सांस लेने में भी मरीजों के छूट रहे पसीने, दलाल काट रहे चांदी

Updated at : 12 May 2017 7:40 AM (IST)
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सांस लेने में भी मरीजों के छूट रहे पसीने, दलाल काट रहे चांदी

सदर अस्पताल में एक महीने से बंद है अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे की सुविधा औसतन हर दिन 200 रोगियों की होती थी जांच नवादा कार्यालय : सदर अस्पताल सहित जिले भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की नि:शुल्क सुविधा मुहैया एक महीने से बंद है़ अस्पताल परिसर के इन सेंटरों पर दिन भर […]

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सदर अस्पताल में एक महीने से बंद है अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे की सुविधा
औसतन हर दिन 200 रोगियों की होती थी जांच
नवादा कार्यालय : सदर अस्पताल सहित जिले भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की नि:शुल्क सुविधा मुहैया एक महीने से बंद है़ अस्पताल परिसर के इन सेंटरों पर दिन भर मरीजों की भीड़ लगी रहती थी. अमीर से गरीब तक सभी इन सुविधाओं का लाभ उठाते थे. अब इन सेंटरों पर ताले लटके हैं. मरीजों को एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल के बाहर निजी सेंटरों पर जाना पड़ता हैं. निजी सेंटरों पर मरीजों से प्रति अल्ट्रासाउंड 800 रुपये व एक्स-रे के लिए 300 रुपये वसूले जाते हैं. इससे मरीजों को इलाज कराने में मुश्किल हो रही है.
इधर, अस्पताल के आसपास के जांच सेंटरों की चांदी है़ इन दिनों दलालों की भी चांदी कट रही है. अस्पताल परिसर से ही दलाल मरीजों के पीछे लग जाते हैं. एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर मरीजों को पहुंचाने पर दलालों को अच्छी रकम मिलती है. गरीब व ग्रामीण परिवेश के मरीज सुविधाओं के अभाव में भगवान भरोसे इलाज कराने को मजबूर हैं. चिकित्सक भी बीमारियों को डायग्नोज करने में दिक्कत महसूस करते हैं.
राज्य स्वास्थ्य समिति ने इन सुविधाओं पर राशि का भुगतान बंद कर दिया है. लगभग 10 महीने से सरकार ने भुगतान पर रोक लगा रखी है. केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एनएचआरएम के तहत राज्य सरकार को पैसा भुगतान किया जाता था. कुछ तकनीकी कारणों से मिलनेवाली राशि पर रोक लगी है. इससे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर चलनेवाले अल्ट्रासाउंड व एक्सरे केंद्रों पर ताला लटक गया है. राज्य भर में आइजीएमएस एजेंसी द्वारा पीपीपी मोड पर मरीजों को ये सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध करायी जा रही थीं. पैसा नहीं मिलने के कारण इन सुविधाओं को रोकना पड़ा.
फिलहाल निकट भविष्य में इन सुविधाओं के चालू होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने बताया कि निजी संवेदक भुगतान के अभाव में दिसंबर से ही सुविधाएं देने पर रोक लगा दी है़ मार्च तक भुगतान मिलने के आश्वासन पर कंपनी ने काम किया था. वर्ष 2016-17 में सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए 30048 व एक्स-रे के लिए 15377 मरीज आये थे़ इसके एवज में एजेंसी को 48,26,080 रुपये का भुगतान किया गया था.
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