नवादा: रिकॉर्ड रूम के खेल में 28 साल पुराने केस की एफआईआर और चार्जशीट 'गायब', कोर्ट ने बंद की कार्रवाई

Author Ashutosh kumar|Edited by Vikash Jha
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फोटो कैप्शन - नवादा व्यवहार न्यायालय का फाइल फोटो न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी संतोष कुमार द्वारा पारित आदेश की प्रती | Prabhat Khabar Network

नवादा व्यवहार न्यायालय का फाइल फोटो| Prabhat Khabar Network

नवादा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ 1996 से चल रहे एक आपराधिक मुकदमे के बुनियादी दस्तावेज रिकॉर्ड रूम से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए हैं. कोर्ट को एफआईआर, चार्जशीट और पुराने आदेश तक नहीं मिले, जिसके चलते कार्यवाही रोक दी गई है.

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Nawada News: बिहार की न्याय व्यवस्था और जिला कोर्ट के अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. वर्ष 1996 से चल रहे एक आपराधिक मुकदमे में अदालत को तब विवश होना पड़ा, जब यह खुलासा हुआ कि मुकदमे के सबसे बुनियादी दस्तावेज रिकॉर्ड रूम से रहस्यमयी तरीके से नदारद हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी संतोष कुमार की अदालत ने केस संख्या जीआर 1501/1996 (सीआईएस संख्या : 5766/2015) - स्टेट बनाम हारो राम में आदेश पारित करते हुए मामले की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (एडजॉर्न्ड साइन डाई) कर दिया है.

कोर्ट के आदेश से हुआ 17 वर्षों के अदालती आदेश गायब होने का खुलासा

न्यायालय द्वारा फाइल की गहन जांच करने पर पाया गया कि वर्ष 1996 से लेकर 2005 तक और पुनः वर्ष 2005 से लेकर 2013 तक अदालत द्वारा पारित किए गए पुराने आदेशों के मूल पन्ने केस फाइल में मौजूद ही नहीं हैं. इसके अलावा, किसी भी फौजदारी मुकदमे की बुनियाद माने जाने वाली मूल एफआईआर, पुलिस चार्जशीट और केस डायरी पूरी तरह गायब हैं. कोर्ट ने माना कि मौजूदा रिकॉर्ड पूरी तरह अधूरा और खंडित है. आदेश पत्र के अनुसार, अदालत ने 16 मई 2014 को ही कार्यालय को रिकॉर्ड रूम से मूल दस्तावेज मंगाने का कड़ा निर्देश दिया था, परंतु पूरे 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड रूम के कर्मियों द्वारा न्यायालय को मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए.

साक्ष्य मिलने पर पुनः खुलेगी बंद पड़ी फाइल

माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा है कि बुनियादी साक्ष्यों के अभाव में इस मुकदमे की आगे की कार्यवाही चलाना संभव नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि जैसे ही मूल रिकॉर्ड प्राप्त होता है या कोई भी पक्षकार (पार्टी) इससे जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने लाता है, तो इस बंद पड़े मुकदमे को तुरंत पुनर्जीवित (रिवाइव) कर दिया जाएगा. इस बड़ी लापरवाही के सामने आने के बाद अब जिला न्यायालय के प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मच गया है और रिकॉर्ड रूम की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं.


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