23 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय

Updated at : 27 Dec 2015 7:34 PM (IST)
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23 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय

23 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय प्रशासन, विधायक, सांसद की उदासीनता बना कारण फोटो-14प्रतिनिधि, रजौलीअनुमंडल का उद्घाटन 23 मई 1992 को किया गया था. तब बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद थे. साथ में रजौली विधायक स्व बाबूलाल चौधरी व नवादा विधायक स्व कृष्णा प्रसाद यादव समारोह में मौजूद थे.1992 में अनुमंडल […]

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23 साल बाद भी शुरू नहीं हुआ अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय प्रशासन, विधायक, सांसद की उदासीनता बना कारण फोटो-14प्रतिनिधि, रजौलीअनुमंडल का उद्घाटन 23 मई 1992 को किया गया था. तब बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद थे. साथ में रजौली विधायक स्व बाबूलाल चौधरी व नवादा विधायक स्व कृष्णा प्रसाद यादव समारोह में मौजूद थे.1992 में अनुमंडल का अपना भवन नहीं था. कार्यालय रजौली प्रखंड परिसर में शुरू किया गया था. 1992 से लेकर 2013 तक प्रखंड परिसर में अनुमंडलीय कार्य किया गया. अनुमंडल का अपना भवन दिसंबर 2013 में बना. 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक रजौली अनुमंडल परिसर में व्यवहार न्यायालय का कार्य चालू नहीं किया गया है. उच्च न्यायालय द्वारा विगत तीन माह पूर्व सार्वजनिक रूप से आदेश पारित किया कि बिहार में जितने भी नये अनुमंडल हैं, वहां व्यवहार न्यायालय शीघ्र चालू किया जाये. इसके बाद भी प्रशासनिक उदासीनता के कारण व्यवहार न्यायालय शुरू नहीं हो सका है.क्या है कारण व्यवहार न्यायालय शुरू नहीं होने का मुख्य कारण कारागार का नहीं होना बताया जाता है. व्यवहार न्यायालय के लिए जेल का होना आवश्यक है. नवादा जेल की दूरी यहां से 35 किलोमीटर है. रोज कैदी को लाना ले जाना कठिनाई भरा काम है. यह क्षेत्र नक्सली प्रभावित क्षेत्र है. जेल नहीं होने के कारण व्यवहार न्यायालय चालू नहीं हो पा रहा है. अधिवक्ताओं को बैठने की जगह सुनिश्चित नहीं है. अधिवक्ता पहले अनुमंडल के बरामदा में बैठ कर अपना कार्य किया करते थे. एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने मौखिक आदेश दिया कि आपलोग बरामदा को खाली कर दें . अनुमंडल परिसर के बायें भाग में चहारदीवारी के पास खाली भूमि पर अपना-अपना शेड बना कर अपना कार्य करें. तब से लोग अपना-अपना शेड बना कर कार्य कर रहे हैं. न्यायिक कार्यों में यह भी बड़ी बाधा मानी जाती है.हो रही परेशानी अधूरा अनुमंडल रहने से अधिवक्ताओं को कार्य करने में परेशानी का सामना कराना पड़ता है. लोगों को भी परेशानी होती है. जल्द ही व्यवहार न्यायालय का कार्य चालू हो. कार्यपालक दंडाधिकारी का तीन पद रिक्त है. लेकिन, यहां एक दंडाधिकारी की नियुक्ति हुई है. इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पडता है.रामवृक्ष प्रसाद, अधिवक्ता क्या कहते हैं लोगव्यवहार न्यायालय चालू नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नवादा की दूरी 35 किलोमीटर तय करना पड़ता है. मंत्री, नेता व प्रशासन की उदासीनता के कारण व्यवहार न्यायालय नहीं बन रहा है. राजीव कुमार बबलू, प्रदेश प्रतिनिधि कांग्रेस, रजौलीव्यवहार न्यायालय अनुमंडल में जल्द चालू होना चाहिए. 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी व्यवहार न्यायालय चालू नहीं हुआ. यह बहुत ही दुख की बात है. सरकार व्यवहार न्यायालय के लिए पहल करे. सत्येंद्र भदानी, भाजपा अध्यक्ष, रजौलीनये साल में चालू होने की संभावना व्यवहार न्यायालय की स्थापना के मानक प्रक्रिया है. उच्च अधिकारी से न्यायालय स्थापना का प्रतिवेदन मांगने पर दिया जायेगा. उम्मीद है नया साल में चालू होने की संभावना है.शंभु शरण पांडेय, अनुमंडल पदाधिकारी, रजौली

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