पटना : संप हाउस के धीमे कार्य पर भड़के प्रधान सचिव
Updated at : 19 Jul 2018 5:44 AM (IST)
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पटना : दो वर्षों से दर्जनों मुहल्ले जलजमाव की चपेट में हैं. इसका मुख्य कारण अशोक नगर संप हाउस के निर्माण का अब भी अधूरा रहना है.इसके अलावा जितना निर्माण पूरा किया गया है, उसमें भी पानी के लेवल को लेकर समस्या आ रही है. बुधवार को जब नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान […]
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पटना : दो वर्षों से दर्जनों मुहल्ले जलजमाव की चपेट में हैं. इसका मुख्य कारण अशोक नगर संप हाउस के निर्माण का अब भी अधूरा रहना है.इसके अलावा जितना निर्माण पूरा किया गया है, उसमें भी पानी के लेवल को लेकर समस्या आ रही है. बुधवार को जब नगर विकास व आवास विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने निर्माणाधीन संप का निरीक्षण किया, तो कई गड़बड़ियां सामने आयीं. यह देख कर प्रधान सचिव भड़क गये.
मौके पर उन्होंने काम देख रहे कार्यपालक अभियंता से पानी के प्राकृतिक बहाव की रिपोर्ट मांगी, तो अभियंता संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये. निरीक्षण में मौजूद वार्ड पार्षद पिंकी यादव और कुमार संजीत ने प्रधान सचिव से बताया कि करबिगहिया आउटलेट नीचा है और मिनी संप हाउस का बॉक्स ऊंचा है.
इससे प्राकृतिक रूप से पानी का बहाव नहीं हो रहा है. इस पर प्रधान सचिव ने नगर आयुक्त अनुपम कुमार सुमन को निर्देश दिया कि पार्षदों की बातों को गंभीरता से लें और वाटर लेवल की तकनीकी जांच कराएं. फिर तकनीकी रिपोर्ट को थर्ड पार्टी से भी जांच करायी जायेगी. इसके बाद आगे का निर्णय लिया जायेगा.
पानी खींचने के लिए बड़े कुएं बनाये जा रहे हैं, जिनकी पांच स्टेप में ढलाई होनी है. पहले स्टेप का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन चार स्टेप का काम बाकी है.
प्रधान सचिव ने योजना के कार्यपालक अभियंता से पूछा कि काम पूरा करने की टाइमलाइन बताएं. कार्यपालक अभियंता टाइमलाइन नहीं बता पाये. बीआरजेपी के एमडी राजेश मीणा को सख्त निर्देश दिया कि काम पूरा करने की टाइमलाइन और प्रोजेक्ट को पूरा करने की अंतिम तिथि की रिपोर्ट दो दिनों में उपलब्ध कराएं.
प्रधान सचिव ने कार्यपालक अभियंता से पूछा कि बारिश की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था क्या की गयी है. इसके जवाब में कार्यपालक अभियंता ने बताया कि दो मोटर लगाये गये हैं, जो बारिश के पानी को खींचने के लिए पर्याप्त हैं.
इस व्यवस्था पर संतोष जताते हुए प्रधान सचिव ने कहा कि एजेंसी प्रोजेक्ट पूरा करने में काफी विलंब कर रही है. इसको लेकर एजेंसी पर लेट-डिफॉल्टर के तहत 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. प्रधान सचिव नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत करमलीचक में सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी देखने गये .
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