मेसकौर में फसलों को रौंद रही नीलगाय, किसान परेशान
Updated at : 03 Jan 2026 6:54 PM (IST)
विज्ञापन

NAWADA NEWS.मेसकौर प्रखंड में नीलगाय का आतंक किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. किसानों को अपनी फसलें बचाने के लिए रात-रात भर जागना पड़ रहा है. नीलगाय की बढ़ती संख्या से रबी और सब्जियों की खेती को भारी नुकसान हो रहा है.
विज्ञापन
मेसकौर प्रखंड में नीलगाय का आतंक किसानों के लिए परेशानी का सबब बना
फोटो कैप्शन- नीलगाय का फाइल फोटो प्रतिनिधि, मेसकौर मेसकौर प्रखंड में नीलगाय का आतंक किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. किसानों को अपनी फसलें बचाने के लिए रात-रात भर जागना पड़ रहा है. नीलगाय की बढ़ती संख्या से रबी और सब्जियों की खेती को भारी नुकसान हो रहा है. अगर समय पर उपाय नहीं किये गये, तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ सकती है. दरअसल नीलगाय खेतों में लगी फसल को बर्बाद कर दे रहे हैं, जिससे मेसकौर प्रखंड के इलाके की खेती संकट के दौर से गुजरने लगी है. बता दें कि प्रखंड वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं और बदलते पर्यावरणीय हालात की मार झेलता आ रहा है. कभी अकाल तो कभी असमय बारिश, कभी सूखा तो कभी महामारी, यहां का किसान हर मौसम में किसी न किसी संकट से दो-चार होता रहा है. इसके बावजूद किसान अपनी मेहनत, जिद और अनुभव के सहारे खेती को जिंदा रखे हुए हैं. हाल के दिनों में नीलगाय का बढ़ता आतंक अब किसानों के सामने एक नयी और गंभीर आपदा के रूप में सामने आयी है. करीब दो महीने से पूरे प्रखंड में नीलगाय का झुंड खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर रहा है. खासकर रबी, दल्हन, तेलहन और सब्जी की खेती शुरू होने के बाद से नीलगाय का आतंक तेजी से बढ़ा है. झुंड के झुंड रात के अंधेरे में खेतों में घुस आते हैं और देखते ही देखते सब्जी और दलहन रबी की फसल को तहस-नहस कर देते हैं.मशाल, टॉर्च और शोर-शराबे के सहारे नीलगाय को भगाने की कोशिश
मुरहेताचक के युवा किसान संजय यादव और सीधेसर यादव बताते हैं कि नीलगाय का झुंड अचानक आता है कि संभलने का मौका तक नहीं मिलता. मजबूरी में किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है. किसान सत्येंद्र यादव, अर्जुन यादव कहते हैं कि कई गांवों में किसान समूह बनाकर मशाल, टॉर्च और शोर-शराबे के सहारे नीलगाय को भगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसका असर सीमित ही है. इन किसानो का कहना हैं कि दर्जनों की संख्या में नीलगाय का झुंड आकर खेतों पर हमला करता है. खासकर हरी सब्जियों की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है. कई किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो गयी है. किसान महेंद्र यादव का कहना है कि अगर समय रहते नीलगाय के आतंक पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मेसकौर प्रखंड से रबी, दल्हन, तेलहन और सब्जी की खेती भी खतरे में पड़ सकती है. उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से ठोस पहल की मांग की.बोले जिम्मेदार
वन-विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर नील गाय को पकड़वाया जायेगा. स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों की मदद ली जायेगी. जितना जल्द हो सकेगा उतना जल्द प्रयास किया जायेगा, ताकि किसानों को अब इससे अधिक परेशानी न हो.अश्वनी कुमार, बीडीओ, मेसकौर
रबी फसल के मौसम में ही नीलगाय का आतंक तेज होता है. यह कहां से आता है और कहां चला जाता है इसका भी पता लगवाया जायेगा और वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर हर हाल में समाधान करवाया जायेगा.विमल राजवंशी, विधायकB
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




