छिपकली गिरने से विषाक्त प्रसाद खाकर एक ही परिवार के 10 लोग बीमार
Updated at : 13 Apr 2016 7:23 AM (IST)
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नवादा (सदर) : जिला मुख्यालय से सटे कादिरगंज ओपी अंतर्गत हसनपुरा गांव में विषाक्त भोजन खाने से एक ही परिवार के 10 लोग बुरी तरह बीमार पड़ गये हैं. बच्चे, बूढ़े व महिलाओं को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया गया है. सदर अस्पताल में इलाज करा रहे बीमार लोगों के परिजन कैलाश […]
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नवादा (सदर) : जिला मुख्यालय से सटे कादिरगंज ओपी अंतर्गत हसनपुरा गांव में विषाक्त भोजन खाने से एक ही परिवार के 10 लोग बुरी तरह बीमार पड़ गये हैं. बच्चे, बूढ़े व महिलाओं को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया गया है. सदर अस्पताल में इलाज करा रहे बीमार लोगों के परिजन कैलाश यादव ने बताया कि रात में छठ पूजा का प्रसाद खाने के उपरांत उसे खुला में छोड़ दिया गया था. बच्चे प्रसाद को सुबह में खाने के कुछ ही समय बाद सभी लोगों के पेट में भयानक दर्द उठा, जो असहनीय था.
देखते ही देखते घर के 10 लोग इस बीमारी की चपेट में आ गये. कैलाश यादव ने बताया कि स्थानीय पटवासराय निवासी मोहन सिंह के सहयोग से सभी लोगों को सदर अस्पताल में लाकर भरती कराया. हालत सुधरने का नाम नहीं ले रहा है. दोपहर 12 बजे सदर अस्पताल में पहुंचे सभी बीमार लोगों को इलाज के लिए जब डॉक्टर की खोज की गयी, तो आधे घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे. इससे पहले स्वास्थ्यकर्मियों व नर्सों द्वारा सभी बीमार लोगों को स्लाइन चढ़ाने का काम किया गया.
गंभीर रूप से बीमार लोगों में 65 वर्षीय चंद्रदेव यादव, 36 वर्षीय रामदेव यादव, 60 वर्षीय कानो देवी, 30 वर्षीय दिनेश यादव, 28 वर्षीय रिंकू देवी, 26 वर्षीय बबिता देवी, सात वर्षीय नीशू व चार वर्षीय अंशु को सदर अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भरती करा कर पानी चढ़ाने व ओआरएस का घोल दिया जा रहा है. कैलाश यादव ने बताया कि इस घटना में मामूली रूप से बीमार हुए कौशल यादव व सचिन कुमार को कादिरगंज के निजी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज कराया जा रहा है. बीमार दिनेश यादव ने बताया कि पेट में दर्द इस कदर है कि सहन नहीं हो पाता है. कैलाश यादव ने बताया कि रात में बने छठ के प्रसाद को खुले में छोड़ दिये जाने के कारण दाल में छिपकली गिर गयी थी.
इसका खुलासा लोगों के बीमार होने के बाद दाल को दूसरे बर्तनों में पलट कर देखने के दौरान हुआ. सदर अस्पताल में इलाज कर रहे डाॅ बीबी सिंह ने सभी की हालत खतरे से बाहर बतायी है. इंजेक्शन व दवा मिलने पर सभी मरीज पूर्ण रुपेण स्वस्थ हो जायेंगे. अस्पताल में ओआरएस का घोल नहीं मिलने पर पीड़ित परिजनों को खुद के पैसे से अस्पताल के बाहर स्थित दवा दुकानों से खरीदारी करते देखे गये.
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