कुछ कागजों पर ही चल रहे

देना पड़ रहा सालाना सात लाख रुपये किराया नवादा : शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी के एक केंद्र को छोड़ कर सभी केंद्र किराये के भवन में चल रही है, जिससे सरकार के लाखों रुपये हरेक साल बरबाद हो रहा है. नगर पर्षद क्षेत्र अंतर्गत कुल 85 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इसमें 80 केंद्रों के ही चलने […]
देना पड़ रहा सालाना सात लाख रुपये किराया
नवादा : शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी के एक केंद्र को छोड़ कर सभी केंद्र किराये के भवन में चल रही है, जिससे सरकार के लाखों रुपये हरेक साल बरबाद हो रहा है. नगर पर्षद क्षेत्र अंतर्गत कुल 85 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इसमें 80 केंद्रों के ही चलने की बात कही जा रही है.
80 केंद्रों में मात्र एक केंद्र चौधरी टोला केंद्र संख्या 84 का ही अपना भवन है. बाकी 79 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहा है. इसमें सरकार का सात लाख 11 हजार रुपये किराये के नाम पर सालाना खर्च हो रहा है.
केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे इस योजना का लाभ गरीब बच्चों व गर्भवती महिलाओं को देना है. इसके लिए सभी केंद्रों को पोषाहार के लिए सालाना एक करोड़ पांच लाख 36 हजार रुपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन इसका जितना लाभ उन लाभुकों तक पहुंच रहा है, इस पर कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है.
किराये में भी पर्याप्त राशि नहीं मिलने से शहरी क्षेत्र के दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्र कागजों पर चल रहे हैं. इस बात को सदर प्रखंड सीडीपीओ भी भली भांति स्वीकार करने को तैयार हैं.
केंद्र सरकार की इस योजना पर प्रदेश सरकार ने इस जिले के शहरी क्षेत्र को नजरअंदाज कर दिया. प्रदेश के 38 जिलों में केवल 22 जिलों को ही शहरी क्षेत्र घोषित कर वहां के शहरी क्षेत्रों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तीन हजार रुपये बतौर किराया देने की घोषणा की है.
घोषणा में इस जिले के शहरी क्षेत्र को नहीं रखा गया है, जिससे किराया पर पर्षद क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र चलाना मुश्किल हो गया है. हालांकि, आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना भवन बनाने के लिए सरकार ने 15 सौ वर्ग मीटर ( तीन डिसमिल) भूमि सीओ के माध्यम से उपलब्ध करा कर भवन निर्माण कराने का आदेश दे रखा है. बावजूद नगर पर्षद क्षेत्र में भवन निर्माण कराने व भूमि उपलब्ध कराने में कोताही बरती जा रही है.
प्रत्येक भवन के निर्माण पर छह लाख रुपये खर्च किया जाना है. इसमें एक हॉल, एक रसोई घर, एक चापाकल व एक शौचालय बनाना है. दुर्भाग्य इस बात का है कि 85 सेंटर में पांच सेंटर बंद होने के साथ ही सहायिका के 12 पद रिक्त पड़ा है. गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 123 सेंटर को भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन शहरी क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराने में कोताही बरती जा रही है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले बच्चों व गर्भवती महिलाएं उपेक्षा का शिकार हो रही हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




