बुढ़ापे में अपनों ने छोड़ा साथ तो दूसरों का मिला सहारा

Updated at : 02 Feb 2016 7:10 AM (IST)
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बुढ़ापे में अपनों ने छोड़ा साथ तो दूसरों का मिला सहारा

वारिसलीगंज : बुढ़ापे में अपनों साथ छूटता है तो काफी खतला है़ बुजुर्गों को लगता है कि अब कहां जायेंगे और कैसे गुजर-बसर होगा़ लेकिन, किसी न किसी रूप में दूसरों का सहारा मिल ही जाता है, जो जीवन को पार लगाता है़ कुछ ऐसा ही है शहर के पोस्टऑफिस गली स्थित बरगद तले चबूतरे […]

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वारिसलीगंज : बुढ़ापे में अपनों साथ छूटता है तो काफी खतला है़ बुजुर्गों को लगता है कि अब कहां जायेंगे और कैसे गुजर-बसर होगा़ लेकिन, किसी न किसी रूप में दूसरों का सहारा मिल ही जाता है, जो जीवन को पार लगाता है़ कुछ ऐसा ही है शहर के पोस्टऑफिस गली स्थित बरगद तले चबूतरे पर बैठी 65 वर्षीय गायत्री देवी के साथ.
शेखपुरा जिले के चेवाड़ा प्रखंड स्थित गडुआ गांव की इस वृद्ध को बेटा विजय सिंह ने प्रताड़ित कर घर से बेघर कर दिया. कार्तिक माह से ही इस वृद्धा ने वारिसलीगंज पोस्ट ऑफिस गली में बरगद के पेड़ के नीचे अपना आशियाना बना लिया है. मुहल्लेवासियों की दया भाव का ही प्रतिफल है कि वह अब तक जीवित है.
कंपकंपाती ठंड भी शायद उसे गर्माहट दे रही है. मुहल्लेवासियों की दया पर जीवित इस वृद्धा को एक बेटा व दो दो बेटियां भी है, जो शादीशुदा है. आठ साल पहले पति घूटो सिंह गंभीर रोग की चपेट में आकर दम चुके हैं. इस दुखियारी पर मुहल्लेवासियों का प्रेम व दया भाव भरा हुआ है. उनके सहयोग से ही यह अपना दिन गुजार रही हैं.
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