जीवित्पुत्रिका : एक मां की 20 साल से सूनी गोद में आया शिशु, दो मांओं ने खोया अपना लाल

Published at :13 Sep 2017 8:53 PM (IST)
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जीवित्पुत्रिका : एक मां की 20 साल से सूनी गोद में आया शिशु, दो मांओं ने खोया अपना लाल

पटना : जीवित्पुत्रिका व्रत का उपवास कर मां अपनी संतान की लंबी आयु की कामना करती है. एक ओर जहां जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन पटना के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी राकेश कुमार की पत्नी किरण कुमारी सिन्हा की सुनी गोद शादी के 20 वर्ष बाद हरी हो गयी, वहीं शेखपुरा में दो माताओं की गोद […]

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पटना : जीवित्पुत्रिका व्रत का उपवास कर मां अपनी संतान की लंबी आयु की कामना करती है. एक ओर जहां जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन पटना के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी राकेश कुमार की पत्नी किरण कुमारी सिन्हा की सुनी गोद शादी के 20 वर्ष बाद हरी हो गयी, वहीं शेखपुरा में दो माताओं की गोद सुनी हो गयी. सदर प्रखंड के सिरारी गांव का नीलेश और पंचायत समिति सदस्य मीणा देवी व पैन डिहरी गांव निवासी के पोते की डूबने से मौत हो गयी.

जीवित्पुत्रिका पर्व पर 20 साल से सूनी मां की गोद भरी

सहरसा के कोसी चौक स्थित दत्तक गृह संस्थान के नौ माह के बालक उत्कर्ष को जीवित्पुत्रिका पर्व के अवसर पर बुधवार को पटना के आदर्श नगर कॉलोनी निवासी राकेश कुमार ने गोद लिया. सभी जरूरी कागजात को पूर्ण करने के बाद संस्थान की प्रबंधक श्वेता कुमारी और बाल संरक्षण पदाधिकारी भास्कर कश्यप ने दंपती को बच्चा सौंप दिया. पटना निवासी राकेश कुमार ने वर्ष 2015 में बच्चा गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. 29 अगस्त, 2017 को उन्हें बच्चा मिलने की जानकारी दी गयी. इसके बाद राकेश कुमार पत्नी किरण कुमारी सिन्हा के साथ दत्तक गृह संस्थान पहुंचे और सभी कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए बच्चे को गोद ले लिया. कुमार ने बताया कि शादी के 20 वर्ष से अधिक होने के बाद बच्चे की कमी खल रही थी. जीवन अधूरा महसूस हो रहा था. जिंदगी निराशा में डूब चुकी थी. ऐसे में सरकार की इस योजना ने नया जीवन मिला है. उन्होंने कहा दो वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जैसे ही बच्चा मिलने की जानकारी मिली. परिवार में उल्लास छा गया. जीवन में रोशनी का संचार हो गया. एक-एक दिन बच्चे को पाने का इंतजार करने लगा. आज जीवित्पुत्रिका के अवसर पर इसे प्राप्त कर मैं धन्य हो गया. वहीं, श्रीमती सिन्हा ने कहा कि अंधकारमय जीवन और सुनी गोद में बच्चे के आने से जीवन जीने की लालसा बढ़ गयी है. श्रीमती सिन्हा की गोद में बच्चा पहुंचते ही वह भावुक हो उठीं. प्रबंधक श्वेता ने बताया कि नौ माह के उत्कर्ष को मां की छाया पुनः मिल गयी. बच्चे को खुशी-खुशी अपनी नयी माता के साथ दत्तक परिवार के सदस्यों ने विदा किया.

मां की खातिर गौरा-गौरी बनाने के लिए मिट्टी लेने गया था नीलेश

शेखपुरा में एक ओर जहां मांओं ने अपनी संतान की लंबी आयु के लिए जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा है. वहीं दूसरी ओर, जिले की दो अलग-अलग घटनाओं में दो छात्रों के डूबने से दो मांओं की गोद सुनी हो गयी. सदर प्रखंड के सिरारी गांव में पांचवीं कक्षा का 12 वर्षीय छात्र नीलेश अपनी मां की खातिर पूजा करने के लिए गौरा-गौरी की मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी लाने गया था. इधर, मां अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए उपवास पर थी, उधर लाडला तेज धार में बह कर मौत की नींद में सो गया. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण में घटनास्थल के समीप किनारे से मिट्टी उठायी गयी थी. इस कारण वहां काफी गहराई थी. नीलेश सड़क किनारे मिट्टी लेने उतर गया और उससे सटे कुछ ही दूरी पर पानी का बहाव था, जहां गहराई भी काफी थी. इसी क्रम में नीलेश का पैर फिसल गया और वह पानी के बहाव में गिर गया और डूब कर उसकी मौत हो गयी. लाडले की मौत की खबर से मां की चीख से पूरा गांव दहल उठा. वहीं, दूसरी घटना में पंचायत समिति सदस्य मीणा देवी व पैन डिहरी गांव निवासी का पोता गोपाल नहाने के लिए नदी में गया था. इसी क्रम में डूब कर उसकी मौत हो गयी. पीड़ित परिवार के घर दस साल बाद घटना की पुनरावृत्ति होने से परिवार गहरे सदमे में डूब गया. इसके पूर्व गोपाल के बड़े भाई की मौत कुएं में डूबने से हो गयी थी.

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