कोचिंग के भरोसे जिले के विद्यार्थी

Updated at : 12 May 2017 7:38 AM (IST)
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कोचिंग के भरोसे जिले के विद्यार्थी

शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में नहीं हो पा रही है पढ़ाई गांव छोड़ कर जिला मुख्यालय में डेरा लेकर रह रहे विद्यार्थी नवादा नगर : गांवों व शहरों में शिक्षण संस्थानों की लगातार दयनीय होती स्थिति ने कोचिंग व ट्यूशन को एक रोजगार का स्वरूप दे दिया है. स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षकों […]

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शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में नहीं हो पा रही है पढ़ाई
गांव छोड़ कर जिला मुख्यालय में डेरा लेकर रह रहे विद्यार्थी
नवादा नगर : गांवों व शहरों में शिक्षण संस्थानों की लगातार दयनीय होती स्थिति ने कोचिंग व ट्यूशन को एक रोजगार का स्वरूप दे दिया है. स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं दिख रहा है. यही कारण है कि जो विद्यार्थी अपनी तैयारी करना चाहते हैं उन्हें मजबूरी में कोचिंग व ट्यूशन का सहारा लेना पड़ता है. जिला मुख्यालय में लॉज, हॉस्टल या किसी घर में छोटा सा कमरा लेकर गांव-देहात से आनेवाले विद्यार्थी अपनी पढ़ाई प्राइवेट स्तर से कोचिंग व ट्यूशन के सहारे पढ़ाई पूरा कर रहे हैं. हालात यह है कि सुबह पांच बजे से देर शाम तक इन संस्थानों में भीड़ दिखती है.
जबकि सरकारी स्कूल व कॉलेज में बच्चे आते तक नहीं. सरकार करोड़ों रुपये प्रति माह शिक्षकों के वेतन आदि पर खर्च कर रही है. सुविधा संपन्न भवन व इंफ्रास्ट्रक्चर बनवा रही है, लेकिन नामांकनवाले विद्यार्थी स्कूल में आकर पढ़ाई करने के बजाय कोचिंग व ट्यूशन में जाकर पढ़ रहे है. सरकारी स्कूलों के शिक्षकों व प्रबंधन को यह समझने की जरूरत है कि यदि छात्र-छात्राएं घर-परिवार छोड़ कर केवल पढ़ाई करने के लिए लॉज-हॉस्टलों में रह रहा है, तो वह पढ़ाई के लिए स्कूल या कॉलेज क्यो नहीं पहुंच रहा. स्थिति साफ है कि सभी विषयों के शिक्षक नहीं होने के कारण नियमित सभी कक्षाओं का संचालन नहीं हो पाता है.
स्कूल में एडमिशन है, लेकिन कभी क्लास होता ही नहीं है. परीक्षा में प्रशासन अधिकारी सख्ती करने के लिए पूरे फोर्स के साथ पहुंचते हैं. अब जब स्कूलों में क्लास नहीं चल रहे हैं, तो कोई अधिकारी क्यों नहीं स्कूल आते हैं.
मनीष कुमार, छात्र
आधे से ज्यादा दिन छुट्टी रहती है. यदि कोचिंग व ट्यूशन नहीं किया जाये, तो सिलेबस पूरा होना, तो दूर विद्यार्थी आधी किताब को भी नहीं पढ़ पायेंगे.
प्राची कुमारी, छात्रा
स्कूल जाने के बाद समय की बरबादी होती है. आधे समय, तो यूं ही बातचीत में चला जाता है. नियमित कई विषयों की पढ़ाई नहीं हो पाती है. कुछ शिक्षक बहुत अच्छे हैं, तो कुछ पढ़ाने के लिए शायद ही क्लास में आते हैं.
मनीषा भारती, छात्रा
कोचिंग में शिक्षकों द्वारा सभी चीजों को इस आसानी से समझायी जाती है. उनकी बातें आसानी से समझ में आ जाती है.
अमीषा भारती, छात्रा
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