नहीं थम रही चोरी की घटनाएं

Updated at : 06 Dec 2015 7:54 PM (IST)
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नहीं थम रही चोरी की घटनाएं

नहीं थम रही चोरी की घटनाएं नवादा में अपराधियों के बढ़ते हौसले से लोगों में दहशतवर्षों पूर्व हुई घटनाओं का उद्भेदन करने में पुलिस को नहीं मिली सफलताचोरी की घटनाओं के खिलाफ नागरिकों ने बनाया स्वयं रक्षा समूहलाठी-डंडे लेकर करेंगे मुहल्ले में पहरेदारी प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिले में चोरी, डकैती व छिनतई जैसी आपराधिक घटनाओं पर […]

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नहीं थम रही चोरी की घटनाएं नवादा में अपराधियों के बढ़ते हौसले से लोगों में दहशतवर्षों पूर्व हुई घटनाओं का उद्भेदन करने में पुलिस को नहीं मिली सफलताचोरी की घटनाओं के खिलाफ नागरिकों ने बनाया स्वयं रक्षा समूहलाठी-डंडे लेकर करेंगे मुहल्ले में पहरेदारी प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिले में चोरी, डकैती व छिनतई जैसी आपराधिक घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है. अपराधियों के बढ़ते हौसले के कारण लोगों में दहशत और भय का माहौल कायम हो गया है. पुलिस द्वारा चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने संबंधी कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने पर अब नागरिकों ने स्वयं मोरचा संभाल लिया है. रात में स्वयं रक्षा समूह के सदस्य पहरेदारी का भी काम करेंगे. चोरी जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए मुंहतोड़ जवाब देने के लिए स्वयं रक्षा समूह के सदस्यों ने भी कमर कस लिया है. रविवार की शाम वीआइपी कॉलोनी के दर्जनों लोगों ने मुहल्ले में बढ़ती चोरी, लूट आदि की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक स्वयं रक्षा समूह का गठन किया है. स्वयं समूह में युवाओं की टोली द्वारा मुहल्ले की रक्षा के लिए लाठी-डंडा लेकर पहरेदारी करने का निर्णय लिया गया. पुलिस के लिए पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान घटित कई अपराधिक घटनाएं चुनौती बनी हुई है. कई घटनाओं में पुलिस को आज तक सफलता हाथ नहीं लग पायी है, जिसका परिणाम है कि चोरी जैसी घटनाएं होने के बाद भी लोग अब थानों में एफआइआर दर्ज कराने से भी कतराने लगे हैं. लोगों का मानना है कि पुलिस में एफआइआर दर्ज कराने के बाद मामला टांय-टांय फीस हो जाता है, भले ही गिरफ्तार लोगों को संबंधित घटनाओं में संलिप्तता बताकर उद्भेदन करने की बात कही जाती है. लेकिन, आज तक चोरी, लूट, छिनतई में गये सामान की बरामदगी नहीं हो पाती है. डॉ अरविंद के घर में हुई थी लाखों की चोरीनवादा के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ अरविंद कुमार के घर में वर्ष 2012 में चोरों ने घर के दूसरी तला से लगभग पांच लाख रुपये नकदी और जेवरात की चोरी कर ली थी. इस मामले में तत्कालीन एसडीपीओ रविस कुमार द्वारा कुछ चोरों की गिरफ्तारी की गयी थी. परंतु, चोरी गयी जेवरात और रुपये की बरामदगी नहीं हो पायी थी. तीन वर्षों बाद भी पुलिस को इस मामले में सफलता हाथ नहीं लगी. हाइ प्रोफाइल इस मामले के उद्भेदन को लेकर तत्कालीन डीजीपी स्तर के अधिकारी भी हस्तक्षेप किया था. परंतु, सफलता हाथ नहीं लगी. अब माना जाता है कि इस मामले की फाइल शायद नगर थाने की शोभा बढ़ा रही है. इस संबंध में डॉ पूनम शर्मा कहते हैं कि आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भी नवादा पुलिस चोरी गये रुपये व जेवरात बरामद करने में असफल रही. सर्राफा कारीगर के घर हुई थी लाखों की डकैतीदो वर्ष पूर्व दो दिसंबर 2013 को शहर के स्टेशन रोड स्थित होटल राजश्री के पीछे डकैतों ने अहले सुबह उदय कारीगर के घर धावा बोल कर 10 लाख रुपये से अधिक के जेवरात बंदूक के नोक पर लूट लिये गये थे. लूट की इस घटना के बाद तत्क्षण पुलिस को दी गयी सूचना में अपराधियों के संबंध में कई जानकारी दी गयी थी. परंतु, पुलिसिया कार्रवाई नगण्य रही थी. लुटेरों ने लूट के दौरान ही उदय कारीगर का मोबाइल भी अपने साथ ले गया था. जो घटना के आठ घंटे तक ऑन था, फिर भी पुलिस को अपराधियों का लोकेशन प्राप्त करने में सफलता हाथ नहीं लगी थी. तत्कालीन एसडीपीओ शहरियार अख्तर ने सर्राफा व्यवसायियों के बढ़ते दबाव के बाद आठ दिनों के भीतर लूट का सामान बरामद करने का दावा किया था. परंतु दो वर्ष बाद भी सर्राफा की कीमती जेवरात तो दूर पांव की बिच्छिया भी पुलिस बरामद नहीं कर पायी. घटना के पीड़ित उदय कारीगर कहते हैं कि पुलिसिया गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ फटकार के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगा. सेंट्रल बैंक में हुई थी 28 लाख रुपये की डकैतीशहर के विजय बाजार स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शाखा में पांच अगस्त, 2008 की अहले सुबह सवा दस बजे बैंक लूट गिरोह के एक सरगना द्वारा फिल्मी अंदाज में सभी कर्मियों को कमरे में बंद कर 27 लाख 75 हजार रुपये लूट लिये गये थे. इस घटना की खबर पाकर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शालीन ने खुद मोर्चा संभालते हुए बैंक में प्रवेश किया गया था. परंतु, पुलिस को उस दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगा था. तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के प्रयास से एक सप्ताह के भीतर ही बैंक लूट गिरोह के कई सदस्य गिरफ्तार भी कर लिये गये थे. पुलिस को कुछ समय उपरांत लूटे गये कुछ रुपये भी बरामद हुए थे. परंतु, सात वर्षों बाद भी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया लूटे गये पूरी रुपये की बरामदगी नहीं हो पायी है. इस तरह की जिले में दर्जनों अपराध की घटनाओं की कहानियां भरी पड़ी है, जिससे पुलिस सुलझाने में अब तक नाकाम साबित हो रही है. छोटी-छोटी घटनाओं पर भी अंकुश नहीं लगने का परिणाम है कि लोगों का भरोसा पुलिस पर से उठ रहा है और स्वयं सुरक्षा का कमाल संभाल रहे हैं. जल्द कर लिया जायेगा उद्भेदन हाल के दिनों में घटित आपराधिक घटनाओं का उद्भेदन पुलिस द्वारा जल्द कर लिया जायेगा. गिरोह की धर-पकड़ के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है. रात में गश्ती के लिए आठ स्थानों पर विशेष गश्ती दल शहर में भ्रमण करेगा. रात नौ से 12 तक बजे तक अंजान लोगों और वाहनों की जांच की जायेगी. नगर थाना को विशेष निर्देश दिये गये है. विकास बर्मन, पुलिस अधीक्षक

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