नीतीश कुमार ने दलितों के लिए किये अविश्वसनीय कार्य, मायावती के ट्वीट पर जदयू ने दिया जवाब, जानें पूरी बात
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Apr 2023 9:45 PM
बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को ट्वीट कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें दलित विरोधी बताया है. जिसके बाद अब जदयू नेता अशोक चौधरी ने कहा सीएम नीतीश ने समाज के पिछड़ों और महिलाओं की सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने का लगातार सार्थक प्रयास किया है.
बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई पर नीतीश सरकार पर आरोप लगाने वाले बयान पर कहा है कि सीएम नीतीश कुमार ने 18 वर्षों में दलितों के लिए अविश्वसनीय कार्य किये हैं. अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, समाज के अत्यंत पिछड़े वर्गों और महिलाओं की सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने का लगातार सार्थक प्रयास किया है.
अशोक चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2007 में पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का नोडल विभाग के रूप में गठन किया. इसी वर्ष अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग का गठन भी किया गया. महात्मा गांधी दलित नहीं थे लेकिन उन्होंने दलितों और पिछड़ों के उत्थान के लिए जीवन भर संघर्ष किया. उसी प्रकार सीएम नीतीश कुमार ने वंचित एवं दलित समाज के लिए योजनाओं का निर्माण एवं बजट का प्रावधान किया. नीतीश कुमार बाबा साहब, बापू और पटेल की राह पर चलने वाले पूरे देश में कमजोर वर्ग, दलितों, वंचितों एवं अतिपिछड़ों के एक मात्र नायक हैं.
जदयू नेता मनोज लाल दास मनु ने पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का विरोध करने वालों को बिहार विरोधी बताया है. उन्होंने रविवार को कहा कि डीएम कृष्णैया की हत्या के वक्त आनंद मोहन वहां नहीं थे. उन पर मात्र भीड़ को उकसाने का आरोप लगा था. भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी खुद सार्वजनिक रूप से आनंद मोहन की रिहाई की मांग करते रहे हैं. अब उन्हें आनंद मोहन की रिहाई दलित विरोधी लगने लगी है. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती महज वोट बैंक के लिए विरोध कर रही हैं.
भूमिहार ब्राह्मण सामाजिक फ्रंट के कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर शर्मा ने कहा कि गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड में तयशुदा उम्र कैद से अधिक सजा काट चुके पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का विरोध कर रहे लोग अत्यंत ही घृणित मानसिकता के शिकार हैं. उनको मानवता से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि आनंद मोहन का कृष्णैया की हत्या से कोई लेना-देना नहीं था. वे 16-17 वर्षों से निर्दोष होने के बावजूद उस अपराध में जेल में बंद हैं, जो उन्होंने किया ही नहीं. अपने कारावास जीवन के दौरान कभी उन्होंने कोई आपत्ति जनक आचरण भी नहीं प्रदर्शित किया है, जिससे उनके जेल से बाहर निकलने पर कानून या समाज को परेशानी हो.
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बता दें कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने आनंद मोहन को जेल से स्थायी रूप से छोड़े जाने की चर्चा पर रविवार को ट्वीट कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा कि बिहार की नीतीश सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) महबूबनगर के रहने वाले गरीब दलित समाज से आइएएस बने बेहद ईमानदार जी कृष्णैया की निर्दयता से हत्या की गयी. हत्या में आनंद मोहन को नियम बदलकर रिहा करने की तैयारी देश भर में दलित विरोधी निगेटिव कारणों से चर्चाओं में है. आनंद मोहन बिहार में कई सरकारों की मजबूरी रहे हैं. लेकिन, गोपालगंज के तत्कालीन डीएम कृष्णैया की हत्या मामले को लेकर नीतीश सरकार के इस दलित विरोधी व अपराध समर्थक कार्य से देश भर के दलित समाज में काफी रोष है. चाहे कुछ भी मजबूरी हो किंतु बिहार सरकार इस पर जरूर पुनर्विचार करे.
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