विश्व रेबीज दिवस पर रजौली में 100 श्वानों का टीकाकरण

Published by : KR MANISH DEV Updated At : 28 Sep 2025 7:48 PM

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जागरूकता कार्यक्रम में दी रेबीज की विस्तृत जानकारी

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जागरूकता कार्यक्रम में दी रेबीज की विस्तृत जानकारी इमर्जेंसी सेवाएं भी सुचारू रूप से जारी प्रतिनिधि, रजौली. विश्व रेबीज दिवस पर रविवार को रजौली में अनुमंडल स्तरीय पशु चिकित्सालय की ओर से जागरूकता एवं टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार कुशवाहा व रजौली अनुमंडल भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रिषु कुमार ने किया. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ दीपक ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर 100 श्वानों (कुत्तों) को रेबीज का टीका लगाया गया. इसका मुख्य उद्देश्य इस घातक बीमारी से बचाव सुनिश्चित करना और समाज को सुरक्षित व स्वस्थ बनाना है. इस कार्यक्रम में स्थानीय पशु पालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और उनके पालतू जानवरों का निःशुल्क टीकाकरण किया गया. जिला पशुपालन पदाधिकारी ने कहा कि रेबीज एक गंभीर बीमारी है, जिसे टीके से रोकी जायेगी. इस तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हम समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बना सकते हैं. इस कार्यक्रम में रेबीज के बचाव, उपचार और श्वानों की सही देखभाल से संबंधित विस्तृत क्लिनिकीय जानकारी और परामर्श दिया गया. चिकित्सक रेषु कुमार ने बताया कि रेबीज एक घातक विषाणुजनित (वायरल) बीमारी है, जो मुख्य रूप से पालतू और जंगली जानवरों से फैलती है. यह संक्रमित जानवर के काटने, चाटने, घाव या खरोंच से शरीर में प्रवेश करता है. यह विषाणु मनुष्य और पशुओं के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे असामान्य व्यवहार, उत्तेजना और अंततः मृत्यु हो जाती है. उन्होंने बताया कि बताया कि श्वान में रेबीज के लक्षण दो अवस्थाओं में दिखते हैं. पागलपन या उग्र अवस्था में दिखाई देता है. रेबीज की रोकथाम के लिए साल में एक बार पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण सबसे जरूरी है. यदि कोई जानवर काट ले, तो तुरंत पशु चिकित्सक या डॉक्टर से संपर्क करें और निर्धारित समय पर रेबीज रोधी वैक्सीन (24 घंटे के अंदर पहला टीका) लगाना चाहिए. इस सफल कार्यक्रम के समापन पर पशुपालकों को नियमित टीकाकरण और पालतू पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए प्रेरित किया गया. इसमें रजौली प्रखंड के तीनों पशु चिकित्सक डॉ. रेशु कुमार, डॉ. अभय कुमार एवं डॉ. नीरज कुमार सिंह तथा पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने सक्रिय योगदान दिया. हालांकि, टीकाकरण के दौरान इमर्जेंसी सेवाएं भी नियमित रूप से दिखाई दी जा रही थीं.

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