बिहार में 14 प्रतिशत लोग ही है स्वास्थ्य बीमा कवरेज के दायरे में, जानिये स्वास्थ्य विभाग कितना कर रहा खर्च

Updated at : 05 Feb 2021 6:55 AM (IST)
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बिहार में 14 प्रतिशत लोग ही है स्वास्थ्य बीमा कवरेज के दायरे में, जानिये स्वास्थ्य विभाग कितना कर रहा खर्च

सामान्य से लेकर गंभीर किस्म की बीमारियों के इलाज में मरीजों की का आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाती है. स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बिहार की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. राज्य के सिर्फ 14 प्रतिशत लोग ही किसी न किसी प्रकार के स्वास्थ्य बीमा कवरेज में शामिल हुए हैं.

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शशिभूषण कुंवर, पटना. सामान्य से लेकर गंभीर किस्म की बीमारियों के इलाज में मरीजों की का आर्थिक स्थिति गड़बड़ा जाती है. स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बिहार की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है. राज्य के सिर्फ 14 प्रतिशत लोग ही किसी न किसी प्रकार के स्वास्थ्य बीमा कवरेज में शामिल हुए हैं.

कैंसर की बीमारी में मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने पर इलाज में 27146 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, तो प्राइवेट नर्सिंग होम में उनको कैंसर बीमारी के इलाज में 99871 रुपये खर्च करने पड़ते हैं. स्वास्थ्य बीमा कवरेज कम होने से मरीजों को निजी संस्थानों में इलाज करानेवाले मरीज की संपत्ति ही लुटने जैसी हो जाती है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे -पांच के अनुसार बिहार में स्वास्थ्य बीमा का कवरेज 14.6 प्रतिशत है. राज्य की जनता को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ दिया जाये तो 45 फीसदी से अधिक लोग स्वास्थ्य बीमा कवरेज में शामिल हो जायेंगे.

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से राज्य के एक करोड़ आठ लाख परिवारों को बीमा कवरेज में शामिल किया जाना है. इन परिवारों को बीमा कवरेज दे दिया जाये तो राज्य के 5.5 करोड़ लोग पांच सालाना के स्वास्थ्य बीमा कवरेज में शामिल हो जायेंगे. स्थिति यह है कि यहां के लोगों में हर प्रकार की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है.

सरकारी अस्पतालों में ओपीडी और भर्ती मरीजों के इलाज कराने पर भी पूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं. ऐसी स्थिति में बिहार के मरीज कैंसर, गुर्दा प्रत्यारोपण, जोड़ों का प्रत्यारोपण, स्नायु रोग की सर्जरी से लेकर अन्य प्रकार की बीमारियों का इलाज प्राइवेट या सरकारी संस्थानों में कराते हैं तो उनको मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से हर बीमारी के लिए अनुदान दिया जाता है.

मरीजों का बीमा नहीं रहने और बेहतर इलाज कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर महीने 90 लाख से एक करोड़ तक की आर्थिक सहायता देनी पड़ रही है.

भर्ती होने के बाद मरीजों का पॉकेट खर्च

बीमारी सरकारी अस्पताल प्राइवेट अस्पताल

बुखार 2843 रुपये 15513 रुपये

टीबी बुखार 5949 रुपये 51629 रुपये

वेक्टरबॉर्न 3263 रुपये 15697 रुपये

कैंसर 27146 रुपये 99871 रुपये

स्नायु रोग 9622 रुपये 44307 रुपये

नेत्र-इएनटी 4129 रुपये 44307 रुपये

हृदय रोग 8609 रुपये 58201 रुपये

गैस्ट्रोलॉजी 5326 रुपये 33268 रुपये

महिला रोग 3811 रुपये 29307 रुपये

औसतन 6049 रुपये 34214 रुपये

नोट : स्रोत – आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21, भारत सरकार

Posted by Ashish Jha

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