बरतें सावधानी, रहेंगे सुरक्षित : डीएम

Updated at : 28 Apr 2016 8:12 AM (IST)
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बरतें सावधानी, रहेंगे सुरक्षित : डीएम

नवादा कार्यालय : जिला पदाधिकारी मनोज कुमार सह अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन मनोज कुमार ने आम जनता से अग्नि सुरक्षा हेतु सावधानियां बरतने की अपील करते हुए कहा है कि लोग अग्नि सुरक्षा हेतु निर्धारित मापदंडों का पालन अवश्य करें. जिले में बढ़ते अग्निकांड की रोकथाम हेतु सरकार के निर्देश के आलोक में ग्रामीण क्षेत्रों […]

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नवादा कार्यालय : जिला पदाधिकारी मनोज कुमार सह अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन मनोज कुमार ने आम जनता से अग्नि सुरक्षा हेतु सावधानियां बरतने की अपील करते हुए कहा है कि लोग अग्नि सुरक्षा हेतु निर्धारित मापदंडों का पालन अवश्य करें. जिले में बढ़ते अग्निकांड की रोकथाम हेतु सरकार के निर्देश के आलोक में ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह नौ बजे से पहले खाना बना लिया जाये.
पूजा पाठ हेतु किये जानेवाले हवन, अनुष्ठान को सुबह नौ बजे के पहले हर हाल में संपन्न कर लिया जाये. खेतों में गेहूं कटने पर बचे डंठल को किसी भी सूरत में नहीं जलाया जाये. डीएम ने कहा है कि इन निर्देषों का उल्लंघन करने पर व अग्निकांड की घटना होने पर आपदा प्रबंधन की नियम 2005 की धारा 51 बी के तहत दोषी व्यक्ति को एक वर्ष का कारावास अथवा जुर्माना दोनों सजा दंडनीय होगा. सरकार के इस निर्देश को कड़ाई से पालन करने हेतु डीएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी व अंचलाधिकारी को भी निर्देशित किया है. जिला पदाधिकारी मनोज कुमार ने अग्नि सुरक्षा हेतु बरते जाने वाली सावधानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु जिला सूचना व जन-सम्पर्क पदाधिकारी को निर्देशित किया है, जिसके आलोक में सभी प्रखंडों में होर्डिंग/फ्लैक्स लगाये जा रहे हैं.
अग्नि सुरक्षा के लिए ध्यान देने योग्य बातें
रसोई घर को यथासंभव अग्निरोधक बनाने के लिए उसे चारों तरफ मिट्टी का लेप लगा दें. फूस के घरों में भी मिट्टी का लेप लगाएं. देहाती क्षेत्रों में खास कर फूस व खपरैल मकानों के निवासी खाना सुबह आठ बजे से पहले व शाम पांच-छह बजे के बीच (सूर्यास्त) के पहले बना लें. दीप, लालटेन, ढ़िबरी आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें. रसोई में कोई भी ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखें, जैसे-मिट्टी तेल, सिंथेटिक कपड़े आदि. ढ़ीले व सिंथेटिक कपड़े न पहनें और बालों को खुला ना रखें. रसोई घर से बच्चों को दूर रखें. तेज हवा में खुली जगह पर खाना ना पकाएं.
यदि संभव हो तो चूल्हे को चारों तरफ से घेर कर रखें. किसी भी जलते पदार्थ को बुझा कर ही सोयें. घर में हमेशा अग्निशामक पदार्थ जैसे पानी, बालू, सूखी मिट्टी, धूल इत्यादि जमा कर रखें. हरे पेड़ जैसे केला में अग्नि ताप को कम करने की क्षमता होती है, अत: इसे अपने घर के चारों ओर लगाएं. सभी लोगों को प्राथमिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए. सभी लोग आपातकालीन सेवा का फोन नंबर 101 अपने पास अवश्य रखें. जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की कांटी खेत खलिहान में न फेंके. आग बुझाने के लिए पानी, बालू, सुखी मिट्टी का उपयोग करें. एक बड़े से ड्रम (200 लीटर) में पानी हमेशा भर कर रखें. कुछ छोटी बाल्टी में रेत (बालू) हमेशा रखें. एक, दो जूट की पुरानी बोरी को पानी में हमेशा बोर कर रखें. रोशनी के लिए बैटरी वाले संयत्र जैसे टार्च, इमरजेंसी लाइट आदि का ही प्रयोग करें. कई बार खलिहान में पूजा की जाती है. पूजा में उपयोग वाले अगरबत्ती, धूप आदि पर तब तक नजर रखें, जब तक कि वह बूझ नहीं जाता है.
यदि आसपास तालाब या कोई अन्य जल स्त्रोत हो तो वहां से खलिहान तक का पाइप व पंपसेट तैयार रखें. थ्रेसर चलाने में उपयोग आनेवाले डीजल, इंजन या ट्रैक्टर के धुंआ वाले पाइप से हवा की दिशा में अनाज का बोझा नहीं रखें. बिजली के तार के किसी भी जोड़ को ढ़ीला या खुला ना छोड़ें. बिजली के जोड़ को कभी भी प्लास्टिक से ना बांधें. बिजली के कनेक्शन के लिए कम या खराब गुणवत्ता वाले तार का प्रयोग न करें. खलिहान के आस-पास बीड़ी सिगरेट न पीयें और न किसी को पीने दें.
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