कैल्शियम की कमी से मौत हास्यास्पद, आखिर कब तक यूं ही होती रहेगी बाघ शावकों की मौत

Updated at : 22 Jul 2017 7:53 AM (IST)
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कैल्शियम की कमी से मौत हास्यास्पद, आखिर कब तक यूं ही होती रहेगी बाघ शावकों की मौत

पटना जू. पांच सालों में सात शावकों की हुई मौत, राेकने की जगह थोथी दलील देकर बचते रहते हैं अधिकारी पटना : चिड़ियाघर में 2012 से अब तक कुल सात शावकों की मौत हो चुकी है. पांच वर्षों में हुई शावकों की मौत पटना जू प्रशासन द्वारा बाघों के देखभाल पर गंभीरता की पोल खोल […]

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पटना जू. पांच सालों में सात शावकों की हुई मौत, राेकने की जगह थोथी दलील देकर बचते रहते हैं अधिकारी
पटना : चिड़ियाघर में 2012 से अब तक कुल सात शावकों की मौत हो चुकी है. पांच वर्षों में हुई शावकों की मौत पटना जू प्रशासन द्वारा बाघों के देखभाल पर गंभीरता की पोल खोल रही है. ज्ञात हो कि सातों शावक स्वर्णा बाघिन के ही थे.
सबसे पहले स्वर्णा वर्ष 2012 में मां बनी थी. उस वर्ष उसने तीन शावकों को जन्म दिया था, लेकिन ये शावक कुछ दिनों बाद मर गये थे. इसके बाद स्वर्णा ने वर्ष 2014 में चार शावकों को जन्म दिया. जिसमें एक की मौत हो गयी थी. तीन अभी जीवित हैं. उसमें देवी, भवानी नामक दो फीमेल शावक और राजा नामक मेल शावक है.
13 मार्च 2017 में स्वर्णा तीसरी बार मां बनी है. उसने चार शावकों को जन्म दिया, लेकिनइस बार भी उसके शावक काल का ग्रास बनते जा रहे हैं.
गुरुवार को उसके तीसरे शावक की मौत हो गयी. सूत्रों की मानें तो देखभाल में लापरवाही इसका कारण हो सकता है. पटना जू प्रशासन शावकों के जन्म के बाद उनके देखभाल और स्वास्थ्य पर गोपनीयता बरतता है. न तो शावकों के बारे में जानकारी सार्वजनिक की जाती है न ही कोई मेडिकल बुलेटिन ही जारी की जाती है. शावकों की तबीयत बिगड़ने पर कहां से और किन विशेषज्ञों से मदद ली जा रही है, इसके बारे में भी नहीं बताया जाता है.
अभी चिड़ियाघर में हैं छह बाघ
वर्तमान में चिड़ियाघर में छह बाघ हैं. इसमें एक स्वर्णा का शावक है. इसके अलावा दो नर और तीन मादा बाघ हैं. अभी तक स्वर्णा के शावक को जू प्रशासन द्वारा सार्वजनिक भी नहीं किया गया है. इस कारण उसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है. स्वर्णा की उम्र लगभग 12 वर्ष है. एक मादा बाघ छह वर्ष में प्रजनन योग्य हो जाती है. जिसका वजन 135 से 175 किलो तक होता है. इनकी औसत आयु 15 से लेकर 26 वर्ष तक होती है. इसका गर्भकाल 93 से 110 दिनों तक का होता है.
विसरा की रिपोर्ट से खुलेगा राज
गुरुवार तड़के एक शावक की हुई मौत के सही कारण के बारे में जानने के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार करना होगा. पटना के वेटनरी कॉलेज अस्पताल में विसरा को सुरक्षित जांच के लिए भेजा गया है. यहां पर जांच के बाद यह तय हो जायेगा कि आखिर किन कारणों की वजह से शावक की मौत हो गयी. वेटनरी कॉलेज अस्पताल के प्रवक्ता डॉ सरोज कुमार ने बताया कि विसरा की जांच रिपोर्ट तीन से चार दिनों में बन जाती है. अस्पताल के डाॅक्टरों की एक टीम विसरा की जांच कर रही है, इसके बाद उन्हें रिपोर्ट देनी है.
शावकों की मौत पर देश के दो बड़े विशेषज्ञों की राय
कैल्शियम की कमी से मौत हास्यास्पद
कैल्शियम की कमी से बाघ के शावक की मौत हास्यास्पद है. चौपाया जानवरों को कैल्शियम मां के दूध से ही मिल जाता है. शावक को कोई न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर हो सकता है या उसके ब्रेन की फंक्शनिंग ठीक नहीं होगी. शावक के हड्डियों के कमजोर होने का वक्त कम से कम चार से पांच साल का होता है जबकि पटना जू के मामले में चार माह में ही शावक की मौत हो गयी है. बहरहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कारण क्या थे? बाघ के संरक्षण के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है यदि मदर को सही पोषण नहीं मिल रहा है तो शावक कमजोर होते हैं. इसकी पूरी जांच होनी चाहिए.
आरएन मेहरोत्रा, रिटायर्ड पीसीसीएफ, बाघ संरक्षण के राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ: इन्होंने राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व को पुनर्जीवित किया है.
परिस्थितियां संदिग्ध
पटना जू में शावक की मौत के पीछे संदिग्ध परिस्थितियां लग रही हैं. कैल्शियम की कमी से नहीं बल्कि इन्फेक्शन इसका एक कारण हो सकता है. अभी सही कारणों का पता नहीं चल पा रहा है. इस मामले में सेंट्रल जू अथॉरिटी को जांच करनी चाहिए. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा कि आखिर कारण क्या थे?
आरएस मूर्ति, एपीसीसीएफ, मध्य प्रदेश वन विभाग, बाघ संरक्षण के राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ: इन्होंने मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित किया.
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