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बरात में बस नहीं भेजने पर लगा 35 हजार रुपये का जुर्माना

Updated at : 16 May 2024 11:03 PM (IST)
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बरात में बस नहीं भेजने पर लगा 35 हजार रुपये का जुर्माना

मुरारी एंड कृष्ण बस एजेंसी पर लगा 35 हजार रुपये का जुर्माना

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नवादा कार्यालय.

जिला उपभोक्ता आयोग ने मुरारी एंड कृष्णा बस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. फरियादी को पांच सालों के बाद न्याय मिला है. फरियादी पकरीबरावां के निवासी सुरेंद्र कुमार, पिता स्वर्गीय परशुराम साव ने मुरारी एंड कृष्णा बस ट्रांसपोर्ट सर्विस पर सेवा में त्रुटि को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग में वाद लाया था. शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार ने 20 अक्त्तूबर 2020 को आयोग में अपना वाद दाखिल किया था.

याचिकाकर्ता का कहना था कि पकरीबरावां से झरिया तक छह दिसंबर 2019 को बरात ले जाने के लिए मुरारी एंड कृष्णा बस सर्विस से बस नंबर BR02PB 7266 की बुकिंग करायी गयी थी. इसके लिए 27 हजार एक रुपये मेें बुकिंग की गयी थी. बुकिंग के लिए दस हजार एक रुपए रुपये का एडवांस भी किया गया था. शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि छह दिसंबर 2019 को पकरीबरावां से झरिया के लिए 11 बजे दिन में बारात लेकर जानी थी और 7 दिसंबर 2019 को सुबह में वापस पकरीबरावां बारात लेकर आना था. परंतु विपक्षी मुरारी एंड कृष्णा के बस मालिक से अनुरोध करने के बाद भी शाम चार बजे तक गाड़ी नहीं भेजा गया. बाद में परिवादी ने जल्दीबाजी में 12 हजार रुपये प्रति गाडी के हिसाब से आठ छोटी गाड़ियों को बरात जाने के लिए बुकिंग करना पडा. जिसका कुल किराया 96 हजार रुपये याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार को भुगतान करना पड़ा. देर से बारात ले जाने के कारण रास्ते में बारातियों के लिए अलग से नाश्ता व खाना आदि का भी इंतजाम करना पडा. इस मामले को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग आयोग में नुकसान की भरपाई के लिए अग्रिम भुगतान की राशि के लिए दस हज़ार, आठ छोटे गाडियों का भाड़ा 96 हजार, बराती के नाश्ता पर खर्च के लिए 10 हजार, बाराती के बर्बाद हुए खाने का मूल्य 32 हज़ार और मानसिक व सामाजिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार कुल एक लाख अंठानबे हजार का जिला उपभोक्ता आयोग में मुरारी एंड कृष्णा बस ट्रांसपोर्ट सर्विस के खिलाफ वाद लाया गया.

किया गया जुर्माना:

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष रघुपति सिंह और सदस्य मिथिलेश कुमार की बेंच ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि परिवादी ने सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने एवं आवश्यक विवाह संस्कार को सासमय पूरा करने के लिए जल्दी बाजी में मुंहमांगी कीमत पर वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी. इसके कारण परिवादी को आर्थिक क्षति हुई है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि परिवादी के प्रस्तुत बात को स्वीकार करते हुए विपक्षी पक्षकार को यह आदेश दिया कि परिवादी को अग्रिम भुगतान की राशि की 10 हजार रुपये अग्रिम भुगतान की तिथि 23 नवंबर 2019 से 6% साधारण ब्याज सहित तथा मानसिक शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार रुपये और वाद खर्च के लिए पांच हजार रुपये यानि लगभग 35 हजार रुपये जुर्माना के रूप में देने का आदेश पारित किया गया है. यदि 60 दिनों के भीतर जुर्माना का भुगतान नहीं होता है तो 9% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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