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आरटीइ प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों का अस्तित्व संकट में

Updated at : 14 Jan 2026 6:02 PM (IST)
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आरटीइ प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों का अस्तित्व संकट में

NAWADA NEWS.शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीइ) के तहत नामांकित बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं होना अब निजी शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर भारी पड़ने लगा है. रजौली प्रखंड के निजी स्कूलों ने पिछले नौ वर्षों सत्र 2017 से 2026 तक की बकाया राशि नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना किया है.

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नौ वर्षों से बकाया राशि नहीं मिलने पर कई स्कूल बंद, कई बंद होने की कगार पर

प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल पटना रवाना

फोटो कैप्शन – अपनी मांगों को लेकर रजौली से रवाना होते शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडलप्रतिनिधि, रजौली

शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीइ) के तहत नामांकित बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं होना अब निजी शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर भारी पड़ने लगा है. रजौली प्रखंड के निजी स्कूलों ने पिछले नौ वर्षों सत्र 2017 से 2026 तक की बकाया राशि नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना किया है. इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के कई विद्यालय बंद हो चुके हैं व कई बंद होने की कगार पर हैं. इस विकट स्थिति से अवगत कराने व अपनी मांगों को रखने के लिए प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के रजौली प्रखंड अध्यक्ष सह साउथ सीटी इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक रविंद्र कुमार पप्पू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पटना के लिए रवाना हुआ. इस दल में रजौली से पीएम एकेडमी के अभिषेक कुमार व रूलर टैलेंट इंग्लिश स्कूल के अखिलेश कुमार शामिल हैं. इसके अलावा नवादा से भी निजी विद्यालयों के संचालक पटना के लिए निकले हैं, जो बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री से मिलकर बकाया आवंटन की शीघ्र मांग करेंगे. प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रखंड अध्यक्ष ने बताया कि विगत वर्षों में सरकार द्वारा जारी ‘ज्ञानदीप’ पोर्टल पर तकनीकी खामियों व जटिल प्रक्रियाओं के कारण डाटा अपलोड करने में स्कूलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी है.

पोर्ट सही करने के बदले प्रति स्कूल लाखों रुपये मांगने का आरोप

एसोसिएशन का आरोप है कि इस दौरान जांच के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल भी हुआ, जिसमें कुछ अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट सही करने के बदले प्रति स्कूल लाखों रुपये की मांग की गयी. मांग पूरी नहीं होने पर कई प्रतिष्ठित स्कूलों की रिपोर्ट शून्य कर दी गयी. वर्तमान में इन गड़बड़ियों की जांच जिलाधिकारी स्तर पर की जा रही है, लेकिन भुगतान में हो रहे विलंब ने स्कूलों के सामने शिक्षकों के वेतन व भवन के रख-रखाव जैसी मूलभूत चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. रजौली से पटना के लिए निकले शिक्षकों व संचालकों के इस प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि शिक्षा मंत्री उनकी आर्थिक तंगहाली व पिछले नौ वर्षों के संघर्ष को समझते हुए विभागीय अधिकारियों को अविलंब भुगतान सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश देंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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