सड़क पर ही वाहनों का इंतजार

सड़क पर ही वाहनों का इंतजार जिला मुख्यालय के बस पड़ाव पर यात्री सुविधाओं का अभाव शाम होते ही बस पड़ाव में छा जाती है बीरानगीरोशनी के अभाव में चोर उच्चके होते हैं हावीनहीं चली रिंग बस सेवा फोटो-4, 5प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिला मुख्यालय में स्थित सभी चार बस पड़ावों पर यात्री सुविधाओं की काफी कमी […]
सड़क पर ही वाहनों का इंतजार जिला मुख्यालय के बस पड़ाव पर यात्री सुविधाओं का अभाव शाम होते ही बस पड़ाव में छा जाती है बीरानगीरोशनी के अभाव में चोर उच्चके होते हैं हावीनहीं चली रिंग बस सेवा फोटो-4, 5प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिला मुख्यालय में स्थित सभी चार बस पड़ावों पर यात्री सुविधाओं की काफी कमी है. जिला प्रशासन की ओर से तमाम सुविधाएं बहाल किये जाने की घोषणा के बाद भी बस पड़ावों पर भी यात्रियों काे काफी परेशानी होती है. वैध-अवैध सभी पड़ावों पर यात्रियों को खुले में ही वाहनों का इंतजार करना पड़ता है. बीच सड़क पर ही खड़े-खड़े इंतजार करते समय काफी तकलीफ भी होती है. जिला पर्षद की ओर से नवादा बाइपास में बनाये गये बुधौल स्टैंड में यात्री सुविधाओं का ख्यालय रखने के उद्देश्य से यात्रीशेड, चापाकल, शौचालय व रोशनी का इंतजाम किया गया था. परंतु, शहर से इसकी दूरी अधिक होने व रिंग बस सेवा नहीं शुरू होने के कारण वहां वाहनों का पड़ाव बंद हो गया है. शाम होते ही इस बस पड़ाव पर चोर-उच्चकों का अड्डा बना रहता था. इसके कारण से वाहन मालिकों ने बुधौल बस पड़ाव की बजाय पुराने बस पड़ाव से ही वाहनों को खोलना शुरू किया.अंधेरे में इंतजार पार नवादा खुरी नदी पुल स्थित पुराने बस पड़ाव से भी सुबह-शाम वाहनों का खुलना जारी है. इस बस पड़ाव से रजौली, गया, कोडरमा, गोविंदपुर के साथ ही कोलकाता, धनबाद, रांची, टाटा, बोकारो आदि स्थानों के लिए वाहने खुलती हैं. जिला प्रशासन की ओर से घोषित इस अवैध बस पड़ाव पर भी यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है. रोशनी नहीं होने से अंधेरे में ही यात्री वाहनों का इंतजार करते हैं. इस बस पड़ाव पर यात्री शेड नहीं रहने के कारण लोगों को सड़क पर बैठ कर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है. कुछ बुकिंग एजेंटों द्वारा यात्रियों को बैठने के लिए टेबुल, बेंच लगाये जाते है, जो कि अप्रयाप्त होते हैं. रात के अंधेरे में चोर उचक्कों द्वारा इस बस पड़ाव से यात्रियों का सामान गायब करने व पॉकेटमारी, छेड़खानी की घटनाएं आये दिन होती रहती है. इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री भी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. इस बस पड़ाव पर सबसे ज्यादा फजीहत महिलाओं को होती है, क्योंकि शौचालय की व्यवस्था न तो प्रशासन की ओर से की गयी है और न ही वाहन एजेंटों द्वारा. सुरक्षा की चिंता शहर के पुराने बस पड़ाव में से एक कन्हाई नगर स्थित तीन नंबर बस पड़ाव में शाम होते ही वीरानगी छा जाती है. नगर पर्षद की ओर से एक यात्री शेड को मरम्मत कर बैठने के काबिल बनाया गया है. परंतु, रोशनी व सुरक्षा के अभाव में शाम के बाद यहां से न तो वाहन खुलते हैं और न ही यात्री वाहनों का इंतजार करते हैं. सुबह पांच बजे से शाम छह बजे तक तीन नंबर बस पड़ाव से पकरीबरावां, वारिसलीगंज, रोह, कौआकोल, जमुई, सिकंदरा, अलीगंज आदि स्थानों के वाहनों का खुलना जारी रहता है. शाम के बाद पटना से आनेवाली बसें भी चंद मिनटों के लिए इस बस पड़ाव पर रूकती हैं. सुरक्षा व रोशनी के अभाव में यहां यात्री खुद को महफूज नहीं समझते हैं. बैठने का इंतजाम नहीं भगत सिंह चौक से आज भी प्राइवेट वाहनों का खुलना निरंतर जारी है. सरकारी बस पड़ाव से भी वाहनों का खुलना सुबह से शाम तक जारी है. परंतु, यहां यात्रियों के बैठने के लिए समुचित इंतजाम नहीं किया गया है. शाम पांच बजे के बाद इस पड़ाव से भी छोटे-बड़े वाहने नहीं खुलते हैं. हालांकि, दिन भर यहां वाहनों का रेला लगा रहता है. भगत सिंह चौक पर यात्रियों के बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण यात्री खड़े-खड़े ही वाहन का इंतजार करते है. सरकारी बस पड़ाव में सरकार की ओर से यात्री सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. ऐसे में रात का वाहन खुलना उचित नहीं है. रात में पहुंचने वाले यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. बना रहता है डरशहर के उत्तर पश्चिम कॉर्नर पर स्थित सद्भावना चौक बस पड़ाव पर भी यात्री सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया है. यात्री सुविधाओं के नाम पर भले ही वाहन संचालकों द्वारा बुधौल बस पड़ाव की बजाय सद्भावना चौक से वाहन खोला जा रहा है. इस स्थान से यात्रियों को सहज वाहन उपलब्ध हो जाते हैं. परंतु, अवैध बस पड़ाव एनएच-31 पर वाहनों का आवागमन काफी होने के कारण यात्रियों को दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है. कई बार इस स्थल पर हादसे हो चुके हैं. फिर भी अवैध पड़ाव से वाहनों का खुलना जारी है. यहां बैठने के लिए अन्य स्थानों के तरह एक यात्री शेड है. परंतु शौचालय व पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को फजीहत होती है. देर रात इस बस पड़ाव पर उतने वाले यात्री खुद को अपने घरों तक जाने में असुरक्षित महसूस करते हैं. क्योंकि, सद्भभावना चौक से संत जोसेफ स्कूल होते हुए पुल पार करने के दौरान कई बार लूट-छिनतई व हत्या की बारदात भी हो चुकी है.
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