे चरण में किया जायेगा.
इंटीग्रेटेड कंट्रोल सेंटर के लिए ईओआई प्रकाशित
वहीं, स्मार्ट सिटी के अंतर्गत निर्माण होने वाले इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल एंड डेटा सेंटर को लेकर एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) का प्रकाशन कर दिया गया है.
इसके अंतर्गत आवेदन करने वाली कंपनियां कंट्रोल सेंट्रल के लिए बजट का आकलन करते हुए अपना प्रस्ताव पेश करेंगी. इस इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड डेटा सेंटर के जरिये पूरे शहर पर नजर रखी जायेगी. इस कंट्रोल सेंटर से शहर के तमाम सीसीटीवी, ट्रैफिक, अस्पताल आदि जुड़े रहेंगे, जो किसी भी आपदा की परिस्थिति में तत्काल रिस्पॉन्ड करेंगे. मुख्यालय के स्तर पर भी एक कमांड कंट्रोल सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है, जो सभी स्मार्ट सिटी कंट्रोल सेंटर से जुड़े रहेंगे.
– बाकरगंज नाले की नये सिरे से तैयार होगी डीपीआर
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने पटना स्मार्ट सिटी को बाकरगंज नाले की डीपीआर नये सिरे से तैयार करने का निर्देश दिया है. इसका सर्वेक्षण कार्य भी समय निर्धारित कर पूरा कराया जायेगा. उन्होंने बताया कि अदालतगंज तालाब के विकास को लेकर एजेंसियों से 31 जुलाई तक ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) की मांग की गयी थी.
गठित एसपीवी कंपनियों में अब तक अधिकारी बहाल नहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
पटना : स्मार्ट सिटी को लेकर केंद्र व राज्य सरकार भले ही संवेदनशील हो, लेकिन संबंधित नगर निकाय इसमें अधिक रुचि नहीं दिखा रहे. इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि सूबे की चारों स्मार्ट सिटी पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर व बिहारशरीफ में गठित एसपीवी (स्पेशल पर्पस व्हेकिल) कंपनियों में अब तक अधिकारियों की बहाली नहीं हो सकी है. एसपीवी ही संबंधित शहर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के निर्माण व संचालन का काम करती है. इनकी बहाली नहीं होने से स्मार्ट सिटी का काम लगभग ठप पड़ा है.
– सीईओ को मिलेगा ढाई लाख मासिक वेतन : एसपीवी के सीईओ के लिए ढाई लाख रुपये मासिक वेतन निर्धारित किया गया है. उम्र सीमा 58 वर्ष होगी.
सीजीएम के लिए डेढ़ लाख मासिक व उम्र 55 वर्ष, सीएफओ के लिए सवा लाख रुपये मासिक और उम्र 55 वर्ष, सीनियर मैनेजर तकनीकी के लिए एक लाख मासिक व उम्र 50 वर्ष, सेक्रेट्री के लिए 90 हजार मासिक व उम्र 50 वर्ष निर्धारित है. मैनेजर रैंक की सैलरी 85 हजार रुपये, पीआरओ के लिए 70 हजार और अकाउंटेंट के लिए 35 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित है.
नगर आयुक्तों को फुर्सत नहीं
राज्य सरकार ने स्मार्ट सिटी कंपनियों का चेयरमैन संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त, जबकि सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) संबंधित नगर आयुक्त को बना रखा है. लेकिन, अतिरिक्त व्यस्तताओं की वजह से नगर आयुक्त काम नहीं कर पा रहे.
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