पठन-पाठन के नये हस्तनिर्मित टीचिंग मटीरियल से रूबरू हुए लोग

निपुण टीएलएम मेला 3.0 का जिलास्तरीय आयोजन डायट में संपन्न
निपुण टीएलएम मेला 3.0 का जिलास्तरीय आयोजन डायट में संपन्न बेहतर टीचिंग मटीरियल को पटना के आयोजन में भेजा जायेगा डीइओ, डीपीओ और प्राचार्य डायट ने कार्यक्रम की शुरुआत की प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय. विद्यालय में पढ़ने-पढ़ाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से टीचिंग मटीरियल को प्रभावी बनाया जा रहा है. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में गुरुवार को निपुण टीएलएम मेला 3.0 का जिला स्तरीय आयोजन किया गया. राज्य शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, निपुण बिहार मिशन के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की ओर से विकसित टीचिंग-लर्निंग मटीरियल को साझा करना, नवाचारों को प्रोत्साहित करना तथा लर्निंग आउटकम आधारित शिक्षण को मजबूत करना था. कार्यक्रम की शुरुआत डीइओ दीपक कुमार, डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान सुश्री वर्षा तथा डायट प्राचार्य फैयाज आलम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की. उद्घाटन सत्र में उपस्थित शिक्षकों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अतिथियों ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि टीएलएम विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है. डायट प्राचार्य फैयाज आलम ने कहा कि टीएलएम मेला केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि शिक्षकों के अनुभवों और रचनात्मकता को साझा करने का एक मंच है. उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर विकसित शिक्षण-सामग्री बच्चों के सीखने को अधिक स्थायी और अर्थपूर्ण बनाती है. इस जिला स्तरीय मेले में विभिन्न प्रखंडों से आए शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में विकसित टीएलएम का प्रदर्शन किया. पांच विषयों पर बने टीएलएम का किया प्रदर्शन प्रस्तुत सामग्री में भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन तथा अन्य विषयों से संबंधित गतिविधि-आधारित शिक्षण सामग्री शामिल थी. प्रतिभागियों ने अपने टीएलएम के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि किस प्रकार कम लागत और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से प्रभावी शिक्षण संभव है. इस कार्यक्रम में मूल्यांकनकर्ता के रूप में व्याख्याता मो तबरेज अख्तर, पिरामल ग्रुप से सुजीत कुमार तथा शिक्षक प्रतिनिधि ब्रजेश कुमार, राकेश कुमार और आलोक कुमार उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल ने टीएलएम की उपयोगिता, नवाचार, सीखने के प्रतिफल से संबंध, प्रस्तुतीकरण और कक्षा में प्रयोग की संभावना जैसे मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया. कार्यक्रम के दौरान आइक्यूएसी समन्वयक एवं व्याख्याता राकेश कुमार ने कहा कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में शिक्षकों की सृजनात्मक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि टीएलएम मेला जैसे आयोजन शिक्षकों को प्रयोगात्मक शिक्षण की दिशा में प्रेरित करते हैं और संस्थान में गुणवत्ता संस्कृति को मजबूत बनाते हैं. उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षण को बाल-केंद्रित और अनुभवात्मक बनाने में सहायक होते हैं. शिक्षकों ने अनुभवों को किया साझा विभिन्न प्रखंडों से आये शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली. प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के टीएलएम का अवलोकन किया और अपने अनुभव साझा किये, जिससे सीखने का एक सहयोगात्मक वातावरण बना. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को जिला गुणवत्ता शिक्षा समन्वयक बरुण कुमार एवं अधिकारियों ने प्रमाण-पत्र प्रदान किये तथा चयनित टीएलएम को राज्य स्तरीय मेले के लिए अनुशंसित की गयी. समापन सत्र में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी प्रतिभागियों, मूल्यांकनकर्ताओं तथा आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचारी प्रयास शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक होते हैं. यह कार्यक्रम शिक्षकों के लिए सीखने-सिखाने के नवाचारों को साझा करने का एक प्रेरणादायक मंच सिद्ध हुआ.
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