One Nation, One Electricity Rate: एक देश-एक बिजली दर की मांग क्यों कर रहे सीएम नीतीश? इससे बिहार को होने वाले फायदे को जानिए

One Nation, One Electricity Rate, Nitish kumar News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठी बैठक (NITI Aayog Meeting) में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने पूरे देश में एक बिजली दर (One nation, One Electricity Rate) लागू करने की मांग की है. सीएम नीतीश ने कहा कि पूरे देश में केंद्र सरकार बिजली की आपूर्ति करती है. इसलिए देश भर में बिजली की दर एक समान होनी चाहिए.
One nation, One Electricity Rate, Nitish kumar News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठी बैठक (NITI Aayog Meeting) में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने पूरे देश में एक बिजली दर (One nation, One Electricity Rate) लागू करने की मांग की है. सीएम नीतीश ने कहा कि पूरे देश में केंद्र सरकार बिजली की आपूर्ति करती है. इसलिए देश भर में बिजली की दर एक समान होनी चाहिए. वन नेशन-वन रेट लागू होना चाहिए.
तो सवाल ये है कि सीएम नीतीश ने बिजली पर ‘वन नेशन-वन रेट’ का सुझाव क्यों दिया? अगर यह लागू हो गया तो इससे बिहार को क्या फायद होगा? तो सीएम नीतीश की इस मांग का कारण ये हैं कि बिहार जैसा राज्य आज देश में सबसे महंगी बिजली खरीद रहा है. बिहार की तुलना में पड़ोसी राज्यों को भी सस्ती बिजली मिल रही है. उदाहरण के लिए ओडिशा को बिहार से लगभग आधे कीमत पर ही बिजली ले रहा है.
अधिक दाम पर बिजली लेने के कारण बिहार को हर साल हजारों करोड़ अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं. विकास के कई पैमाने पर पिछड़े बिहार के लिए यह दोहरी मार है. जो पैसे विकास पर खर्च होने चाहिए वो बिजली खरीद में खर्च हो रहा है. बता दें कि साल 2018-19 में खरीदी गई बिजली की दर का ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार देश में बिजली खरीद का औसत मात्र 3.60 रुपए प्रति यूनिट है.
इसमें पूर्वी राज्यों में सबसे अधिक दर पर बिहार को ही बिजली मिल रही है. राष्ट्रीय औसत की तुलना में ओडिशा को 89 पैसे प्रति यूनिट सस्ती बिजली मिल रही है. जबकि राष्ट्रीय औसत से भी बिहार 52 पैसे अधिक प्रति यूनिट बिजली खरीद में खर्च कर रहा है. ऐसे में अगर एक देश-एक बिजली दर लागू हो जाए तो बिहार के लोगों को सस्ती बिजली मिलने की संभावना बढ़ जाएगी वहीं राज्य सरकार को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा.
नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह भी बताया कि बिहार में वर्ष 2018 के अक्टूबर महीने में ही हर घर बिजली पहुंचा दी गई है. सीएम नीतीश ने कि 2005 में बिजली की खपत मात्र 700 मेगावाट की थी जो जून 2020 में बढ़कर 5,932 मेगावाट तक पहुंच गई है. उन्होंने यह भी बताया कि सूबे में प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है जिसकी वजह से अब बिजली का दुरुपयोग नहीं होगा.
यह अच्छी बात है कि इस योजना को केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया है.न्होंने उ्होंने कहा कि राज्य सरकार लोगों को पांच हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का अनुदान देती है. लोगों को कम कीमत पर बिजली मुहैया हो, इसके लिए हमलोग कोशिश कर रहे हैं.
Posted By: Utpal Kant
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