बिहार में 646 जब्त वाहन दो माह में हुए ऑनलाइन नीलाम, जानें पांच साल में कितने बिके थे ऑफलाइन जब्त वाहन

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Jun 2022 12:17 PM

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बिहार में वाहन नीलामी की जटिल प्रक्रिया के चलते शराबबंदी लागू होने के बाद पिछले पांच साल में मात्र चार हजार वाहनों की नीलामी ही संभव हो सकी.

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पटना. मद्य निषेध कानून के तहत थानों में जब्त वाहनों का कबाड़ अब धीरे- धीरे कम होने लगा है. 2016 में कानून लागू होने के बाद शराबी व शराब माफियाओं के साथ बड़ी संख्या में वाहन भी जब्त हुए. साल- दरसाल इनकी संख्या बढ़ती गयी. वाहन नीलामी की जटिल प्रक्रिया के चलते शराबबंदी लागू होने के बाद पिछले पांच साल में मात्र चार हजार वाहनों की नीलामी ही संभव हो सकी. लेकिन, अप्रैल में संशोधित मद्य निषेध कानून के साथ वाहनों की नीलामी ऑनलाइन किये जाने का प्रावधान किया गया. इसके लिए केंद्र सरकार के इ-ऑक्शन पोर्टल एमएसटीसी पोर्टल की सेवाएं ली गयीं.

नये वाहन भी कम हो रहे जब्त

इसका असर है कि पिछले दो से ढाई महीने में ही इस पोर्टल पर 12 हजार से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो गया है. इनमें से 3178 वाहनों को नीलामी प्रक्रिया पूरी करते हुए 646 वाहन को बेच कर करीब चार करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त कर लिया गया है. वेबसाइट पर अब भी 8237 वाहन नीलामी के लिए उपलब्ध हैं. संशोधित मद्य निषेध कानून लागू होने के बाद जब्त होने वाले वाहनों की संख्या कम होने से नये वाहनों का दबाव भी घटा है.

पांच साल में इतने जब्त वाहन बिके थे ऑफलाइन

संशोधित कानून के तहत शराब के साथ पकड़े गये वाहन के मामले में स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी बीमा की आधी राशि का जुर्माना लेकर वाहन को छोड़ सकते हैं. ऐसे में छोटे- मोटे मामलों में तत्काल ही जुर्माना लेकरवाहनों को छोड़ा जा रहा है. जब्त वाहनों की संख्या लगातार कम होने से मद्य निषेध व पुलिस थानों को राहत मिली है.

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रजिस्ट्रेशन कर नीलामी में ले सकेंगे भाग

मद्य निषेध विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एमएसटीसी की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाहनों की नीलामी में भाग ले सकता है. इसके लिए उनको इ-मेल आइडी और मोबाइल नंबर देकररजिस्ट्रेशन कराना होगा. नीलामी के लिए तिथि निर्धारित होने पर आवेदक के रजिस्टर्ड इ-मेल व मोबाइल पर इसकी सूचना दी जायेगी. हालांकि, कई लोगों की शिकायत है कि रजिस्ट्रेशन कराने में उनको काफी तकनीकी परेशानी उठानी पड़ रही है.

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