NEET EXAM CANCEL: परीक्षार्थी होने का दर्द: हर बार एग्जाम नहीं, हमारा भरोसा टूटता है


Patna News: परीक्षार्थी होने का दर्द हर बार छात्रों को झेलना पड़ता है. परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि परिवार के सपनों और बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है. मंगलवार को ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने की घोषणा की. रद्द होने के बाद लाखों छात्र तनाव में हैं.
Patna News: (अनुराग प्रधान) प्रतियोगी परीक्षाओं और विश्वविद्यालयी एग्जाम के बार-बार रद्द होने से छात्रों की मानसिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती है. मंगलवार को ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने की घोषणा की. रद्द होने के बाद लाखों छात्र तनाव में हैं. वहीं, हाल में बिहार में एइडीओ और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षा के रद्द होने तथा एमबीबीएस फाइनल इयर की परीक्षा सायंस कॉलेज और आइसीआइएमएस केंद्रों पर स्थगित होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है. छात्रों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने से सिर्फ एक तारीख नहीं बदलती, बल्कि महीनों की मेहनत, मानसिक संतुलन और परिवार की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है. दूर-दराज के जिलों से आने वाले छात्रों को यात्रा, होटल, खाना और कोचिंग का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. कई छात्र तो उधार लेकर परीक्षा देने पहुंचते हैं.
सिर्फ एग्जाम नहीं, सपनों की लड़ाई
परीक्षार्थियों का कहना है कि उनके लिए परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि परिवार के सपनों और बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है. ऐसे में बार-बार परीक्षा रद्द होने से सबसे ज्यादा चोट उनके आत्मविश्वास और भरोसे को पहुंचती है.
‘हर बार लगता है मेहनत बेकार हो गयी’
नीट की तैयारी कर रही पटना की छात्रा रिया कुमारी ने कहा, ‘दो साल से दिन-रात पढ़ाई कर रहे थे. परीक्षा के बाद थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन रद्द होने की खबर ने फिर से तनाव में डाल दिया. इस बार 660 से अधिक स्कोर प्राप्त हो रहा था. अब दोबारा वही दबाव झेलना पड़ेगा. दिल्ली से पटना नीट देने आये एक अभ्यर्थी ने बताया कि ‘ट्रेन का टिकट, होटल और खाने में हजारों रुपये खर्च हो गये. परीक्षा रद्द होने का मतलब है फिर से वही खर्च और तनाव.
परिवार पर भी बढ़ता है दबाव
गोल इंस्टीट्यूट के आनंद वत्स का कहना है कि परीक्षा रद्द होने का असर सिर्फ छात्रों पर नहीं, उनके परिवारों पर भी पड़ता है. अभिभावक बच्चों की तैयारी, कोचिंग फीस और रहने-खाने पर लाखों रुपये खर्च करते हैं. परीक्षा टलने या रद्द होने से पूरा परिवार मानसिक दबाव में आ जाता है. अभिभावक आनंद मोहन ने कहा कि बच्चे रात-रात भर पढ़ते हैं. जब परीक्षा रद्द होती है तो उनका आत्मविश्वास टूट जाता है. कई बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं.
छात्र संगठनों ने उठाये सवाल
छात्र संगठनों ने लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठायी है. एआइएसएफ ने कहा है कि बार-बार परीक्षा रद्द होना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. सरकार और परीक्षा एजेंसियों को मजबूत व्यवस्था बनानी होगी ताकि छात्रों का भरोसा कायम रहे. एनएसयूआइ के छात्र नेता ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था, पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है.
सफर भी बन जाता है संघर्ष
ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों के लिए परीक्षा देना किसी संघर्ष से कम नहीं होता. कई छात्र रातभर ट्रेन और बसों में सफर कर परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं. परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. पूर्णिया के एक छात्र ने कहा कि घर से 14 घंटे सफर करके पटना पहुंचे थे. केंद्र पर आकर पता चला परीक्षा रद्द हो गयी. ऐसा लगा जैसे सारी मेहनत और उम्मीद खत्म हो गयी.
परीक्षा रद्द होती है तो छात्रों में निराशा और अस्थिरता कई गुना बढ़ जाती है
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार अनिश्चितता और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं युवाओं में चिंता, अवसाद और असुरक्षा की भावना बढ़ा रही हैं. कई छात्र सोशल मीडिया और परिवार के दबाव के कारण खुद को असफल मानने लगते हैं. प्रतियोगी परीक्षाएं पहले से ही मानसिक दबाव का कारण होती हैं. जब परीक्षा रद्द होती है तो छात्रों में निराशा और अस्थिरता कई गुना बढ़ जाती है.
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