फिर भी न्यायकर्मियों को चिंता सुरक्षा प्रबंध में हैं कई सुराख

Updated at : 20 Apr 2016 7:32 AM (IST)
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फिर भी न्यायकर्मियों को चिंता सुरक्षा प्रबंध में हैं कई सुराख

छपरा में विस्फोट. जिला कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की गयी कड़ी छपरा कोर्ट में विस्फोट के बाद मंगलवार को जिला कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी़ नवादा (कोर्ट) : लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में एक न्यायपालिका भी आज दहशतगर्दो की जद्द में है. देश की आम जनता का विश्वास आज भी न्यायपालिका के […]

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छपरा में विस्फोट. जिला कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की गयी कड़ी
छपरा कोर्ट में विस्फोट के बाद मंगलवार को जिला कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी़
नवादा (कोर्ट) : लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में एक न्यायपालिका भी आज दहशतगर्दो की जद्द में है. देश की आम जनता का विश्वास आज भी न्यायपालिका के प्रति सुदृढ़ है. परंतु न्यायालय परिसर में बढ़ रही हिंसात्मक घटनाओं से आम आदमी के मन में भय व्याप्त है. सोमवार को छपरा व्यवहार न्यायालय में बम विस्फोट की घटना के बाद राज्य के सभी न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े किये है.
इस घटना के बाद सुरक्षा के नजरिये से जिला मुख्यालय स्थित व्यवहार न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है. मंगलवार की सुबह से ही न्यायालय परिसर में प्रवेश करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन तलाशी ली जा रही है. कोर्ट के मुख्य द्वार पर सुरक्षा बल के जवान मेंटल डिटेक्टर से लोगों की जांचोपरांत इंट्री दे रहे हैं.
न्यायालय परिसर में हैं कई गड़बड़ियां : व्यवहार न्यायालय के निर्मित भवन का विधिवत उद्घाटन उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार सिन्हा द्वारा 23 सितंबर 2000 को किया गया था.
उस समय कोर्ट परिसर की बनी चहारदीवारी पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया था. लेकिन हाल ही में कोर्ट परिसर में डाकघर का ताला तोड़ कर दो बार चोरी की घटनाएं हो चुकी है. वर्ष 2014 व 2016 में चहारदीवारी को लांघकर तीन कैदी फरार हो गये थे. कोर्ट परिसर का निर्माण तो हुआ, परंतु अधिवक्ताओं व मुवक्किलों के लिए भवन नहीं बनाया गया. इसके कारण कोर्ट परिसर में ही वकील व मुवक्किलों ने अस्थायी व्यवस्था कर ली.
इससे कोर्ट के मुख्य द्वार पर लोगों की लंबी कतार लगी रहती है. इनके प्रवेश करने की जांच में छोटी सी चूक बड़े वारदात का कारण बन सकती है. कोर्ट परिसर के दो मुख्य द्वार में से एक आम जनता के लिए है, जिस पर कड़ी जांच प्रक्रिया के बाद लोगों को कोर्ट में प्रवेश मिलता है. जबकि दूसरे द्वार से माननीय न्यायधीशों का प्रवेश होता है. इस पर किसी तरह की पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. कोई भी व्यक्ति नजर चुरा कर अवैधानिक तरीके से परिसर में घुस सकता है.
चहारदीवारी की कम ऊंचाई है मुसीबत : कैदियों के फरार होने, कोर्ट परिसर में चोरी होने, किसी भी अवांछित तत्व का परिसर में अवैधानिक तरीके से घुसने में कम ऊंचाई की चहारदीवारी मुख्य कारण है. इसकी ऊंचाई कम होने से कोई भी आसानी से इसे लांघ कर कोर्ट परिसर के अंदर व बाहर आ जा सकता है.
सुरक्षा में तैनात हैं पुलिसकर्मी : न्यायालय परिसर की सुरक्षा का भार बिहार पुलिस के जवानों द्वारा संभाला जाता है. मुख्य द्वार पर प्रवेश से लेकर कैदियों की पेशी व वापसी सहित रात में सुरक्षा के लिए सैप व बिहार पुलिस के जवान तैनात हैं. सादी वर्दी में भी सुरक्षा बल के तैनात लोगों पर कड़ी नजर रखते है.
चहारदीवारी की ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत
अधिवक्ताओं सहित न्यायालय के कर्मचारियों ने बताया कि सुरक्षा के लिए चहारदीवारी की ऊंचाई बढ़ायी जाये. साथ ही उनके ऊपर कटीले तारों की फेंसिंग की जाये. पार्किंग में लगनेवाले वाहनों की पहचान सुनिश्चित की जाये. साथ ही अधिवक्ताओं के लिए बननेवाले भवन का निर्माण अविलंब करवाया जाये. जिससे कोर्ट परिसर में अवांछित लोगों के प्रवेश पर रोक लग सके.
शीशम का सूखा पेड़ दुर्घटना को दे रहा न्यौता
कैदियों के लिए बने हाजत के सामने बाउंड्री के अंदर लगा शीशम का एक विशाल पेड़ पूरी तरह सूख चुका है. मंगलवार को इसकी एक बड़ी टहनी कैदियों को लाने वाले वाहन पर गिरी. तैनात सुरक्षा बलों की तत्परता के कारण एक बड़ी अनहोनी को टाला जा सका.
पार्किंग की नहीं है पर्याप्त व्यवस्था
कोर्ट परिसर में आनेवाले लोगों के लिए वाहन पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. परिसर के बाहर ही लोग अपने वाहनों को पार्किंग करते हैं. बेतरतीब पार्किंग के कारण कैदियों को लानेवाले वाहन के प्रवेश में प्रतिदिन मुश्किल का सामना करना पड़ता है. खुले में लगे वाहनों में किसी भी प्रकार के विस्फोटक को रख बड़ी वारदात को अंजाम दिये जा सकते हैं.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
न्यायालय परिसर में प्रवेश करनेवाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच मेटल डिटेक्टर से की जाती है. परिसर में पान, गुटखा, खैनी जैसी नशीली वस्तुओं के साथ मोबाइल जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं का सख्त रोक है.
इसका कड़ाई से पालन किया जाता है. कोर्ट कैंपस में भी सुरक्षा बल के जवान सादी वर्दी में लोगों पर नजर रखते है. हर गतिविधियों पर सख्ती बरती जा रही है़ सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक निर्देश दिया गया है़
नरेश पासवान, कोर्ट प्रभारी, बिहार पुलिस
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