मशरूम सिटी बनने की राह पर पहला कदम

मशरूम सिटी बनने की राह पर पहला कदम राज्य का पहला मशरूम बीज (स्पॉन) उत्पादन केंद्र होगा नवादा-फ्लैग जिले के युवक प्रशिक्षण पाकर अपनायेंगे स्वरोजगारबृहत पैमाने पर बीज व खाद का होगा उत्पादनफोटो-2प्रतिनिधि, नवादा (कार्यालय)उच्च कोटि का पौष्टिक खाद्य पदार्थ मशरूम क उत्पादन को लेकर जिले में क्रांतिकारी पहल शुरू हो गयी है. राज्य में […]
मशरूम सिटी बनने की राह पर पहला कदम राज्य का पहला मशरूम बीज (स्पॉन) उत्पादन केंद्र होगा नवादा-फ्लैग जिले के युवक प्रशिक्षण पाकर अपनायेंगे स्वरोजगारबृहत पैमाने पर बीज व खाद का होगा उत्पादनफोटो-2प्रतिनिधि, नवादा (कार्यालय)उच्च कोटि का पौष्टिक खाद्य पदार्थ मशरूम क उत्पादन को लेकर जिले में क्रांतिकारी पहल शुरू हो गयी है. राज्य में प्रोटीन का शाकाहारी स्रोत मशरूम की आवक हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व पश्चिम बंगाल आदि से होती है. इसके कारण मशरूम काफी महंगी बिकती है. इसके व्यंजनों का जायका ऊंचे घरानों के लोगों तक सीमित है. लेकिन, जिले के किसान अमित कुमार ने मशरूम को आम आदमी के थाली का भोजन बनाने का बीड़ा उठाया है. साथ ही जिले के युवकों को प्रशिक्षित करके मशरूम उत्पादन करने का स्वरोजगार दिया जायेगा. आनेवाले दिनों में जिला बटन मशरूम, बीज (स्पॉन) तथा खाद उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरने वाला है. जिले में राज्य का पहला मशरूम बीज (स्पॉन), बटन मशरूम तथा खाद उत्पादन का केंद्र सदर प्रखंड के माया बिगहा में काम करने लगा है. अमित मशरूम केंद्र के संचालक अमित कुमार ने बताया कि पहले राज्य में हरियाणा के हिसार से मशरूम बीज मंगा कर इसका उत्पादन किया जाता था. परंतु, अब जिले में लगाये गये दो संयंत्रों से बटन मशरूम का लगभग छह टन खाद प्रत्येक 15 दिन पर तैयार होगा. उत्पादन केंद्र में लगे छह चैंबर से लगभग तीन हजार किलोग्राम मशरूम का उत्पादन प्रतिदिन होगा. इससे नवादा राज्य से मशरूम उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित होगा. बैंक द्वारा स्वरोजगार अपनाने में मिली मददकेंद्र सरकार की योजना के तहत नेशनल होर्टीकल्चार बोर्ड की पहल पर बैंक किसानों को वित्तीय सहायता देती है. यूनियन बैंक के ब्रांच मैनेजर भेला सरकार ने बताया कि सरकार लगनशील उद्यमियों की पहचान करके उनके तकनीकी ज्ञान तथा दक्षता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराती है. जिले के किसानों को मशरूम उत्पादन केंद्र लगा कर स्वरोजगार अपनाने में बैंक हर संभव मदद करेगी.मशरूम उत्पादन में आवश्यक है प्रशिक्षणमशरूम के उत्पादन में तकनीकी ज्ञान के साथ कुशता भी जरूरी है. अमित कुमार ने राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से 2004 में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया. माया बिगहा में लग रहे संयंत्र में हिमाचल प्रदेश के कृषि वैज्ञानिक डॉ अनिल कुमार सिंह अपना दिशा-निर्देश दे रहे है. मशरूम उत्पादन में चैंबर के तापमान का 17-18 डीसे पर नियमन, खाद निर्माण में विभिन्न घटकों की मात्रा, वायु का दबाव जैसे तकनीकी तथ्यों की जानकारी अति आवश्यक है. इन बारीकियों में दक्ष होकर किसान मुनाफे का सौदा आसानी से कर सकते है.अति उपयोगी है मशरूमराज्य में आदिवासी समूहों द्वारा प्राचीन काल से मशरूम का प्रयोग खाद्य पदार्थ में किया जाता रहा है. विटामिन व प्रोटीन से प्रचुर मशरूम शाकाहारी वर्ग के लोगों की खास पसंद है. दालों की बढ़ती कीमत से परेशान आम आदमी के लिए मशरूम एक बेहतर विकल्प है. डायबिटीज, हाइब्लड प्रेशर, हृदय रोग, कैंसर, त्वचा के रोग आदि में मशरूम के अत्यधिक फायदे है.
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