ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने की अनोखी पहल, दिव्यांग छात्र को शिक्षक ने भेंट की बैसाखी

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बच्चों को मिठाई खिलाकर विद्यालय आने के लिए प्रेरित करते प्रधानाध्यापक

बच्चों को मिठाई खिलाकर विद्यालय आने के लिए प्रेरित करते प्रधानाध्यापक

Nawada News : रजौली के नीमाटांड़ स्कूल ने ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने के लिए अभियान शुरू किया। एक दिव्यांग छात्र को बैसाखी देकर शिक्षा से जोड़ने की अनूठी पहल की गई है।

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Nawada News : शिक्षा को हर घर तक पहुंचाने के संकल्प के साथ रजौली प्रखंड के नीमाटांड़ स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय ने अभिनव पहल शुरू की है. विद्यालय के पोषक क्षेत्र में नामांकित एवं विद्यालय से छिटक चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जनसंपर्क सह प्रेरणा अभियान चलाया जा रहा है.

घर-घर जाकर बच्चों और अभिभावकों को किया जागरूक

विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश कुमार ने महादलित टोला और आसपास की बस्तियों का नियमित भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने नामांकित एवं ड्रॉपआउट बच्चों से आत्मीय मुलाकात की. बच्चों को स्नेहपूर्वक मिठाई खिलाकर विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया गया. प्रधानाध्यापक ने अभिभावकों से संवाद करते हुए शिक्षा के महत्व और बच्चों की नियमित उपस्थिति पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षा ही गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी माध्यम है. उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने की अपील की.

शिक्षक ने दिव्यांग छात्र को भेंट की बैसाखी

अभियान के दौरान विद्यालय के शिक्षक अनोज कुमार ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपने निजी कोष से दिव्यांग छात्र ऋतिक कुमार को बैसाखी उपलब्ध कराई. बैसाखी मिलने से अब ऋतिक विद्यालय आसानी से आ-जा सकेगा और अन्य बच्चों की तरह प्रार्थना, खेलकूद एवं पढ़ाई में समान रूप से भाग ले सकेगा. यह पहल समावेशी शिक्षा की भावना को मजबूत करने वाली मानी जा रही है.

'कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा'

प्रधानाध्यापक राजेश कुमार ने कहा कि विद्यालय का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. हर घर और विद्यालय के बीच विश्वास का संबंध स्थापित हो तथा प्रत्येक बच्चे को समान अवसर, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले.

स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना

प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है. ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों के समर्पण और जनसंपर्क अभियान से क्षेत्र में साक्षरता दर बढ़ेगी तथा अधिक से अधिक बच्चे विद्यालय से जुड़कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकेंगे.

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Kr Manish Dev

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