चैत में ही जेठ जैसी गरमी

Updated at : 14 Apr 2016 8:27 AM (IST)
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चैत में ही जेठ जैसी गरमी

शादी विवाह के मौसम में मजबूरी में बाहर निकल रहे लोग वरिसलीगंज : अचानक पारा चढ़ने से चैत में ही जेठ जैसी गरमी महसूस होने लगी है. दोपहर में तो तपिश इतनी बढ़ जाती है कि लोगों को घर से निकलना मुहाल हो गया है. दिन में गरम हवाओं के चलने के कारण लोग छांव […]

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शादी विवाह के मौसम में मजबूरी में बाहर निकल रहे लोग
वरिसलीगंज : अचानक पारा चढ़ने से चैत में ही जेठ जैसी गरमी महसूस होने लगी है. दोपहर में तो तपिश इतनी बढ़ जाती है कि लोगों को घर से निकलना मुहाल हो गया है. दिन में गरम हवाओं के चलने के कारण लोग छांव की तलाश में रहते हैं.
तेज धूप के कारण लोग सुबह नौ बजे के बाद घरों से निकलने में कठिनाई महसूस कर रहे है. शादी विवाह के मौसम के कारण लोगों को घरों से निकलना मजबूरी है. गरमी के कारण नदी, पोखर व तालाबों में पानी की कमी हो गयी है. पारा बढ़ने से कई घरों में लगे चापाकल से भी पानी निकलना कम हो गया है.
बिजली की आंख मिचौनी भी लोगों की समस्या बढ़ाने में सहायक हो रही है. गरमी के इस मौसम में कई बीमारियों के दस्तक देने से सरकारी व निजी डॉक्टर के पास रोगियों कि संख्या बढ़ रही है. तपिश भरी गरमी से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को लाने पहुंचाने वाले अभिभावक को हो रही है. बच्चे छातों के सहारे स्कूल व कोचिंग जा रहे हैं. तापमान बढ़ने से पेयजल की समस्या भी बढ़ी है.
ऐसे करें गरमी से बचाव : तपिश भरी गरमी को दूर करने के लिए नींबु पानी पीना, तरबुज खाना, बेल व पुदीने का शरबत पीना, गन्ने का रस नींबु के साथ लेना, छाछ व सतु का सेवन करना, आम पानी पीना, फलो का रस लेना, खाने में सलाद का प्रयोग करना आवश्यक है.
पशुओं पर ध्यान देना जरूरी : गरमी में पशुपालकों को भी पशुओं को बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतनी होगी. पशु अस्पताल में समुचित मात्रा में दवा नहीं होने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ गयी है. इस भीषण गरमी में पशुओं को डायरिया, बुखार, चमोकन आदि होने का डर बना रहता है. इस तरह के रोगों से बचने के लिए सावधानी की जरूरत है.
एेसे समय में हर सप्ताह पशुओं के स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता होती है. इसके लिए सुबह शाम पशुओं को स्नान कराना, प्रचुर मात्रा में पानी पिलाना, दोपहर को घर से नहीं निकलना, अगर गरमी में पशु हाफने लगे तो ग्लुकोज का पानी देना, जानवारों को हरा चारा समुचित मात्रा में देना, विदेशी नस्ल की गाय को हवादार स्थान पर रखना व पंखे का प्रयोग करना व पाल्ट्री के स्थान को ठंडा रखना आवश्यक है.
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